विज्ञान जगत

ओजोन एक प्राकृतिक देन

ओजोन एक प्राकृतिक देन
गिरीश चन्द्र लोहनी (आजाद)
भूतपूर्व नौसैनिक, काठगोदाम
हजारों साल पहले हमारी धरती एक जलता गोला हुआ करती थी, ये हमने बचपन मैं धरती की बनने की कहानी में पढ़ा था। उस वक्त हमें यह खाली कहानी लगती थी। लेकिन आज अपने चारों तरफ के माहौल के बदलाव, मौसम के बदलाव, लोगों के व्यवहार मैं बदलाव, जलवायु परिवर्तन, धरती के तापमान में जरुरत से ज्यादा बढ़ोतरी व गिरावट और बहुत कुछ परिवर्तन देख कर लगता है कि वो सब सच होगा।
आज हम जिस दुनिया में साँस ले रहे हैं वह हमें प्रकृति द्वारा मिली हैं। लेकिन मुझे लगता है कि हम इसे ठीक से नहीं संभाल पा रहे हैं। दिन प्रति-दिन हम, अपनी जरूरतांे, इच्छाओं को बढ़ाते जा रहे हैं। अगर हम अपनी इच्छाओं पर नियत्रण नहीं करेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब हम इस वातावरण में साँस लेने के लिए अपने पीठ पर आॅक्सीजन की बोतल लिए दिखेंगे और अपनी आने वाली पीढ़ी के मुँह से सुनेंगे कि कभी हमारे वातावरण मैं सांस लेने लायक वायु हुआ करती थी।
आखिर कब तक हम अपनी प्यारी धरती को, अपनी अनियंत्रित इच्छाओं को पूरी करने के लिए दोहते रहेंगे, इसका कोई अंत नहीं। अब हमें जागना होगा। लोगों को जगाना होगा।
बैज्ञानिकों ने चेतावनी दे दी है कि वातावरण का बदलाव इतना ज्यादा हो जायेगा कि हमारे प्रिय जन लोगों के लिए जीना मुश्किल मैं पड़ जायेगा। अगर हमें धरती के तापमान की बढ़ोत्तरी को नियत्रण मैं रखना है तो तापमान को 2°C से अधिक नहीं बढ़ने देना होगा, जिसके लिए हमें कार्बन उत्सर्जन को शून्य लेबल पर लाना होगा और जिसके लिए सभी देशों को मिल कर 2050 तक 100 प्रतिशत शुद्ध ईधनों का प्रयोग करना होगा। जिसके लिए हम सभी को हाथ मिलाना होगा और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ना व हमारी धरती को बचाना होगा। यह सब करने के लिए हम सबको हाथ मिला कर आगे बढ़ना होगा।
आज का विषय है ओजोन- जो कि एक प्राकृतिक देन है जो ऊपरी वातावरण में रह कर हमें सूरज से आने वाली पराबैगनी किरणों से बचाता है। वो आज हमारे करीब आता जा रहा हैं। ओजोन का धरती के करीब आना हमारे प्राकृतिक संसाधनों के लिए खतरे की घंटी हैं।
ओजोन कैसे बनता है? और प्रभाव यह निचली सतह का ओजोन भिन्न भिन्न तत्वों के संमिश्रण से बनता है, जैसे यह हमारे वातावरण में आॅटोमोबाइल और उद्योगों द्वारा उत्सर्जित नाइट्रोजन आॅक्साइड और ओर्गिनिक गैसों की अभिक्रिया से उत्पन्न होता है, जो कि हमारे शरीर में त्वचा की बीमारियों, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी व हमारी धरती पर पैदा होने वाले अन्न व हरियाली को नुकसान पहुँचा रहा है। ओजोन अभिक्रिया ज्यादातर वातावरण में ओजोन के असंतुलित अणु सूर्य की किरणों के साथ अभिक्रिया द्वारा होता है। अधिकतर ग्रीनहाउस गैसों की उत्पत्ति हमारे प्रयोग किये गए ऊर्जा व कारों द्वारा छोड़ें धुएं से होती है, जिसके परिणाम स्वरुप वातावरण तो अशुद्ध होता ही है साथ में हमारे द्वारा अर्जित किये गए धन की भी हानि होती है।
ओजोन उत्सर्जन कैसे नियत्रण में रखा जाए, यह काम कोई एक आदमी, एक शहर, एक देश की प्रतिक्रिया से नहीं बल्कि इस धरती पर रहने वाले हर इंसान को प्रतिक्रिया दिखानी होगी, जिसमें मैं और आप भी आते हैं। हमें अपने जरुरतों पर नियंत्रण रखते हुए चलना होगा। घरों में जितनी जरूरत है उतनी उर्जा का इस्तमाल करें। हर आदमी अपनी अपनी गाड़ी का इस्तमाल करने के बजाय मिल बांट कर गाडि़यों का इस्तमाल करें, जिसके परिणाम स्वरुप हमारा वातावरण तो शुद्ध रहेगा ही, साथ में हमारे दैनिक बजट में भी बचत होगी। यह काम हमें आज से ही शुरू करना होगा और लोगों को भी समझाना होगा कि उपरोक्त तरीके से चलने से हम 20 प्रतिशत तक दैनिक खर्चे में बचत कर सकते हैं।
यह विषय काफी विशाल है, मैं निम्न शब्दों के साथ अंत करता हूँ। हम सभी लोग जागें और सभी अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों व बच्चों को ओजोन के प्रभाव के बारे में बतलाएं जितना हो सके समाज को जागृत कराएं, शुद्ध व सुरक्षित पर्यावरण के साथ खुशी खुशी जीवन यापन करके आने वाली पीढ़ी को भी सुरक्षित करें।