दिशा तथा दशा

जनता कहिंन...केवल रिकॉर्ड दर्ज करवाना मक़सद..

-संजय नागपाल नैनीताल...कुछ अलग करने की चाहत में, केंद्र में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल, भारतीय लोकतंत्र के रिकॉर्ड दर्ज करवाने की नई परम्पराओं को शुरू कर चुका है..कभी करोड़ों जन-धन खातों को खोलकर नया अध्याय लिखने का प्रयास किया जाता है तो कभी राष्ट्रीय ध्वज की ज्यादा लंबाई,कभी योग उत्सवों में रिकॉर्ड भीड़ जुटा कर तो कभी देश में सबसे ऊंची मूर्तियों की स्थापना के प्रचार से सभी वाकिफ़ होंगे..क्या..? केवल अपने नाम को पूरे देश व विश्व में प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है..हालाँकि पूर्व समय से ही सरकार अपनी योजनाओं को प्रचारित करने के लिए "प्रचार माध्यमों" का सहारा लेती रहती थी..पर विगत वर्षों में सरकारी धन अपव्यय का बड़ा माध्यम प्रचार ही हो गया है..गरीब की रोटी की चिंता किसी को नही है..
कौन समझाए सत्ता पक्ष को..12 हज़ार लीटर सरसों के तेल के दिये अयोध्या में जलाए जा रहे हैं..और इसी प्रदेश में कहीं लोग गरीबी व महंगाई से मरे जा रहे हैं..उसकी सरकारों को कोई चिंता नही..मक़सद केवल रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाना है..भले ही गरीबों की जान चली जाए..पर उन्हें रियायतों का लाभ न मिल पाएँ..
कुलमिलाकर यदि हज़ारों लीटर तेल जलाकर ,लाखों क्या..करोड़ों दिए जला भी दिए जाएं तो क्या इससे देश विकसित हो जाएगा.. या इससे हमारी मज़बूत अर्थव्यवस्था का संदेश वैश्विक पटल पर पड़ेगा.. यदि इससे इतर हज़ारों करोड़ के धन को गरीबों के आवास व्यवस्था,उनके रहन-सहन के स्तर में सुधार पर खर्च किया जाए तो एक दिन हम गरीबी मिटाने में कामयाब अवश्य हो जाएंगे..जागो देशवासियों जागो.. अब भी वक़्त है हिन्दू वोट बैंक में सेंधमारी की नीयत के चलते इन उत्सवों में प्रचार-प्रसार के लिए अंधाधुंध धन का अपव्यय ठीक नही है..न हिन्दू उत्सवों में अपव्यय हो और न ही मुस्लिमों को हज़ के लिए सब्सिटी दी जाए..केवल भारतवासी के जीवन स्तर को सुधारने का काम सरकारों को करना चाहिए.. इस धन को जनहित में लगाया जाना वास्तव में राष्ट्र हित कहलायेगा..