युवा कलम

आओ जानें चिडि़यों का संसार भाग 6

लोकेश कुमार पाण्डे, नैनीताल-

पक्षियों की दुनिया बड़ी ही सुन्दर, रोचक और आयामों से भरी हुई है। पिछले अंकांs में हमने पक्षियों के बारे में बहुत कुछ जाना।आज उनके जीवन के कुछ रोचक तथ्यों पर प्रकाश डाल रहे हैं। समुद्र के किनारे पाया जाना वाला पेंग्विन बड़ा ही संस्कारवान पक्षी है। दो से चार फुट ऊँचा होता है। इसकी चाल बड़ी ही नखरे वाली होती है लेकिन चाल में अकड़ भी वैसी ही होती है। लेकिन इनके बराबर समर्पित माता पिता कोई नहीं। ये बच्चों की हिफाजत व देख- रेख के प्रति बडे़ ही गम्भीर होते हैं। ये मेहमानों का स्वागत बडे़ ही सब्र व प्रेम के साथ करते हैं। सफर में हमेशा झुण्ड का ख्याल रखते हैं। किसी के साथ कोई दुर्घटना न हो इसके लिये विशेष बोली को प्रयोग में लाते हैं। सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखते हैं। पेंग्विन बड़े ही जिज्ञासु होते हैं। पक्षियों में आश्चर्यों की कोई कमी नहीं है। जैसे-जैसे इनके बारे में जानने को मिलता है जिज्ञासा और भी बढ़ती जाती है। सारस का जीवन भी आश्चर्यों से भरा हुआ है।

भारत में दाम्पत्य जीवन की सफलता का प्रतीक सारस को माना जाता है। सारस एक दुर्लभ पक्षी है। इसे कई जगहों पर सन्तराम के नाम से भी पुकारा जाता है। सारस जब उड़ता है तो ऐसी आवाज उत्पन्न होती है मानो कोई भारी हवाई जहाज उड़ रहा हो। यह जीवन भर एक ही साथी के साथ जीवन व्यतीत करता है और किसी एक की मृत्यु पर यह आजीवन विरह में भटकते रहता है। हमारी सबसे चिर परिचित चिडि़या है कबूतर। इन्होंने शहरों के हिसाब से स्वयं को ढाल लिया है। बड़े ही निश्चिंत होकर यह कहीं भी घोंसला बना लेता है। कबूतरों को आपने अपनी पूंछ पर चोंच रगड़ते हुये देखा होगा। ये ऐसा इसलिये करते हैं क्योंकि इनकी पूंछ के नीचे एक तेल ग्रन्थि होती है। जिस पर ये चोंच रगड़ कर तुरन्त पंखों पर रगड़ लेते हैं। इसके कई फायदे होते हैं। एक तो पंखों की सफाई हो जाती है जिससे उनमें चमक आ जाती है तथा तेल की वजह से पानी पंखों में नहीं ठहरता। कबूतर की बात हो ही रही है तो आपको बता दें कि कबूतर गजब के सूदखोर होते हैं। ये पहले उधार तो आसानी से दे देते हैं लेकिन वसूली के वक्त बड़ी ही सख्ती और बदतमीजी के साथ पेश आते हैं और कई बार लड़ाई झगड़े तक में उतर आते हैं। जिन दिनों भोजन बहुतायत से मिलता है अधिकांश पक्षी भोजन एकत्र कर लेते हैं ताकि अन्य दिनों में वह भोजन उनके काम आये और कुछ पक्षी इस जमा भोजन को उधार के रूप में अन्य को भी देते हैं। ऐसा वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि पक्षी उधार के साथ हिसाब किताब भी रखते हैं। पक्षी वैज्ञानिकों के लेखों व विज्ञान पत्रिकाओं के माध्यम से ही पता चलता है कि कठफड़वा उधार देकर अपनी चोंच से निशान मारकर उधार का ब्योरा रखता है। वैज्ञानिकांs का मानना है कि गौरेया उधार दिये गये सामान पर 50% तक का ब्याज लगाती है। जबकि कौआ सिर्फ विश्वास पात्र को ही उधार देता है। तोता भी कबूतर की भाँति सूदखोरी मंs अव्वल है। यहाँ भी वसूली के लिये जुबानी जंग, लड़ाई-झगड़ा आम बात है। नरहेच भी भोजन को जरूरत के दिनों के लिये एकत्र कर रखती है लेकिन उधार कम ही देती है।