संपादकीय

आपदाऐं सबक भी चुनौती भी.....

आपदाऐं सबक भी चुनौती भी इससे सीखने और बचने का हुनर जरूरी है।
हिमालय क्षेत्र जो कि भूकम्प और प्राकृतिक आपदाओं के हिसाब से बेहद संवेदनशील है और इस संवेदनशीलता को यहां पर हुए अव्यवस्थित निर्माणों ने और अधिक बढ़ा दिया है। भूकम्प के कारण अधिक संवेदनशील और कई बार आपदाओं का सामना होने बाद भी न तो समाज, न शासन और न ही प्रशासन इसके प्रति सर्तक है और न ही तैयार। मात्र आपदा नियंत्रण कुछ संस्थाओं के भरोसे रहकर आपदाओं से न तो निपटा जा सकता है और न ही आपदा न्यूनीकरण का काम हो सकता है। आपदा न्यूनीकरण के लिए वृहद रूप में जागरूकता अभियान व इससे निपटने के तरीकों का प्रशिक्षण आम लोगों तक पहुँचना बेहद जरूरी है। जिस तरीके की आपदाऐं हमने भूतकाल में झेली हैं और जहाँ-जहाँ पर हमने स्वयं को असमर्थ पाया है, उन समस्याओं से कैसे निकला जा सके।

साहसिक पर्यटन में उपयोग आने वाली विधाऐं और आपदा नियंत्रण प्रणाली के तहत कार्यदायी संस्था यदि लोगों व बच्चों को प्रशिक्षित करें तो एक आपदा नियंत्रण व न्यूनीकरण कार्ययोजना का विकास होगा जो जान माल के नुकसान को काफी हद तक कम कर देगी। इस क्षेत्र में जापान से हम सीख ले सकते हैं जो कि भूकम्प की मार झेलता ही रहता है और आपदा न्यूनीकरण की अनिवार्य योजनाओं के द्वारा जान माल के नुकसान को आशिंक रूप तक ही सीमित रखता है। जिसके कारण उसके विकास पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता और वह तेजी से बड़ी से बड़ी समस्या से पार पा लेता है। यदि हम इस प्रकार की कार्यप्रणाली को लागू करें और व्यवहारिक रूप से पटल पर उतार सकें तो हमें वह आपदा का दंश नहीं झेलना पड़ेगा, जो झेलना पड़ा है। इससे आपदा न्यूनीकरण की एक ऐसी टीम खड़ी हो जायेगी जो कि किसी भी आपदा न्यूनीकरण और बचाव संस्था का इंतजार करे बगैर सक्रिय हो जाएगी। भारत में आपदा से निपटने में गजब की सामथ्र्य का विकास हुआ है। इसका प्रमाण हमने हुदहुद से लेकर नेपाल में हो रहे राहत कार्यें में देखा है। पर इस प्रकार के प्रशिक्षण यदि कागजों से निकल कर प्रत्यक्ष रूप से आते हैं तो निश्चित रूप से हम इस प्रकार की चुनौतियों से आँख मिलाने की सामथ्र्य प्राप्त कर लेंगे। पुरानी आपदाओं से सबक लें और समस्याओं का निवारण बेहतर तरीके से कर सकेंगे। इससे जानमाल का नुकसान भी कम होगा। बेतरक़ीब तरीके से बढ़़ रहे निर्माण कार्यो पर नियंत्रण, प्रड्डति पर मनुष्य का बेपनाह हस्तक्षेप कम करना भी महत्वपूर्ण है। हमें इसका महत्व समझना होगा। उन सभी विधियों को लोगों के मध्य लाना होगा जो कि हर प्रकार की आपदा का न्यूनीकरण और नुकसान को कम करने में हमारी मदद करे क्योंकि आपदाओं के हिसाब से यह क्षेत्र बहुत ही संवेदनशील है और इससे बचने का उपाय ही बेहतर बचाव है। इस तरीके के ज्ञान का महत्व हमें समझना होगा। मूक दर्शकों की भांति नहीं बल्कि एक जीवंत किरदार की भांति इसकी तैयारी करनी पड़ेगी ताकि सही वक्त पर पूरी सफलता के साथ समस्या को उसके समाधान तक पहुँचाया जा सके। क्योंकि आपदा किसी भी प्रकार की हो, इम्तेहान होती है और पास वही होता है जिसकी तैयारी पूरी होती है।