अपना शहर

नैनीताल के निर्माता ला. मोतीराम शाह भाग 4

नित्यानन्द मिश्र, अल्मोड़ा -
वर्तमान माल रोड में रिक्शा खींचते वक्त ‘एक तरफ, एक तरफ’ की आवाज देकर वह भीड़ भाड़ में वाहन चालन किया करते थे।
स्वतंत्रता के आन्दोलन में यहाँ के निवासियों ने अपने हस्ताक्षरों से आवेदन लगाकर ख्यातिप्राप्त अधिवक्ता हाईकोर्ट श्री ज्वालादत्त जोशी, मेविला काॅटेज को कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लेने के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया। श्री ज्वालादत्त जोशी ने ग्वालियर राज्य में प्रधानमंत्री के पद पर कार्य किया। सन्त भक्ति और धर्मपरायणता में वह अपना विशेष स्थान रखते थे। महात्मा गाँधी उनके निवास कैसल अल्मोड़ा आये थे।
कुमाऊँ कमिश्नरों में Sri H. G. Ross, J. Fisher, सहायक कमिश्नर C.J.Garstin1885 के लगभग अपने पदों में नियुक्त रहे और कुमाऊँ में अपना विशेष स्थान बनाया।
उपरोक्त महानुभावों का अल्मोड़ा के श्री बद्रीदत्त जोशी सदर अमीन के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध रहा। वे श्री मोतीराम शाह के मित्र थे। श्री बद्रीदत्त जोशी सदर अमीन के द्वारा अपने खर्च पर अल्मोड़ा पेयजल योजना मरम्मत कार्य सम्पन्न किया गया। स्याल से रम्भानौला तक के सम्पूर्ण मरम्मत कार्य उनके द्वारा सम्पन्न किए गए। पशुओं के लिए पानी की डिग्गी और सराय में दो धारों का अपने खर्च में उन्होंने निर्माण किया था। सदर अमीन जी के इस लोकहित कार्य की कमिश्नर J. Fisher ने भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। सदर अमीन जी ने उक्त दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया कि इस पानी में उनका उतना ही अधिकार रहेगा जितना अल्मोड़ा के निवासियों का होगा। अल्मोड़ा शहर की इस पेयजल योजना (स्याल से रम्भानौला अल्मोड़ा) का अनुमानित व्यय 8000 रू0 था। इसमें से 4500 स्थानीय फण्ड से प्राप्त किया गया शेष सदर अमीन जी ने अपने पास से दिया था।
नगर निर्माण के बाद उसके समन्वित विकास और आर्थिक सम्पन्नता हेतु लन्दन हाउस (वस्त्र), मैसर्स रामलाल साह ब्रदर्स, मै॰ दास साह एण्ड ब्रदर्स, मै0 रईस अहमद, एलाइड स्टोर्स, माॅडर्न बुक डिपो के व्यवस्थापक श्री बोधराज जी, आद0 नारायण एण्ड कम्पनी, फ्लैक्स शू कम्पनी के श्री रफीक अहमद, श्रीनाथ शाह सब्जी विक्रेता, श्री मटरू लाल (सब्जी विक्रेता), श्री के0 डी0 कर्नाटक, इन्दिरा फार्मेसी, रेनाॅल्डस् कम्पनी, श्री गोविन्द कम्पनी एण्ड सन्स तथा श्री किशोरी लाल साह एण्ड ब्रदर्श अपना प्रमुख स्थान रखते थे।
