राज्य

एक मौसमी गिरिताल: सूखाताल भाग 2

प्रो॰ जी॰एल॰ साह,
कु॰वि॰वि॰ नैनीताल -
सारणी से स्पष्ट है कि नगरपालिका की सूचनाओं से इतर 1936-37 के सर्वेक्षण विभाग के मानचित्र में चार शाखाओं समेत 1.3 कि0मी0लम्बे दो प्रमुख नालों का प्रवाह एवटफोर्ड (वर्तमान में प्रसाद निवास) के समीप था और इसके चार सदानीरा कुँओं/प्राकृतिक स्रोतों की उपस्थिति इसके उच्च जलभर सीमा का आभाष दिलाते हैं। इनमें तीन स्रोत/कुँऐं इवर्सले कोठी के सम्मुख तथा एक अपर कालाढूंगी सड़क (ए0टी0आई0 रोड) तथा ओक पार्क मार्ग के मिलन बिन्दु पर थे। साक्षात्कार के दौरान स्थानीय निवासियों द्वारा बताया गया कि इनमें से दो अन्तिम कुँओं/स्रोतों को वर्ष 1965-70 के दौरान पाटा भी गया था।
ऐसा प्रतीत होता है कि आर्डवैल आठ कुँओं अथवा पानी के नौलों का अपभ्रंश है और नैनीताल में पेयजल आपूर्ति की योजना (1889) के पूर्व इस समूचे क्षेत्र में मानव बसाव के लिए प्राकृतिक स्रोतों से पेयजल की उपलब्धता, एक बड़ा कारण रहा होगा। क्योंकि सन् 1872 से पूर्व सूखाताल जलागम क्षेत्र में 29 मानवीय आवासों (9 बडे बंगले/कोठियाॅ तथा 20 सेलग्न आवास इकाईयों) का विवरण मिलता है। गाइड मैप फार केन्टोमैण्ट एण्ड सैटिलमेन्ट आफ नयनीताल में आर्डवैल भवन समूह के पश्चिम में मल्ला पोखर की उपस्थिति भी दर्ज है और 1878 के वन मानचित्र से भी इसकी पुष्टि होती है। मल्ला पोखर कुण्ड एक उपेक्षित छोटा जल आप्लावित गर्त था जिसका सीमांकन 1899 में प्रकाशित मानचित्र में इवर्सले एवं आर्डवैल के मध्य दर्शाया गया है।
सूखाताल -नैनी झील का जल बैंकः
सूखाताल का जलग्रहण क्षेत्र का सम्पूर्ण भू प्रष्ठीय जल सीधे सूखाताल में नहीं आता है। 1872 तथा 1878 के मानचित्रों से इस महत्वपूर्ण तथ्य की पुष्टि होती है कि आर्डवैल (वर्तमान ए0टी0आई0) के ऊपरी भाग में मल्ला पोखर (तालाब) पश्चिम दिशा में लगभग 21.6 हैक्टर जल संग्रहण क्षेत्र को समेटे एक छोटा गर्त था और जलभर के भू-पृष्ठीय सीमा तक पहुँचने के कारण जल आप्लावित रहता होगा। ए0टी0आई0 क्षेत्र में हाल के वर्षों (1965-70) तक कुँओं की उपस्थिति तथा वर्षाकाल में इसकी दलदली प्रवृत्ति इसको पुष्ट करती है। भू-गर्भीय रिसाव से इसका जल सूखाताल को अप्रत्यक्ष प्राप्त होता रहा होगा।
विषय विशेषज्ञ सूखाताल तथा नैनीझील के मध्य प्रगाढ एवं जीवन्त भूमिगत सम्बन्धों की बात करते हैं। हो भी क्यों नहीं क्योंकि क्षेत्रीय भूगर्भिक संरचना में आडे-तिरछे भ्रंशों की उपस्थिति, घाटी के शीर्श पर बने इस प्राकृतिक गर्त एवं नैनी झील के ऊपरी सिरे के मध्य लगभग 700 मीटर की कुल क्षेतिजीय दूरी के बीच लगभग 75 मीटर का भू-आड्डतिक झुकाव, पर्दा धारा की उपस्थिति और नैनीझील के वार्षिक जलीय बजट की प्रवृत्ति, ये सभी तथ्य मोटा-मोटी इसके प्रमाण माने जा सकते हैं। शोध के निष्कर्ष (एन.आई.एच. 1999) भी इंगित करते हैं कि नैनी झील को वर्ष भर मिलने वाले जल ;46420 लाख घन/लीटर/ प्रतिवर्षद्ध में अधोभौमिक जल का हिस्सा 42.8 प्रतिशत (19865 लाख घन/लीटर/ प्रतिवर्षद्) है और इस आने वाली अदृश्य जलराशि का अकेले 43 प्रतिशत (85419 लाख घन/लीटर/प्रतिवर्षद्) जमीन का अन्दरूनी रास्ते सूखाताल से प्राप्त होता है। इसीलिए यह मौसमी झील नैनी सरोवर के लिए ममतामयी माँ के समान है जिसके वर्षा से सरोबार आँचल के छिपे खजाने का जल आहिस्ता-आहिस्ता जमीनी रास्तों से नैनी झील को वर्ष पर्यन्त मिलता रहता है। इसीलिए वर्षा काल के काफी बाद भी एक लम्बे अर्से तक नैनी झील का जल अपने पूरे सबाब पर रहता है।