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आओ जानें चिडि़यों का संसार भाग 9

आओ जानें चिडि़यों का संसार
लोकेश कुमार पाण्डे, नैनीताल -
उत्तराखण्ड अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के साथ जैव विविधता से सम्पन्न राज्य है। यह प्रदेश मनुष्य हो या पक्षी सभी के लिये स्वर्ग है। नैनीताल जिले में तो पक्षियों की इतनी विविधता पाई जाती है कि पक्षी प्रेमी इन्हें देखने के लिये और अपने कैमरों में कैद करने के लिये लालायित रहते हैं। पक्षी दर्शन से जुड़े लोगों की इस क्षेत्र में खासी मांग है। इस क्षेत्र के विशिष्ट पक्षी प्रजातियों के बारे में जानकारी और उन्हें देखने के लिये पक्षी प्रेमी एक हजार से तीन हजार रू0 तक बर्ड वाचिंग गाइड पर खर्च करते हैं ताकि वह उन दुर्लभ पक्षियों का दीदार कर सकें। पक्षी दर्शन और उसकी फोटोग्राफी एक बेहद मंहगा शौक होने के बावजूद इसके शौकीनों की कोई केमी नहीं है। झीलें, नदियां और बैराज पक्षियों के लिये यहाँ स्वर्ग से कम नहीं है जीवन की आपार संभावनाओं के कारण यहाँ हर मौसम के साथ कई पक्षी प्रजातियों का दीदार हो जाता है। यहाँ कई दुर्लभ प्रजातियों का निवास स्थान है जो सिर्फ इन्हीं क्षेत्रों में पाई जाती हैं। ऐसा नहीं है कि पक्षी दर्शन इसी समय लोकप्रिय हुआ हो। ब्रिटिश समय में भी पक्षी दर्शन इस क्षेत्र में एक लोकप्रिय क्रिया थी। जिम कार्बेट तो इस क्षेत्र में पक्षियों की उपस्थिति से बेहद प्रभावित थे और नैनीताल को बर्ड सैंचुरी तक बनाना चाहते थे। जिम कार्बेट के इस प्रयास से इस बात को समर्थन मिलता है कि यह क्षेत्र पक्षियों के मामले में कितना सम्पन्न था और अब भी है। क्योंकि तब हो या अब प्रकृति से प्रेम करने वाला इन सुन्दर जीवों के प्रभाव में आने से बच नहीं सकता है। तकनीकों और संसाधनों ने पक्षी दर्शन को बेहद सुगम बनाकर इसकी लोक प्रियता को बेहद बढ़ा दिया है। पक्षियों के शीतकालीन प्रवास के दौरान तो पक्षी दर्शन करने वालों के लिये यह जिला मानो स्वर्ग हो जाता है। बार हेडेड गूज, मार्मोरेंट, बाह्मणी डक, क्रेन, डाटर स्टेपी ईगल जैसे शिकारी पक्षी अपनी प्रवास यात्रा के दौरान यहाँ की खूबसूरती में चार चाँद लगा देते हैं। सर्दी के मौसम में रेडस्टार्ट की कई प्रजातियां यहाँ आती हैं जैसे कि व्हाइट कैपड रेड स्टार्ट, प्लमबस रेड स्टार्ट, ग्रे हेडेड रेड स्टार्ट आदि जिसमें से व्हाइट कैपड रेड स्टार्ट ने व्यक्तिगत तौर पर मुझे बड़ा प्रभावित किया। इन दिनों झील के किनारे इसे आसानी से देखा जा सकता है और इसकी पहचान इसके सफेद सिर, हिलती हुई लाल काली दुम से आसानी से की जा सकती है। विगत कुछ वर्षो में झील के किनारे लगी हुई झाडि़यों के कम होने से झील के किनारे पाये जाने वाले पक्षियों की संख्या में बेहद कमी महसूस की गई है। नैनीताल और अन्य झीलें प्राकृतिक सुन्दरता से भरपूर हैं और यह पक्षी इसकी खूबसूरती को बढ़ा देते हैं यदि ऐसी झाडि़यां जो कि पहले भी प्राकृतिक तौर पर यहां पाई जाती थीं, का रोपण किया जाय तो पक्षियों की इस क्षेत्र के प्रति उदासीनता खत्य होगी और यह सुन्दर, प्राकृतिक तौर पर समृद्ध स्थान हमेशा अपनी इस समृद्धि का गान इन पक्षियों के मधुर गीतो के रूप में करते रहेंगे।