विचार विमर्श

कैपीटौल के बहाने भाग 2

कैपीटौल के बहाने
गंगा प्रसाद साह-
इस भयानक अग्निकाण्ड के बाद तत्कालीन नगरपालिका को यह सोचने के लिये विवश किया कि शहर में आग बुझाने के लिये कुछ किया जाए फिर चिन्तन, मनन करने के बाद निर्णय लिया गया कि शहर में फायर बिग्रेड की स्थापना की जाए। इस प्रकार वर्ष 1930 में शहर में पहली बार फायर ब्रिगेड की स्थापना की गई जो नगरपालिका के पास वर्ष 1974 तक रही, फिर यह विभाग पुलिस को सौंपा गया।
कैपीटोल सिनेमा
वर्ष 1931 में इस भवन का पुनः निर्माण करवाया गया। इन 70 वर्षाें में इस भवन ने पाश्यात्य सभ्यता और भारतीय सभ्यता और भारतीय सभ्यता का मिला-जुला समय देखा। दतकांडे, खतडुवा, डिकर पूजन, नन्दादेवी, रामलीला, दीपावली, ईंद, बकरा ईंद, मोहर्रम, क्रिसमस, वैशाखी आदि त्यौहारों को आपस में मनाते देखा। इस भवन के निर्माण हेतु लोकल गवर्नमैन्ट ने 1,29,000 दिनांक जुलाई 4,1930 को स्वीकृत  किये। निर्माण की निविदा में ठेका मैसर्स मार्टिन एण्ड कम्पनी का स्वीकार किया गया। इस कार्य को पूरा करने के लिए एक वर्ष का समय निर्धारित किया गया ताकि 1931 तक कार्य पूर्ण हो जाए। पालिका ने एक लाख रूपया जो शासन से ऋण  के रूप में मांगा था वह स्वीकार कर लिया गया। फिर निर्णय लिया गया कि पालिका अपने कोष से ही निर्माण कार्य करवाएगी जो एक लाख रूपया शासन द्वारा स्वीकार किया गया था उसे हल्द्वानी पावर स्कीम के लिये दे दिया गया।
कार्य जब प्रगति में था तो यह अनुभव किया जाने लगा कि यदि थियेटर बनाया जाएगा तो दर्शकों के लिये स्थान की कमी होगी इसे बढ़ाया जाये। विशेषज्ञों ने यह राय दी कि थियेटर हेतु कुछ आवश्यक बदलाव नितान्त आवश्यक है। फिर इस पर आर्किटेक्ट की राय ली गई और निर्णय लिया गया कि स्टेज को बढ़ाया जाए। प्रोजेक्ट रूप में अदलाव-बदलाव किये जाये इस पर अनुमान लगाया गया। भवन निर्माण होने पर लागत 1,75000 रू. होगी जिसमें फर्नीचर व विद्युत व्यय भी शामिल था।
थियेटर (सिनेमा हाॅल) तैयार होने पर पाँच वर्षाें के लिये ग्लोबल लिमिटेड, कलकत्ता को 6,000 रूपया प्रतिवर्ष के लिये लीज में दी गई। इस अवधि में निर्माण कार्याें के बिलों का पूर्ण भुगतान भी नहीं हुआ था। भवन में होने वाले व्यय जैसे आर्किटेक्ट की फीस, फर्नीचर, सेनेटरी व विद्युत जो 1,88,448 रूपयों के लगभग था। कुछ महीनों के बाद ही ग्लोबल थियेटर, कलकत्ता अपने किये वायदों से मुकर गये इसलिए नये टैण्डर आमंत्रित किये गये। टेण्डर की अन्तिम तिथि अगस्त 20, 1931 को केवल एक टेण्डर नैनीताल थियेटर एण्ड कम्पनी का प्राप्त हुआ। इसके बाद दो टेण्डर 6400 रूपयों का 25 अगस्त 1931 और दूसरा 6,500 रूपयों का 12 सितम्बर 1931 को प्राप्त हुआ। पलिका ने अपनी बैठक में अन्तिम निर्णय लिया कि जो टेण्डर निर्धारित अवधि को नैनीताल थियेटर कम्पनी को प्राप्त हुए उसे स्वीकार किया जाए और उन्हें 3 वर्षाें के लिये लीज में दे दिया जाये। इस पर भी प्रतिबन्ध लगाया गया कि लीज यदि इस अवधि के बाद पुनः 2 वर्षाें के लिये लेना चाहें तो 6200 रूपये वार्षिक किराया होगा तथा पालिका का टैक्स अलग से होगा। यह अनुबन्ध जनवरी 1, 1932 से किया जाएगा। उस समय उत्तर भारत का यह थियेटर (सिनेमा हाॅल) अपने श्रेष्ठ थियेटर की श्रेणी में जाना जाता था।