नैनीताल के शान्त तथा उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण तथा प्रसिद्ध दुर्लभ ग्रन्थों के पुस्तकालय (श्री दुर्गालाल मोहनलाल साह पुस्तकालय) से प्रभावित होकर बनारस एंेग्लो इण्डियन ओरिएंटल काॅलेज के प्रधानाचार्य मि0 वेनिस ग्रीष्मकाल में यहाँ आकर संस्कृत की दुर्लभ पाण्डुलिपियों में शोध कार्य किया करते थे। वह प्राच्च भाषा के प्रख्यात विद्वान थे। उनके शिष्यों में बनारस संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गोपीनाथ कविराय का विशेष स्थान था। स्वतन्त्रता के बाद नैनीताल में चिकित्सकीय कार्य में डाॅ0 प्रेमलाल साह, डाॅ0 इन्द्रलाल गंगोला, डाॅ0 राम लाल साह, डाॅ0 लीलाम्बर जोशी, डाॅ0 भुवन चन्द्र जोशी का उल्लेखनीय योगदान था। महापण्डित राहुल सांस्कृत्यायन ने यहाँ तिब्बती भाषा की दुर्लभ पाण्डुलिपियों में शोध कार्य किया था।
यहाँ की शान्त तथा उच्च शैक्षणिक व्यवस्था के फलस्वरूप नैनीताल में उच्चकोटि के शिक्षा शास्त्रियों का प्रादुर्भाव हुआ यथा श्री हीराबध्भ पाण्डेय, श्री हरीशचन्द्र पन्त, श्री पी0 डी0 सनवाल, श्री पद्मादत्त पाण्डेय (गणितज्ञ), श्री धर्मानन्द भट्ट, श्री यमुना दत्त पाण्डेय (कला), श्री गोवर्द्धन तिवाड़ी, श्री मिराज अली, श्री ध्यान सिंह रावत, श्री जफर खाँ, श्री गिल्बट, श्री धर्मानन्द तिवाड़ी तथा श्री सिन्हा आदि। इन दिग्गज शिक्षा शास्त्रियों की परम्परा को श्री देवीदत्त जोशी (विज्ञान), श्री गिरीश चन्द्र जोशी, श्री जीवन चन्द्र जोशी, श्री गिरीश चन्द्र पाण्डेय, श्री कवीन्द्र शेखर उप्रेती, श्री जगदीश चन्द्र पन्त, श्री जगदीश्वरी प्रसाद जोशी, श्री हीरानन्द पाराशर, श्रीमती डी0 एस0 देवी तथा श्रीमती पार्वती गुरूरानी ने आगे बढ़ाया। इन शिक्षकों का अपने छात्रों पर अमिट प्रभाव पड़ा। श्री देवीदत्त कबडवाल, श्री चन्द्रबल्लभ दुर्गापाल भी छात्रों के प्रिय शिक्षक रहे थे। श्री पूरन चन्द्र जोशी जी का अनुशासन लोक प्रसिद्ध रहा। राजकीय हाईस्कूल के जानकी प्रसाद जोशी, श्री त्रिलोक सिंह भोज अपने छात्रों में विशिष्ट स्थान रखते थे।
नगर के विकास में नगर पालिका के पूर्व अध्यक्षों में श्री जशोदा सिंह बिष्ट तथा श्री मनोहर लाल साह का उत्कृष्ट योगदान रहा। श्री द्वारिकानाथ साह ने अधीक्षण अधिशाषी के रूप में ख्याति प्राप्त की थी। श्री दयाकिशन पाण्डेय, श्री हरिनन्दन पाण्डेय तथा श्री घनानन्द पाण्डेय ने नगर के अधिवक्ताआंे के रूप में ख्याति प्राप्त कर लोकहित के अनेक कार्य किये। उनके नाम की छात्रवृत्तियाँ अभी भी वितरित की जाती हैं।
श्री मोतीराम शाह तथा उनके पुत्र किसी भी राजकीय सम्मान यथा रायबहादुर, रायसाहब से नवाजे नहीं गये थे। उनका उद्देश्य लोकहित रहा था। नैनीताल नगर के निर्माण तथा विकास में उध्ेखनीय योगदान हेतु हम इन सभी महानुभावों का श्रद्धास्वरूप स्मरण करते हैं।
क्रमशः