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कुमाऊँनी लोेकोक्तियाँ

कुमाऊँनी लोेकोक्तियाँ
हंसा बिष्ट, खुर्पाताल

चोर थै कै चोरि करियै, गुसै थै कै सजाग रयै।
(दोग्ली बातें करना/इधर-उधर की करना।)
हमेशा भाल लोगनैकि संगत करण चैछ, चोर थै चोरि करिया, गुसै थैं सजाग रैया कौणि लोग हमेशा दुसारनाक बीच में फूट पाड़नि।

खाण बखत खाप लाल, दिण बखत आँख लाल।
(दूसरे की वस्तु का उपभोग कर लौटाते समय क्रोधित होना)
जमीन खरीदण बखत रकम उधार माँगी, आपण कारोबार भौल जमै राखौ, आब जब लै मैं आपाणि रकम वापस माँग नु, मैं थै भलिकैं बात लै नि करन, बुजुर्ग ठीकै कौनि खाण बखत खाप लाल, दिण बखत आँख लाल।

जौस ब्वेला उसै लवाला।
(जैसी करनी, वैसी भरनी।)
सबनाक दिन रोज एकनसै नि रौन, बिना अदद मददै कै-कै काम नि चलन, भौल करला-भौल पाला, जौस ब्वेला उसै लवाला।

बिन आपण मरि, सरग नि देखीन।
(स्वयं प्रयास करने पर ही कार्य सम्पन्न होता है।)
वाल-पाल सबन थैं यौ कामाक लिजि कौ, कैलै नि करदि, आब मैं खुद जानु, बिन आपणि मरि सरग नि देखीन।

काणिक ब्याक नौ खिंचाव।
(दुर्बल के कार्य में अनेक बाँधाएं आना।)
पैलिक त् नौकरि कां मिलनै, धो-धना कतुक जाग इत्यान दि बेर इण्टरव्यूक कागज आछ, काणिक ब्याक नौ खिंचाव, आब चुनाव हुणांक बील अधिसूचना जारी है गै।

मन घ्वाड़ में भैटि छार में।
(आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर दूसरों को देने की चाह।)
बीमार भौ कि मदद करणाक लिजि सब चन्द जाम करण लागिरौछि, भूपालौक मन ध्वाड़ में भैटि छार में भै, वील इलाजाक थैं सबन है जादे चन्द दे।

पितरौकि करनि सन्ति पिड़ै।
(बुजुर्गों की गलती का परिणाम सन्तान द्वारा भुगता जाना।)
माधो भौत भौल आदिम छ, गौं वालनाक दगाड़ मिलि-जुलि बेर रौण चाछ, वीक बौज्यूल गौं वालनाक दगाड़ हमेशा अत्याचार करौ, पितरौंकि करनि सन्ति पिड़ै, माधो थैं गौं वाल नि बोलान।

सौणैकि घस्यारि पूषौकि रस्यारि।
(अच्छे अवसर को स्वयं के लिए हथिया लेना।)
प्रेमाकि जिठाणि भौतै चालाक छ, बौल चुटाणि प्रेमा मिल रै, आपु हल्क-फुल्क सजदार काम करैं, सासु कैं नौक लागौं, वील सुणुनाक थैं कौ-सौणोकि घस्यारि, पूषौकि रस्यारि मेरि ठुलि ब्वारि लै बण रै।