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कौसानी- भारत का स्वीट्जरलैण्ड

कौसानी- भारत का स्वीट्जरलैण्ड
उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मेें विश्व प्रख्यात कौसानी एक छोटा- सा शहर है, जो नैनीताल से लगभग 116 km दूर है। कौसानी से हिमालय की विशाल श्रेणियों का बड़ा ही सुन्दर एवं रोमांचकारी दृश्य देखने को मिलता है, जो विश्व के कोने-कोने से आए पर्यटकों को अपनी ओर इस कदर आकर्षित करता है कि वे हर वर्ष यहाँ आ कर, अपने व्यस्त जीवन से कुछ क्षण निकालकर अपने मन को शांति प्रदान करते हैं। प्रातः काल का मनोरम दृश्य यहाँ देखते ही बनता है। जब सूर्य की किरणें पंचाचूली पर्वत के पीछे से आती हुए पूरे वातावरण को हल्के बैंगनी रंग से रंजित कर देती हैं। कुछ ही क्षणों में श्रेणियां नील लोहित आभा से ढक जाती हंै, फिर सोने की तरह दिव्य हो उठती हैं। सूर्य ज्यों-ज्यों ऊपर उठता है हिम श्रेणियां पीछे हटती हुई दूध में धुली सफेद दिखाई देने लगती है।
कौसानी को पुराणों के आधार पर कौशिक मुनि की तपोस्थली माना गया है इसीलिए इसका नाम कौसानी पड़ा है। अँग्रेज शासकों द्वारा कौसानी का विकास (free sample state) के रूप में हुआ और यहाँ पर चाय के बागानों का विस्तार हुआ। आज भी यहाँ कुछ चाय की झाडि़यां विद्यमान हैं।
कौसानी से भारत की कई महा-विभूतीयों का Link है जैसे महात्मा गांधी, सुमित्रानन्दन पंत कौसानी को भारत का स्वीट्जरलैण्ड सर्वप्र्रथम महात्मा गांधी ने ही कहा था। वे सन् 1929 में अपनी पत्नी के साथ यहां आए थे और 12 दिन यहां रूके थें। और उन्होंने यहां भगवतगीता शीर्षक ”अनाशक्तियोग गीता“ की भूमिका लिखी थी।
इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से काफी लाभदायक माना जाता है। हर वर्ष यहां लाखों सैलानी आते हैं, जो सरकार को राजस्व प्राप्ति का प्राकृतिक तोहफा है।