विचार विमर्श

जनता कहिंन...3 साल में पिछली कांग्रेस सरकार के घोटाले नही खुले...

-संजय नागपाल नैनीताल...

प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि..भ्रष्टाचार को खत्म करेंगे और करके रहेंगे..जबकि गुजरात के राज्यसभा सांसदों को चुनने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही यह पूरा देश जानता है..और उस पर भी बीजेपी के सभी नेता काँग्रेसी विधायकों को उनकी टूट के लिए जिम्मेदार मानते हैं..वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में काँग्रेस को घोटालेबाज़ों का सरगना बताने वाली बीजेपी ने विगत सवा तीन सालों में से किसी को भी सलाखों के पीछे नही भेजा.. सी.बी.आई को सत्तारूढ़ दल का तोता कहने वाली पार्टी का हश्र भी पुरानी सत्तारूढ़ दलों की तरह उस तोते को बखूबी इस्तेमाल करने की ही रही है..रही बात राज्यपाल सरीखे पदों की तो यहाँ भी इस संवैधानिक पद पर अपने दल के रिटायर्ड नेताओं को खपाने की पुरानी मुहिम जारी रही..यहाँ बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस व्यवस्था की हम बुराई करते हैं..वक़्त आने पर हम उसी व्यवस्था का वरण क्यों करने लगते है..क्या.. काँग्रेस की कार्यशैली को बदलना नामुमकिन है..? या यही व्यवस्था आज भी सर्वश्रेष्ठ है..अगर सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था है तो फिर इस पर विरोध कैसा..?
कुलमिलाकर आज मोदी युग जरूर आया है पर इस पर पुराने काँग्रेसराज का साया पूरी तरह से क़ायम है..न घपले- घोटालों के राज खुलते है..दोनों बड़े राजनीतिक दलों का आपसी तालमेल ऐसा लगता है जो घोटालों से पर्दा उठाया ही नही जाता..बस कार्यकाल के अंतिम वर्ष फिर से सत्ता पर काबिज़ होने के लिए कार्ययोजना बनाई जाने लगती है..फिर रॉबर्ट वाड्रा के घपले-घोटालों पर संबंधित न्यायालयों के नोटिस में लाया जाता है तथा एक बार फिर से मामलों को तूल देकर आमजन के मन मे उन्हें भ्रष्टाचारी घोषित कर वोट बैंक में सेंधमारी करना मात्र होता है..क्या..? ऐसे ही भ्रष्टाचार मुक्त भारत बन पाएगा..या मेरा देश बदल पायेगा..ये बड़ा सवाल आमजन के मन मे है...