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आदर्श ग्राम बनाने की आदर्श योजना - (साँझी)

आदर्श ग्राम बनाने की आदर्श योजना - (साँझी)
मनुज पाण्डे, देहरादून -
सांसद आदर्श ग्राम योजना (साँझी) या (एस ए जी वाई) का उद्देश्य क्या असल में मात्र अवसंरचना विकास करने का है या फिर गाँव में और ग्रामीण जनता के मन में कतिपय नैतिक भावनाएं उत्पन्न करना और उससे जुड़े व्यापक स्वरूपों को आदर्श बनाने की भूमिका में एक नयी पहल है। आखिर क्या है ये योजना आइये, जाने। मूलतः यह योजना महात्मा गांधी जी की ग्रामीण विकास की संकल्पना ‘स्वराज’ को ‘सुराज’ में बदलने के लिए आदर्श ग्रामों के विकास पर केंद्रित है। जिसकी शुरुआत करीब 6 महीने पहले लोक नायक जय प्रकाश नारायण जी की जन्म वर्षगांठ 11 अक्टूबर 2014 पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गयी। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक सांसद द्वारा 3 आदर्श ग्रामों का विकास 2019 तक करने का लक्ष्य रखा है, जिसमे से एक गांव को 2016 तक विकसित करना है। उसके बाद 2024 तक प्रत्येक वर्ष 1 आदर्श ग्राम तथा कुल 5 आदर्श ग्रामों के विकास का लक्ष्य रखा गया है। साँझी के माध्यम से सरकार की कोशिश राष्ट्रीय गौरव, देशभक्ति, सामुदायिक भावना, आत्मविश्वास,और बुनियादी ढांचों को लेकर समग्र विकास पर समान दृष्टि, बल और उसे साँझा करने की है।

इस योजना के क्रियान्वयन की धुरी देश के सांसद है जिनकी नेतृत्व क्षमता, प्रतिबद्धता और कार्यकुशलता से आदर्श ग्राम को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत किसी ग्राम की बुनियादी इकाई ग्राम पंचायत मानी गयी है। मैदानी क्षेत्रों में इन इकाइयों की आबादी 3000 से 5000 और पर्वतीय, जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में 1000 से 3000 निर्धारित की गयी है। तथा ऐसे जिले जहां इकाई का आकार उपलब्ध नहीं है, वहां ऐसी ग्राम पंचायतों का चयन किया जा सकता हैं जहाँ कि आबादी वांछित आबादी के लगभग समान है। इसके अलावा योजना में ऐसा भी प्रावधान है की संसद सदस्य आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए अपने खुद के या अपनी दंपत्ति के गाँव के अलावा किसी उपयुक्त ग्राम पंचायत का निर्धारण करने के लिए स्वतंत्र है। अभी तक देशभर में जहाँ लोकसभा से कुल 543 सांसदों में से 490 ने ग्रामों को अंगीकृत किया है वही राज्यसभा में कुल 246 में से 183 सांसदों ने ही गावों को गोद लिया है। अगर हम उत्तराखण्ड में सांसदों के रिकाॅर्ड पर नजर डाले तो लोकसभा में पूरे 5 सांसदो ने वहीं राज्यसभा में 3 में से सिर्फ 1 सांसद ने गावों को अंगीकृत किया है।
उत्तराखण्ड में अंगीकृत किये गए ग्रामो का विवरण निम्न प्रकार है-

साँझी का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत, पारदर्शी ग्राम पंचायतों और सक्रिय ग्राम सभाओं के माध्यम से सुदृढ़ीकरण करना है। इस प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी भी प्रोत्साहित की गयी है तथा महिलाओं और बच्चों के मुद्दों और चिंताओं पर चर्चा महिला सभा और बाल सभाओं के जरिये किया जाना योजना को सबका साथ-सबका विकास की रेखा पर आगे ले जाता हुआ जैसा दिख रहा है। ई-गवर्नेंस की भागीदारी से लोकतंत्र को मजबूत करना भी इस योजना में अपूर्व हिस्सा है।
प्रौद्योगिकी और नवाचारों के समावेश का योजना क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना भी परिलक्षित है। तथा योजना बनाने के लिए रिमोट सेंसिंग, निगरानी के लिए मोबाइल आधारित प्रौद्योगिकी और कृषि प्रौद्योगिकी के उपयोग से उत्पादन बढाना शामिल है। गांव में जीवंत और सामंजस्यपूर्ण समाज बनाने के लिए, गांव के बुजुर्गों, लोक कला उत्सव और गांव पर गाने आदि जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना भी इस योजना को क्या अनोखा नहीं बनाता, लगता तो ऐसा ही है।
योजना के अंतर्गत प्रत्येक गांव में नियोजन प्रक्रिया जिला कलेक्टर द्वारा समन्वित भागीदारी के साथ करना निर्धारित होती है। साँझी के कार्यकलापों में समुदायिक भागीदारी को अग्रणी रखते हुए कार्यक्रम केंद्रित किया गया है जिसके माध्यम से अन्य विकासशील गतिविधियों को बल मिलेगा। उदाहरण के लिए सभी आयु वर्गों के बीच, शराब, धूम्रपान, मादक द्रव्यों (ड्रग्स, तंबाकू, गुटखा आदि) के सेवन को कम करना।
योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के क्रम में विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, एमपीएलएडीएस, राज्य सरकार और निजी क्षेत्रो आदि की योजनाओं का अभिशरण करना इस योजना की कार्यनीति में शामिल है। तथा नोडल मंत्रालय के रूप में ग्रामीण विकास मंत्रालय का दायित्व उसके कुशल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए बारीकी से योजना की निगरानी करना है। इस योजना के अंतर्गत मध्यावधि और परियोजना का मूल्यांकन स्वतंत्र एजेंसी से कराने का भी प्रावधान है जिसके निष्कर्ष स्वरुप चार प्रकार की श्रेणियों ;सर्वोत्तम प्रैक्टिसेज, सर्वश्रेष्ठ प्रभारी अधिकारी, सर्वश्रेष्ठ जिला कलेक्टर एवं सर्वश्रेष्ठ आदर्श ग्रामद्ध में पुरस्कार दिया जाना तय किया गया है।
अतः यह योजना अद्वितीय और परिवर्तनकारी विकास की दिशा में एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है। तथा अब तक की मात्र बुनियादी ढांचे के विकास से परे है। साँझी के अंतर्गत कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण, आजीविका आदि का चयनित गांव में समेकित विकास को लेकर परिकल्पना इस बात को दिखती है कि सोच बड़ी प्रगाढ है पर देखना यह है की क्रियान्वयन भी वैसा ही हो। क्यों आपको क्या लगता है? देखते हैं की चुने गए इन गांवों में भागीदारी की कुशलता और कसौटी से क्या आदर्शवादिता दिखती है? सामाजिक भागीदारी और सही सोच के साथ सही क्रियान्वयन ही महात्मा गांधी की संकल्पना और भारत सरकार की इस अभूतपूर्व कोशिश को अंतिम और विकासशील स्वरुप दे पायेगा।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें - www.saanjhi.gov.in