दिशा तथा दशा

गलत कह रहा हूं तो कह दो...।

गलत कह रहा हूं तो कह दो...।
राजशेखर पंत, नैनीताल -

मैं नैनीताल से बाहर था, उन दिनों शायद दो तीन महिने पहले की ही बात होगी। दोपहर के वक़्त एक काल मेरे मोबाइल पर आयी। नैनीताल के एक पुलिस स्टेशन से काल था। बहुत ही शालीन तरीके और शांत स्वर में मुझे बताया जा रहा था कि मुझे अपने राशन कार्ड की छाया प्रति स्टेशन में जमा करनी है। मैंने राशन कार्ड बनवाया तो है पर कभी भी उसका उपयोग कुछ खरीदने के लिए नहीं किया- चीनी तक नहीं। एड्रेस प्रूफ की जरुरत पड़ने पर उसका सर्व स्वीकार्य डाक्यूमेंट होना भर ही मेरे लिए उसकी उपयोगिता थी। मैं कुछ भयभीत भी हो गया, इस आशंका से कि कहीं वह जिसे मैने अपना कार्ड महिने का राशन खरीदने के लिए दिया हुआ है इसका कुछ दुरूपयोग तो नहीं कर बैठा ? मास्टरी जैसे हाशिये पर ठहरे रोजगार से जुड़ने के बाद मन यूंही डरा डरा सा रहता है। खैर! उस पुलिस वाले ने निहायत ही प्यार से मुझे परेशान न होने की सलाह देते हुए समझाया कि महानगर में रहने वाली मेरी बेटी ने हाल ही में अपना फ्लैट बदला है और उसके परमानैन्ट एड्रैस के वैरिफिकेशन के लिए इन्क्वायरी आयी है। मैने सामान्य हो कर, अपनी आवाज को सहज बनाते हुए उसे यथास्थिति समझाई और बताया कि मैं तो महिने के आखिरी सप्ताह तक ही नैनीताल वापस लौट पाउंगा। यह जान कर कि मैं नैनीताल के ही एक स्कूल में कार्यरत हूं उसके स्वर में सहानुभूति और अपनेपन का घालमेल कुछ बढ़ गया। ‘‘तो फिर कैसे होगा!!!!’’ -उसने मेरी मजबूरी को समझने वाले अंदाज में मुझसे कहा। मैने उसे बताया कि मेरी सभी आइडीस के स्कैन्ड वर्जन्स मेरे लैपटाप में हैं अगर वह मुझे अपने आफिस की मेल आइ डी बता दे तो मैं अभी सारे डाक्युमेंट्स भिजवा दुंगा। ‘हाँ!!! यई जो ठीक रहेगा फिर’ कहते हुए उसने शायद अपने किसी सहकर्मी से पूछताछ शुरु की। मैं फोन को कान से लगाये उसके वापस लौटने का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद दूसरी ओर से आवाज आयी- ‘‘ये तो बड़ी मुश्किल हो गयी। यहाँ आइडी तो बस डी आइ जी साब की ही हुई। उनसे कैसे होगा। आप कुछ और जुगाड़ नहीं कर सकते?’’ मैं समझ गया डी॰आई॰जी॰ तक पहुंचना उसके लिए एक आफीशियल संकट रहा होगा और पुलिस स्टेशन में कम्प्यूटर वगैरा का रोल एक सजावटी सामान से ज्यादा नहीं होगा- यहाँ के पुलिसिया दर्शन की टैग लाइन ‘‘मित्र पुलिस’’ की तरह। खैर अपने कालेज में फोन कर जहाँ हाल ही में किसी विभागीय जरुरत के चलते मैने पैन कार्ड वगैरा के साथ राशन कार्ड की कापी भी जमा की थी, काम निपट गया। पर एक प्रश्न कुरेदने लगा मुझे - एक पर्यटक स्थल है नैनीताल, यहाँ के प्रमुख पुलिस स्टेशन की कोई मेल आइ डी तक नहीं है? और अगर है भी तो यहाँ के कर्मचारियों को पता तक नहीं है इसका... उपयोगिता वगैरा की बात तो छोडि़ये। और हमारे कथित नेता बात करते हैं आॅन-लाइन होने की, गांवों को इन्टरनैट से जोड़ने की।
अरे यह कहने में शर्म कैसी कि यह देव भूमि है। गंगनाथ गोलू जैसे पंचनाम देवों से लेकर आँचरी-कांचरी नागुली - भागुली और कलबिष्ठि तक सब यहाँ के लोगों की रक्षा और विकास में सदियों से मुस्तैद हैं। भाड़ में गईं आनलाइन फैसीलिटीज और इंटरनैट- गलत कह रहा हूं तो कह दो।