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नैनीताल की ऐतिहासिक धरोहरों के क्रम में....1

डीएसए मैदान: यहाँ पिक लेबल बजरी में होती हैं राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं
1889 से हो रहे हैं क्रिकेट, हाकी व फुटबाल टूर्नामेंट
रवीन्द्र पाण्डे ‘रवि’, नैनीताल -
वैश्विक परिदृश्य में अद्वितीय नैसर्गिक सौन्दर्य के साथ विश्व की प्रमुख पयर्टन नगरी में शामिल हमारी सरोवर नगरी नैनीताल, यहाँ मौजूद विभिन्न ऐतिहासिक ईमारतों, पौराणिक मंदिर, चर्च एवं खूबसूरत पर्यटक स्थलों के लिए जानी जाती है। इसी क्रम में इस अंक में हम आपको नगर के डी.एस.ए. मैदान के बारे में अवगत करा रहे हैं।
देश विदेश में पर्यटक नगरी के रूप में विख्यात नैनीताल नगर को नैनीझील तथा विभिन्न पर्यटक स्थलों के साथ-साथ यहां स्थित खेल मैदान के लिए भी विशेष तौर पर जाना जाता है। जहां पिक लेबल की बजरी में ब्रिटिश काल से राष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट, हाकी, फुटबाल तथा अन्य प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं। यही नहीं इस मैदान का उपयोग विभिन्न सामाजिक, राजकीय कार्यक्रमों के अलावा पर्यटक सीजन में बढ़ते वाहनों के दबाव को कम करने के लिए भी किया जाता है।
जानकारी के मुताबिक विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ब्रिटिशर्स की पहल पर 1843 में नैनीताल जिमखाना की स्थापना हुई। स्थानीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं के बाद 1889 में अखिल भारतीय रामपुर फुटबाल चैलेंज कप प्रतियोगिता की शुरूआत हुई। इसके बाद 1902 में मोदी हाकी, 1922 में आल इंडिया ट्रेड्स कप तथा लैंडो लीग फुटबाल प्रतियोगिता की शुरूआत हुई। 1935 में हाकी एवं क्रिकेट के लिए निर्धारित नियमों पर कंट्रोल के लिए यूपी स्टेट कंट्रोल बोर्ड बना। नैनीताल जिले में भी इसी से सम्बद्ध संस्था डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन का गठन हुआ। दोनों को आज एनटीजी एंड डीएसए के नाम से जाना जाता है। तभी से संस्था खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा दे रही है।
वर्तमान में यहां उत्तराखंड सब जूनियर हाकी, जिमखाना कप इंटर स्कूल हाकी, एसबीआई मिनी चिल्ड्रन फुटबाल, इंटर स्कूल फुटबाल, आल इंडिया विशंभर लाल साह मैमोरियल सेवन ए साइड क्रिकेट, पीआरएस बिष्ट मैमोरियल क्रिकेट, इंटर आफिस क्रिकेट, इंटर स्कूल बास्केटबाल मैन व वोमेन, ओपन स्कूल बास्केटबाल, जिमखाना क्लब वालीबाल आदि का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य खेल संगठनों की ओर से बाॅक्ंसिग, बास्केटबाल, वालीबाल आदि प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। सामाजिक तथा राजकीय कार्यक्रमों के लिए भी यह मुख्य स्थल है।
बता दें कि इस खेल मैदान की विशेषता है पिक लेबल की बजरी। यहां 5 तथा 6 एमएम की बजरी में सारी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। पूर्व डीएसए महासचिव गंगा प्रसाद साह ने बताया कि प्रतिवर्ष 6 से 8 ट्रक बजरी मैदान में डाली जाती है। इससे पूर्व मैदान की बजरी को एकत्र किया जाता है, जिसमें से बेमेल बजरी व रोड़ी को अलग किया जाता है। बाद में नई व पुरानी बजरी को मिक्स कर मैदान में बिछाया जाता है।

विश्व की प्राचीन संस्थाओं में से एक
डीएसए महासचिव अजय साह ने कहा कि नगर की खेल संस्था विश्व की प्राचीन खेल संस्थाओं में से एक है। यहां की खेल प्रतियोगिताओं की शुरूआत अंग्रेजों ने की 1945 के बाद इनमें भारतीयों का हस्तक्षेप हुआ। आजादी के बाद से पूर्ण रूप से प्रतियोगिताओं के संचालन में पूर्ण रूप से हिंदुस्तानियों का आधिपत्य हुआ।