विज्ञान जगत

जीरा

जीरा
वर्ण भेद से जीरा, श्वेत और श्याम दो प्रकार का होता है। श्वेत जीरा को cumin seed और श्याम जीरा को black caraway  कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Cuminum cyminum है। यह Apiaceae के अन्तर्गत आता है। सफेद जीरे का प्रयोग मसालों के रूप में किया जाता है। स्याह जीरा महंगा होने की वजह से इसमें अन्य प्रजातियां और मिला दी जाती हैं।
जीरे में अजवायन की तरह एक उड़नशील तेल, खनिज द्रव्य तथा विटामिन पाये जाते हैं।
कुछ औषधीय प्रयोग
1. काले जीरे के काढे़ से कुल्ला करने से दांतों का दर्द मिटता है।
2. काले जीरे को जलाकर उसका धुंआ सूंघने से जुकाम मिटता है।
3. प्रसूतिकाल में दूध बढ़ाने के लिए जीरे को घी में भूनकर भुने हुए आटे
में मिलाकर लड्डू बनाकर खिलाने से माताओं के दूध में वृद्धि  होती है।
4. दस्त में 5 ग्राम जीरे को भूनकर तथा पीसकर दही या दही की लस्सी मंे मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
5. बच्चों के दस्तों में जीरे को भूनकर पीसकर 1 चम्मच जल में 500 मिलीग्राम घोलकर दिन में दो तीन बार पिलाने से लाभ होता है।
6. 15 ग्राम जीरे को 400 ग्राम पानी में उबालकर चतुर्थांश शेष काढ़ा पिलाने से आँतों के क्रिमी  मर जाते हैं।
7. 5 ग्राम सफेद जीरे को पानी में उबालकर चतुर्थांश शेष रहने पर उसमें मिश्री मिलाकर दोनों समय पीने से बवासीर की वेदना और सूजन कम हो जाती है।
8. 3 ग्राम जीरे को 3 ग्राम नींबू के रस में भिगोकर 3 ग्राम नमक मिलाकर खटाई जैसी बनाकर लेने से जी मिचलाना बन्द हो जाता है।
9. स्याह जीरे को उबालकर उसमें मिश्री मिलाकर पीने से मूत्रवृद्धि  होती है।
10. सौंठ और जीरे को पानी के साथ पीसकर लगाने से मकड़ी का विष उतरता है।
11. गर्भाशय की सूजन में काले जीरे के काढ़े में बैठने से लाभ होता है।