इस सिनेमा हाॅल का जो भाग खेल के मैदान की ओर है उसके बरामदे में खड़े होकर महात्मा गाँधी , स्व. राजेन्द्र प्रसाद, स्व. राधाकृष्णन  राष्ट्रपति , नेपाल नरेश 5वीं सरकार श्री महेन्द्र, स्व. जवाहर लाल नेहरू, स्व. इन्दिरा गाँधी, भारत कोकिला सरोजनी नायडू, स्व. लाल बहादुर शास्त्री, स्व. गोविन्द बल्लभ पन्त तथा देश के अनेक राज नेताओं ने जन-सम्बोधन किया। इसी भवन के सामने ब्रिटिश शासकों की पताका उतारी गई तथा 15 अगस्त 1947 को भारत की पताका लहराई गई। इस दिन आसमान में बादल छाये थे, वर्षा भी हुई थी।
नैनीताल में सिनेमा हाॅल
कैपीटौल सिनेमा के विषय में जानकारी दी जा चुकी है यहाँ हिन्दी, अंग्रेजी दोनों सिनेमा चला करते थे। इसी के आस-पास की जगह में एक और सिनेमा हाॅल के बारे में वर्णन आता है जिसका नाम टरनर सिनेमा लिखा है, किन्तु यह कहाँ था? किसका था? कौन चलाता था? इसकी जानकारी नहीं है। एक जगह म्युनिसिपल बाई-लाॅ में लिखा है। दूसरा नगरपालिका की बैठक में प्रस्ताव संख्या 5 दिनांक 4 मई 1931 में भी देखा जा सकता है........ The amphitheatre (2) The plot of land to the west of the lake extending from the Boat House to the Assembly Hall as well as triangular piece of land to the south formerly occupied by the Turner Cinema.
....................... यह सिनेमा शहर के लिये एक प्रश्न बन कर रह गया है जिसको सुलझाया नहीं जा रहा है।
नोवल्टी सिनेमा
मालरोड में जहाँ पर वर्तमान में सूचना विभाग का कार्यालय है वह नोवल्टी सिनेमा हाॅल हुआ करता था। यही पर कारपैन्ट्री स्कूल भी हुआ करता था।
रौक्सी सिनेमा
मालरोड में इस समय जहाँ पर क्लासिक होटल है वहाँ रौक्सी सिनेमा था फिर उसका नाम बदल कर लक्ष्मी सिनेमा रखा गया।
अशोक सिनेमा
द्वितीय महायुद्ध  के दौरान एक सिनेमा हाॅल और बनाया गया उसका नाम हैलेट हाॅल रखा गया। उस समय प्रदेश के गवर्नर मि. हौलेट थे उनके नाम से इसका नाम रखा गया। इसी के साथ बिरला स्कूल हैलेट के नाम से भी चलाया गया जो कुछ ही वर्ष उस नाम से चला था। नगरपालिका भवन और थाना मल्लीताल के बीच की जगह में पर्दे डाल कर टेनिस खेली जाती थी फिर कुछ समय बाद इसका नाम बदल कर अशोक सिनेमा रखा गया।
द्वितीय महायुद्ध  के समय अंग्रेजों ने नैनीताल में भी युद्धबन्दी व सैनिक छावनी सी बनाई थी उनके मंनोरजन के लिये अल्प अवधि के लिये एक सिनेमा हाॅल खोला गया। यह हाॅल उस जगह था जहाँ आजकल ए.टी.आई का बैडमिन्टन हाॅल है।
विशाल सिनेमा
तल्लीताल पुलिस लाइन व टी.आर.सी. के पास स्व. देवी लाल साह ऐलफिसटन होटल वालों ने नैनीताल का सबसे बड़ा सिनेमा हाॅल का निर्माण वर्ष 1972 में प्रारम्भ किया जो 1976 में तैयार हुआ। अप्रैल  1977 में सिनेमा हाॅल शुरू हुआ जिसमें 998 व्यक्तियों के बैठने का स्थान था। वर्ष 2008-09 में यह सिनेमा हाॅल तोड़ दिया गया।
नैनीताल पुलिस
वर्ष 1847 आजादी के ठीक 100 वर्ष पूर्व नैनीताल के लिए व्यवस्था 6 पुलिस रख कर की गई। वर्ष 1850 में यह संख्या बढ़ाई गई तथा अच्छे थानेदार को नियुक्त करने पर विचार किया गया। इस पर तत्कालीन कमिश्नर मि. हैनरी रामजे ने सुझाव दिया कि क्योंकि इस थानेदार को अंगे्रजों के सम्पर्क में रहना पड़ता है इसलिए इस प्रकार के किसी अच्छे थानेदार की नियुक्ति 15 रू. प्रतिमाह पर की जाय।
कैपीटौल के बहाने फिलहाल इतना ही....................