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नैनीताल की ऐतिहासिक धरोहरों के क्रम में..4

नैनीताल के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक भवन और सर हेनरी रैमज़े
प्रो॰ अजय सिंह रावत, नैनीताल -

रैमज़े के न्याय से जुड़े प्रशासन और अपने विशिष्ट तरीके से समस्याओं से निपटने को लेकर उनके कई उपाख्यान रहे हैं। रैमज़े के कार्यकाल के प्रारंभिक चरण में, तराई का इलाका डकैतों से पीडि़त था तथा सीमित पुलिस बल और घने जंगल के कारण, वह उन लोगों के साथ निपटने में असहाय थे। रैमज़े को पता चला कि वहाँ एक पुरुष धावक था जो सभी डकैतों के साथ परिचित था। उन्होंने तुरंत उससे संपर्क किया और उसे तराई के पुलिस उप-निरीक्षक के पद पर नियुक्त कर दिया। तदुपरान्त सभी डकैतों को गिरफ्तार किया गया।

तब सालम पट्टी में पाँच बहुत अमीर और दुष्ट भाई थे। ऐसा माना जाता था कि वे एक हत्या के दोषी थे लेकिन ग्रामीणों का इन भाइयों के आगे भय के कारण पुलिस कोई भी सुराग खोजने में असमर्थ थी। जब रैमज़े को मामलों के बारे में सूचना मिली तो वह भेष बदलकर उस गाँव में चले गए जहाँ उन्होंने एक वृद्ध विधवा के घर में रात बिताई। वृद्ध महिला के साथ मित्रतापूर्वक बात करते उन्होंने हत्या की बात ऊठाई। रैमज़े को एक गरीब ग्रामीण समझ वृद्ध महिला ने उन्हें सब कुछ बता दिया। जिसके बाद जल्द ही अपराधियों को गिरफ्तार किया और सजा दी गई।
एक अन्य महत्वपूर्ण भवन क्राॅस्थवेट अस्पताल (जो अब अल्मोड़ा के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी बीडी पाण्डे अस्पताल के नाम से जाना जाता) है। यह लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में नैनीताल की अपनी पहली यात्रा पर सर एंटनी मैकडाॅवेल द्वारा सन् 1896 में स्थापित किया गया। इसका नाम उनसे पूर्व रहे लेफ्टिनेंट गवर्नर, सर चार्ल्स क्राॅस्थवेट के नाम पर रखा गया। बड़े पैमाने में इसके निर्माण में लागत निजी योगदान और रैमज़े अस्पताल से मिले दान के जरिये हुआ। क्राॅस्थवेट अस्पताल भारतीय जबकि रैमज़े अस्पताल यूरोपीय मरीजों के लिए स्थापित किया गया था। शुरुआत में यह यूरोपीय और भारतीय दोनों रोगियों के लिए खोला गया, लेकिन इस व्यवस्था को यूरोपीय और भारतीय दोनों मरीजों के लिए अव्यावहारिक पाया गया।
उस अवधि की एक महत्वपूर्ण विरासत भवन तल्लीताल डाकघर है, जिसका निर्माण डाक विभाग के रिकाॅर्ड के अनुसार सन् 1896 में किया गया था। मल्लीताल डाकघर हालाँकि सन् 1903 में अस्तित्व में आया। इस डाकघर के ठीक ऊपर एक पुरानी इमारत जिसे सन् 1925 में पूरा किया गया तथा निर्माण सन् 1920 में शुरू किया गया। पहले यहाँ वाईडब्ल्यूसीए (क्रिश्चियन एसोसिएशन) का आॅफिस था जो अब होटल फेयर हैवेन्स के नाम से जाना जाता है।
लेकिन इस अवधि की सबसे खूबसूरत इमारत गवर्नर्स हाउस (राजभवन) है। इसकी नींव 27 अप्रैल 1897 पर रखी गई जो बनकर मार्च 1900 में पूरा हुआ। राजभवन एक पठार पर विद्यमान है जिसके पीछे खड़ी जमीन इसे एक सीधी चट्टान के उभार से बचाती है, और जहाँ देवदार के पेड़ों का एक झालरदार लाॅन है।
इसके आस-पास का संयुक्त प्रभाव, ताजा हरे लाॅन, ग्रे पत्थर की सीढि़याँ और एक सुनिर्मित जंगल इसे सम्मानजनक, शांतिपूर्ण और जोरदार तरीके से एक अंग्रेजी गाँव की याद दिलाता है। निचले लाॅन के स्तर से एक अच्छा वर्गीत रास्ता है जो मैदान के दूरस्थ हिस्से तक जाता है और जहाँ उत्तरी भारत में सबसे अच्छा 18 छेद वाला पुराना गोल्फ कोर्स है। गोल्फ कोर्स से पानी बाहर करने के लिए एक 137.1 मीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण कोर्स के सबसे नीचे स्थल में किया गया जो, इंजीनियरिंग कौशल का एक अद्भुत नमूना है।
क्रमशः