संस्कृति

गौ माता पवित्र वस्तुओं में गौ का स्थान भाग 2

गौ माता
पवित्र वस्तुओं में गौ का स्थान
के॰सी॰ सुयाल, नैनीताल -
गोमय ;गोबरद्ध भी कीटाणुनाशक, पोषक, कान्तिप्रद, दुर्गन्धिनाशक शोषक, वीर्यवर्धक, रसयुक्त व परम पवित्र है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि गोमय में प्लेग, हैजे आदि असाध्य रोगों का नाश करने की शक्ति है तथा त्ंकपव ।बजपअपजल तक को समाप्त कर सकता है। भूमि की उर्वराशक्ति सम्बन्धी गुण बताने के लिये तो एक अलग लेख की आवश्यकता पड़ेगी।
गो माता के शरीर में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास माना गया है। एक सुकवि की कविता देखें-
हरिहर, विधि शशि सूर्य चन्द्र, इन्द्र वसु साध्य प्रजापति वेद महान।
गिरा, गिरिसुता, गंगा लक्ष्मी, ज्येष्ठा कार्तिकेय भगवान।।
ऋषि , मुनि, ग्रह, नक्षत्र, तीर्थ, यम, विश्वेदेव, पितर गन्धर्व।
गो माता के अंग अंग में रहे विराज देवता सर्व।।
और गोमाता की सेवा से समस्त देवों की सेवा व खुशी प्राप्त हो जाती है। पृथ्वी को धारण करने वाली सात शक्तियों में गाय का प्रथम स्थान है-
गौभिः विप्रैश्च वेदैश्च सतीभिः सत्यवादिभिः।
अलुब्धैः दानशीलैश्च सप्तभिः धार्यते मही।।
वे सात शक्तियाँ हैं-गाय, विप्र, वेद, सती स्त्रियाँ, सत्यवादी व्यक्ति, निर्लोभी व्यक्ति व दानशील लोग।