विज्ञान जगत

काला नमक

काला नमक

रवीन्द्र कुमार यादव, एरीज -

काला नमक खास तरह का ज्वालामुखी चट्टानी नमक है। यह दक्षिण एशिया में उपयोग किया जानेवाला नमकीन और तीक्ष्ण गंध वाला मसाला है। साबुत यह कत्थई गुलाबी से गहरा बैगनी रंग पारभाशक पत्थर होता है, तथा जब इसे पीसकर चूर्ण बना दिया जाता है तो इसका रंग हल्का गुलाबी प्रतीत होता है।

मसाले के रुप में काला नमक का व्यापक उपयोग भारत एवं पाकिस्तान के दक्षिण एशियाई भोजनों में या चाट, चटनी, सलाद, रायता तथा और भी कई नास्ते में मिलाया जाता है। वे लोग जो काला नमक से परिचित नहीं हैं वो इसके गंध को प्रायः सड़े हुए अंडे के गंध के रुप में व्यक्त करते हैं।
काला नमक प्रधानतः सोडियम क्लोराइड और कुछ अशुद्धियां जैसे सोडियम सल्फेट, आयरन सल्फाइड और हाइड्रोजन सल्फाइड आदि का मिश्रण है। काला नमक को सोडियम क्लोराइड से नमकीन स्वाद, आयरन सल्फाइड से रंग तथा दूसरे सभी सल्फर अवयव से तीक्ष्ण स्वाद तथा विशेष गंध मिलता है। इसके अनोखे गंध में हाइड्रोजन सल्फाइड की प्रमुख भूमिका होती है।

भारत में काला नमक की खुदाई दार्जिलिंग और मध्य भारत में की जाती है। काला नमक के अधिकतर खदान वर्तमान में पाकिस्तान में हैं। इसकी खुदाई हवाई, उताह, बोलभिआ, मर्रे डार्लिंग आस्ट्रेलिया, पेरु सहित दुनिया के और भी कई भागों में होती है।

भारतीय प्राचीन आयुर्विज्ञान आयुर्वेद के अनुसार काला नमक को ठंडा-मसाला के रुप में माना गया है तथा इसका उपयोग रेचक और पाचन औषधि के रुप में किया जाता है। काला नमक, नमक का लाभदायक रुप है क्योंकि इससे साधारण नमक की तरह खून में सोडियम की मात्रा नहीं बढ़ती। इसलिए उच्च रक्तचाप के मरीजों तथा कम नमक खाने वाले व्यक्ति को इसे खाने की सलाह दी जाती है।