अपना शहर

नैनीताल के निर्माता ला. मोतीराम शाह भाग 3

नित्यानन्द मिश्र, अल्मोड़ा -
नैनीताल नगर के शैक्षणिक विकास में श्री मुरलीधर जोशी, श्री जयदत्त जोशी, श्री मधुसूदन शर्मा, श्री चारूचन्द्र जोशी (चीनाखाना अल्मोड़ा), श्री लीलाधर जोशी (पिथौरागढ़), श्री अख्तर अली का उल्लेखनीय स्थान था। नगर में श्री गौरीदत्त काण्डपाल, श्री नरोत्तम लोहनी और श्री जयदत्त जोशी सदृश उद्भट ज्योतिषाचार्यों ने संस्कृत साहित्य में उल्लेखनीय योगदान दिया। प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में श्री हरिदत्त लोहनी, श्री हीराबल्लभ लोहनी और श्री चूड़ामणी जी की सेवाओं को भुलाया नहीं जा सकता है। कालान्तर में ए. वी. प्रेस, जनता प्रेस और किंग प्रेस ने मुद्रण कला के विकास में ख्याति प्राप्त की। किंग प्रेस के प्रबन्धक श्री हीरालाल साह तथा श्री तारादत्त पन्त के सहयोग से प्रसिद्ध कुमाऊँनी पहाड़ी पत्रिका अचल का सम्पादन हुआ था। ए. वी. प्रेस के प्रबन्धक श्री श्यामाचरण दत्त पन्त उत्कृष्ट सहित्यकार रहे। पहाड़ी भाषा में उनके द्वारा लिखित गीता लोकप्रिय रही। श्री हीरालाल साह जगाती ने पब्लिक लाइब्रेरी (दुर्गालाल मोहन लाल साह) के प्रबन्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। श्री भवानीदास सर्किल इंस्पेक्टर ने नगर की धार्मिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। सेवाकाल में उनका लोक अनुशासन प्रसिद्ध रहा। सफेद घोड़े में सवार होकर वह पुलिस थानों का कत्र्तव्यनिष्ठा से निरीक्षण किया करते थे। नगर की कुमाऊँनी होली और रामलीला के मंचन में श्री हरिदत्त जोशी (राय साहब), श्री भैरवदत्त जोशी, श्री गोविन्द बल्लभ पन्त (भारत रत्न), श्री दुर्गा साह (दुर्गा स्टोर), श्री भोला साह, श्री नन्दलाल साह, श्री तारा दत्त पन्त, श्री बांकेलाल साह (अल्का होटल), श्री राम दत्त जोशी, श्री रतनलाल साह (चित्रकार) ने पर्याप्त यश कमाया था।
नैनीताल के समाज ने कत्र्तव्यनिष्ठा और भक्ति का सुन्दर समन्वय प्रस्तुत कर उत्कृष्ट उदाहरण का परिचय दिया।
नगर की सांस्कृतिक परम्परा को जाग्रत करने हेतु मंगल क्लब, शनि क्लब और संकीर्तन सभा, शारदा संघ और नवज्योति क्लब का विशेष योगदान रहा। यह गौरव का विषय है कि शारदा संघ के प्रारम्भिक संस्थापक सदस्यों में श्री चन्द्रशेखर पन्त (ध्रुपद व धम्मार गायक नायक), श्री चन्द्रलाल साह, श्री गिरधारी लाल साह, श्री प्यारेलाल साह तथा श्री पूरन लाल साह सभी उत्कृष्ट कोटि के संगीत प्रेमी और कला मर्मज्ञ व्यक्ति रहे थे।
नगर की खेल कूद तथा अन्तर्राष्ट्रीय खिलाडि़यों के प्रादुर्भाव में श्री जीवनलाल साह, श्री जिब्सा, श्री गंगा प्रसाद साह, श्री भैरव दत्त भट्ट, श्री हीरा लाल साह, श्री राजेन्द्र सिंह रावत तथा श्री सैयद अली का उत्कृष्ट स्थान था। खेल के क्षेत्र में गोल्ड क्लब, वन्डररर्स, सिविल सर्विसेज तथा ब्त्ैज् व्सक ठवले का उल्लेखनीय स्थान था। श्री नन्दलाल साह तथा बरग्बाल नगर के विशेषज्ञ रहे। 1839 से 1848 तक वह कुमाऊँ के लोकप्रिय कमिश्नर रहे।
कवि गुमानी ने लूशिंगटन के विषय में लिखा है-
‘‘मुझे खूब रोजी इनायत करो जी
खुशी से लूशिंगटन कमिश्नर बहादुर
बड़े आप दानी करें दुआबानी
........ ........... ........... .......
लगी कर्जदारी यही मर्ज भारी
हरो अर्ज सारी सुनो बन्दापर्वर।’’
नगर के प्रमुख विद्वानों में श्री देवीदत्त पन्त पूर्व कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय का उल्लेखनीय स्थान था। ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक ब्ण् टण् त्ंउंद के शिष्यों में उनका विशेष स्थान था। श्री देवीदत्त पन्त के शिष्य भारत के अनेक वैज्ञानिक संस्थानों में कार्यरत् हैं।
नगर में साहित्य के विकास में श्री यमुनादत्त वैष्णव का उल्लेखनीय स्थान है। वर्तमान में श्री राजीव लोचन साह पत्रकारिता के क्षेत्र में और श्री गिरीश चन्द्र तिवाड़ी (गिरदा), श्री शेरसिंह अनपढ़, श्री हेमन्त बिष्ट कुमाऊँनी जनकवि के रूप में अपना विशिष्ट स्थान बनाये हुए हैं। श्री प्रेम सिंह उत्कृष्ट कथाकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। डाॅ0 चारूदत्त पाण्डे नगर के प्रमुख चिकित्सकों में अपना विशेष स्थान रखते थे। उनका निदान अचूक था। डाॅ0 प्रेमबल्लभ तिवाड़ी ने आयुर्वेदिक चिकित्सा में पर्याप्त यश अर्जित किया। उनके अनुज श्री मोहन चन्द्र तिवाड़ी उत्कृष्ट शिक्षक तथा फुटबाॅल के खिलाड़ी रहे थे। डाॅ0 रामलाल साह नगर के प्रसिद्ध चिकित्सकों मेें हैं। उनके द्वारा सुश्रृत की भेदन चिकित्साप्रणाली पर शोध कार्य किया गया। वह नगर के प्रमुख समाजसेवी और विश्व हिन्दू परिषद के सक्रिय सदस्य हैं।
नैनीताल के शैक्षणिक वातावरण को इसाई पादरियों और नन्स ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी निःस्वार्थ सेवा और कत्र्तव्य परायणता को भुलाया नहीं जा सकता है। उनकी उत्कृष्ट सेवा के फलस्वरूप आज भी इन विद्यालयों का शैक्षिक वातावरण उच्च स्तर का है।
त्यूनरा (अल्मोड़ा) के चन्द्रदत्त तिवाड़ी और श्री कृष्णाशाह के घनिष्ठ सम्बन्ध थे। वह उनके यहाँ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया करते थे। श्री चन्द्रदत्त तिवाड़ी के दो पुत्र साधु हो गये थे। श्री चन्द्रदत्त तिवाड़ी की धर्मनिष्ठा वयोवृद्धा पत्नी कृष्णा शाह के यश, ऐश्वर्य और परोपकारिता का अपने भांजे श्री भैरव दत्त जोशी रेन्जर बक्सी खोला से बखान किया करती थी।
क्रमशः