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नई पर्यटन नीति होगी जल्द लागू- प्रदेश को विन्टर डैस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जायेगा- सतपाल महाराज

नैनीताल 18 अगस्त 2017 -
उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड की नई पर्यटन नीति विकसित करने की दिशा में प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों से रायशूमारी करने के बाद प्रदेश की नई पर्यटन नीति लागू की जायेगी। यह विचार प्रदेश के पर्यटन एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद की ओर से शैले हाॅल में आयोजित मंथन कार्यशाला में व्यक्त किये। इस कार्यशाला में कुमाऊ मण्डल के पर्यटन व्यवसायियों तथा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा पर्यटन की विभिन्न गतिविधियों, पर्यटन नीति, साहसिक पर्यटन, से संबंधित विषयों पर ट्रैवल ट्रेड से जुड़े उद्यमियों, स्टेक होल्डर्स ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किये।
कार्यशाला में उपस्थित मौजूद प्रतिभागियों एवं पर्यटक व्यवसायियों को सम्बोधित करते हुये पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज ने कहा कि पर्यटन हमारे प्रदेश के आर्थिक विकास की रीढ़ है वहीं स्वरोजगार का भी एक महत्वपूर्ण कारक है। स्वस्थ्य एवं आकर्षक पर्यटन सदा से ही पर्यटकों को आकर्षित करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि आज की भौतिकवादी एवं तनावपूर्ण जिन्दगी से उबने के बाद पर्यटक दूर-दराज के पर्वतीय इलाकों में मानसिक शांति हासिल करने के लिये रूख करते हैं। ऐसे में बदलते दौेर में नई पर्यटन नीति तैयार करना लाजमी है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हम इस पर्यटन नीति के निर्माण को लागू करने से पहले इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के अनुभवों एवं विचारों को भी नई पर्यटन नीति में शामिल करें ।
श्री महाराज ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश का पर्यटन सिर्फ चार धाम यात्रा तक की निर्भर ना रहे, प्रदेश को विन्टर डैस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिये प्रदेशभर में नये पर्यटन सर्किट भी बनाये जा रहे हैं। सूबे की नई पर्यटन नीति का जो मसौदा तैयार किया जा रहा है उसमें कुमाऊ मण्डल में 08 धाम स्थापित किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि मौजूदा यात्रा सीजन के दौरान अबतक लगभग 20 लाख पर्यटकों ने चार धामों की यात्रा पूरी कर ली है जो कि एक कीर्तिमान है। हम चाहते हैं कि चार धार की सीजनल यात्रा के बाद भी पूरे वर्ष पर्यटक प्रदेश के विभिन्न पर्यटक स्थलों पर आयें। इसकी दिशा में भी कार्य योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा समाप्त होने के बाद सूबे का पर्यटन शीतकाल में निद्रा अवस्था में आ जाता है। शीतकाल में हमारे प्रदेश में पर्यटकों की आवाजाही काफी कम हो जाती है। प्रदेश में पर्यटन व्यवसाय पूरे समय फलीभूत रहे ऐसे में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये नये पर्यटन सर्किट बनाये जाने जरूरी हैं।
श्री महाराज ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन, योगा र्पयटन तथा हर्बल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये नई कार्ययोजना एवं रणनीति प्रदेश सरकार द्वारा तैयार की जा रही है। हमारा प्रदेश धार्मिक स्थलों, साहसिक गतिविधियों, योगा तथा हर्बल (जड़ी-बूटी) के क्षेत्र में काफी समृद्ध है। इन सब चीजों को संज्ञान में रखकर एक सशक्त पर्यटन नीति जल्द ही अस्तित्व में लायी जा रही है। उन्होंने कहा कि मुखवा में धर्म गुरूओं एव पुरोहितों के लगभग 80 वर्ष पुराने दस्तकारीयुक्त भवन हैं जिनके सुधार एवं संरक्षण हेतु पर्यटन विभाग ने इन भवनों को अंगीकृत करने की दिशा में कदम उठाया है।
पर्यटन सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम ने पर्यटन नीति 2017 के उद्देश्यों एवं उसकी अवधारणा के साथ ही पर्यटन विभाग द्वारा पर्यटन व्यवसायियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यशाला में होटल एसोसियेशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने पर्यटन को बढ़ावा देने के अन्य सुझावों के साथ ही यह भी अवगत कराया कि नैनीताल में वृहद पार्किंग की व्यवस्था की जाय। इसके अलावा होटलों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने की बाद्धता से मुक्ति दिलाने का सुझाव रखा।
कार्यशाला में प्रबंध निदेशक कुमाऊ मण्डल विकास निगम धीराज गव्र्याल, मुख्य विकास अधिकारी प्रकाश चन्द्र, संयुक्त निदेशक पूनम चंद के अलावा मनोज जोशी, दयाकिशन पोखरिया, अमर सिंह खाती, बृज साह, गोबिन्द सिंह, पंकज साह, मोहन लाल साह, राजेन्द्र सिंह, मोहन रयाल, सुरजीत मेहरा, जितेन्द्र कुमार, शैलेन्द्र, महावीर सिंह, पीयूष जोशी, देवेन्द्र, ललित, कमलेश,एसएस शाही, एससी गुरूरानी, प्रदीप, मांझी, धमेन्द्र बिनवाल, नीरज बिष्ट, गोबिन्द सिंह बिष्ट, मोहम्मद दानिश, सुरेन्द्र पाल, दीपक, आरएस मेहरा, अनुराग भारती, मोहम्मद यूसूफ, ललित जोशी, विनोद बुधानी, संजय सांगड़ी, मोहित साह,केके साह आदि मौजूद थे। कार्यशाला का संचालन उप निदेशक पर्यटन जेसी बेरी द्वारा किया गया।