अपना शहर

नैनीताल के निर्माता ला. मोतीराम शाह भाग 10

नित्यानन्द मिश्र, अल्मोड़ा -
यूरोपियन सत्ता के प्रसार के बाद नैनीताल में शिक्षा हेतु यूरोपियन स्कूलों का निर्माण हुआ। यथा सैन्ट जोजेफ, सैन्ट मेरी काॅन्वेन्ट, शेरवुड काॅलेज, वैलेशली, फिलैण्डर स्मिथ, आॅल सेन्ट और हैलेट बार। इन स्कूलों में जूनियर कैम्ब्रिज, सीनियर कैम्ब्रिज की परिक्षाओं का संचालन इंग्लैण्ड से होता था। इन स्कूलों में ब्रिटिश वस्र्टेड ब्लेजर, ओवर कोट तथा अन्य वस्त्रों को उपलब्ध कराने में तल्लीताल, नैनीताल की सबसे प्राचीन कपड़े की दुकान श्री श्यामलाल साह की थी। यह दुकान श्री श्याम लाल साह एण्ड सन्स ड्रेसर्स के नाम से प्रसिद्ध थी। श्री श्यामलाल साह ब्रिटिश उच्च कोटि के वस्त्र के आयातक थे। वह ब्रिटिश इण्डियन ओवरसीज बैंक के खाता धारक थे। बाबा हैड़ाखान ने उनके आवास को पवित्र किया था। वह उनके साथ कैलाश की यात्रा में गये थे। उनके पुत्र श्री देवी लाल साह ने अपने पूज्यपिता के व्यवसाय को निपुणता से आगे बढ़ाया। उनके पुत्र श्री हीरालाल साह खेल प्रेमी थे। वह नगरपालिका के सभासद भी थे। आॅल इण्डिया टेªडर्स कप में हाॅकी के निर्णायक का कार्य किया करते थे। उनके दैनिक व्यवसाय को श्री श्यामलाल साह केे पौत्र लक्ष्मीलाल साह ने निपुणता तथा मृदु व्यवहार से जारी रखा।
श्री श्याम लाल साह के मृदुव्यवहार व कार्य कुशलता से सभी वर्ग के लोग प्रभावित रहते थे। ब्रिटिश कालीन फोटोग्र्राफरों में श्री गांगी साह तथा श्री नन्दलाल साह का उल्लेखनीय स्थान था। वह ग्रुप फोटोग्राफी तथा ब्राउन फोटोग्राफी की कला में कपड़ा तथा प्लेट लगाकर फोटोग्राफी में सिद्धहस्त थे। आयुर्वेदाचार्यों में श्री हरिहर पन्त का उल्लेखनीय स्थान था। उनका निदान अचूक था। सम्यान्तर में बक्शी फोटोग्राफर ने उत्ड्डष्ठ फोटो का कार्य किया। पूर्व चिकित्सकों में हड्डी रोग विशेषज्ञ डा.ए.सी. अवस्थी, शल्यक श्री एस.सी.मित्तल, डा. ए.यू. खान का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डा. एस.सी. शर्मा का निदान अचूक था। फिजिसियन के रूप में उन्होंने पर्याप्त ख्याति प्राप्त की थी। चिकित्सकीय सेवा में श्री गोविन्द बल्लभ पाण्डे, श्री मदन सनवाल, श्री लीलाधर मिश्रा तथा श्री पदमादत्त पाण्डे ने अथक योगदान दिया। श्री चंचल तिवाड़ी, श्री विमल पाण्डे, श्री तारकेन्दु वैष्णव तथा श्री ए.एस. नयाल, श्री नवीन चन्द्र पाण्डे उच्च प्रशानिक पदों पर आसीन रहकर महत्वपूर्ण योगदान देते रहे।