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क्यों बदल नहीं सका तल्लीताल बाजार

क्यों बदल नहीं सका तल्लीताल बाजार
मनीष पन्त, नैनीताल
नैनीताल में दो मुख्य बाजार हंै-तल्लीताल और मल्लीताल। समय के साथ मल्लीताल बाजार आधुनिक चकाचैंध के साथ आगे बढ़ती रही है पंरतु तल्लीताल बाजार में कुछ-एक दुकानों को छोड़ कर विशेष परिवर्तन नहीं आया। अक्सर लोग इसे गाँव-कस्बे की बाजार ही कहते हैं। कोई तो मजाक में इसे तल्लीताल ग्राम सभा क्षेत्र की संज्ञा भी देते हैं।
उदय मिष्ठान भंडार से सवेरे-सवेरे चाय और समोसांे की खुशबू अपनी ओर आकर्षित करती है, तो वहीं थोड़ी अंदर की तरफ जाएं तो सब्जी मंड़ी मे मोल-भाव और बोली हर किसी को कुछ देर रुकने के लिए मजबूर करती है।
छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल जाते समय खेलना, रोना और जिद्द करना बहुत ही लुभाता है। वहीं नैनीताल नगरपालिका में कार्यरत स्वच्छक कर्मचारी जिस मेहनत से पूरी तल्लीताल बाजार में निष्ठा व अपनेपन से यहाँ की सफाई करते हैं, वह भी देखने योग्य होता है। जब तक पूरी बाजार स्वच्छ न हो जाए तब तक सफाई का कार्य चलता रहता है। चाहे गर्मी हो या बरसात, जाड़ा हो या बर्फ पड़े। परंतु एक प्रश्न तल्लीताल की बाजार में आने-जाने वाले हर व्यक्ति के मन में जरूर आता होगा कि हर-रोज जब इतनी सफाई होती है तो रात 8 बजे बाद फिर इतना कूड़ा कहाँ से आ जाता है। यह एक बहुत विचारणीय प्रश्न है और इसका जवाब तो तल्लीताल बाजारवासी ही दे सकते हैं। तल्लीताल क्षेत्र में कई सारे मकान हैं जिसमंे रहने वाले बहुत पढे़-लिखे और बड़े लोग हंै परंतु न जाने क्यों उनकी यह पढ़ाई और बड़प्पन रात के समय जहालत मंे बदल जाती है। जिसे देखो अपने घर का कूड़ा रात के अंधेरे मंे अपने घर के दरवाजे से थोड़ा आगे फेंक देते हंै। उस कूड़े में दिनभर का बरबाद खाना, कागज और कई अन्य अजैविक पदार्थ होते हैं जो कहीं न कहीं पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं। अधिकांश दुकानदार भी अपनी दकान बंद करने से पूर्व अन्दर का सारा जैविक-अजैविक कूड़ा डस्टविन या कूड़दान में डालने के बजाय उसे सड़क में या नाली की ओर फैला देते हैं जबकि नगरपालिका ने पिछले दिनों कूड़ा रखने के लिए डस्टविन भी सभी दुकानदारों को वितरित किये थे। जगह-जगह बड़े कूड़ादान भी लगे हैं। कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि तल्लीताल के संभ्रान्त लोग इतने बेफिक्र हो गए हैं या स्वच्छक कर्मचारियों पर इतना निर्भर हो गयेे हैं कि वे अपनी विकृत मानसिकता का परिचय कूड़ा फैला कर देते रहते हैं।
कहते हैं किसी भी क्षेत्र की गरिमा, प्रतिष्ठता और पहचान वहाँ रहने वालों पर निर्भर करती है। अगर क्षेत्रवासी खुद ही अपने क्षेत्र को इस तरह गंदा रखंेगे तो यहाँ आने वाले पर्यटक फिर किस तरह यहाँ स्वच्छ रखने की सोचेंगे। जहाँ, यहाँ के निवासी कूड़ा फैलाते हैं, वह भी वहीं कूड़ा डाल देते हंै।
यह कोई नई समस्या नहीं है। इसको लेकर कई बार पहल हुई है। प्रशासन भी इसके लिए सोचता है। लकिन लोगों को जब तक दण्डित नहीं किया जाता वे अपनी आदतों को सुधारने से बाज नहीं आते। इसलिए जब तक कोई कड़ा कदम नहीं उठाया जाएगा तब तक यह समस्या समाप्त नहीं हाने वाली।