अपना शहर

नैनीताल के निर्माता ला. मोतीराम शाह भाग 5

नित्यानन्द मिश्र, अल्मोड़ा -
लेखक ने पूर्व में नैनीताल के भूस्खलन के विषय में लिखा है। यह भूस्खलन वर्तमान माॅडर्न बुक डिपो के समीप मल्लीताल में उस समय स्विस होटल के पास हुआ था। इसमें 151 स्विस व इंग्लैंड के निवासी (पर्यटक) दब गये थे। इनकी स्मृति में कब्र सूखाताल के समीप बनाई गई है और समीप ही चर्च है जो चर्च इन विल्डरनस के नाम से विख्यात था। इस भूस्खलन से वर्तमान फ्लैट्स पट गया था। यहाँ सरोवर का जल था।
महात्मा गाँधी के नैनीताल आगमन पर नगर के धर्मपरायण श्री गोविन्दलाल साह द्वारा ताकुला नैनीताल में उनके विश्राम स्थल में गाँधी धाम की स्थापना की गई। इस प्रकार उन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नगर की उच्च शिक्षा हेतु दानवीर दानसिंह बिष्ट ‘मालदार’ का विशिष्ट स्थान था। उनकी लोकोपारिता का फल वर्तमान कुमाऊँ विश्वविद्यालय का नैनीताल परिसर है। इस परिसर के ख्यातिप्राप्त प्रधानाचार्य तथा शिक्षकों में डाॅ. ए. एन. सिंह, डाॅ. के. एन. श्रीवास्तव, डाॅ. झमन लाल, डाॅ. देवीदत्त पन्त, डाॅ. गौतम द्विवेदी, डाॅ. आर. के. गंजू. डाॅ. वी. पी. चतुर्वेदी, डाॅ. ओ. एन. परती, डाॅ. नन्दकिशोर, डाॅ. वी. आर. सिंह, डाॅ. भार्गव, डाॅ. कोचर, डाॅ. बी. बी. मिश्रा, डाॅ. रघुवर दत्त पाण्डेय, डाॅ. ओ. पी. माथुर, डाॅ. पुत्तूलाल, डाॅ. बलबीर, डाॅ. हरिनारायण दीक्षित, डाॅ. ए. सी. आर्य, डाॅ. सक्सेना, डाॅ. के. पी. सिंह, डाॅ. शाकम्बरी द्विवेदी, डाॅ. एच. सी गुप्ता, डाॅ. मायाराम, डाॅ. के. डी. उपाध्याय, डाॅ. बम्बवाल, डाॅ. डी. एन. अग्रवाल, डाॅ. जी. के. श्रीवास्तव तथा डाॅ. टी. एन. श्रीवास्तव आदि ने अपने अध्यापन से छात्रों के सम्मुख शानदार उदाहरण प्रस्तुत कर ख्याति प्राप्त की।
नगर के समन्वित विकास में वर्तमान में पर्यटन के विकास हेतु ग्रैण्ड होटल, हिमालया होटल, अल्का होटल, मैट्रोपोल होटल, एवरेस्ट होटल, इविलियन होटल, इण्डिया होटल, सेण्ट्रल होटल, अशोक होटल, सेवाॅय होटल, नेशनल होटल, गुरूदीप होटल, पंजाब होटल, पैलेस तथा शीला होटल, मन्नू महारानी आदि का अग्रणी स्थान है। नैनीताल नगर के अधिवक्ताओं में श्री नवीन चन्द्र पन्त ने नगर की अनेक शैक्षणिक व सामाजिक संस्थाओं में भाग लेकर यश प्राप्त किया। विधि के क्षेत्र में श्री राजामोहन दास साह, श्री रौबर्ट ह्नीलर, श्री देवीदत्त सांगुणी, श्री देवीदत्त रूवाली का उल्लेखनीय स्थान रहा। वर्तमान में श्री प्रताप भैया अनेक विधिक व शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े हैं। आचार्य नरेन्द्र देव व श्री युसुफ मेहर अली की समाजवादी विचारधारा के वह ज्वलन्त प्रमाण हैं। उनके द्वारा स्थापित भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय नगर में शिक्षा का उत्कृष्ट स्थान है। श्री हरीश चन्द्र उप्रेती ने सरल सादगी का जीवन यापन कर अपने अध्यापन से छात्रों के हृदय में अमिट छाप छोड़ी थी। श्री इन्द्र सिंह नयाल न केवल अधिवक्ता के रूप में प्रसिð रहे वरन् राष्ट्रीय आन्दोलन मंे भी उनकी अग्रणी भूमिका रही थी। नैनीताल की योरोपियन शिक्षण संस्थानों के आयरिश पादरी व नन्स के शिक्षा में योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इस क्षेत्र में श्री मोण्टफोर्ड और श्री अम्बादत्त जोशी का उल्लेखनीय स्थान रहा। गाँधीवादी विचारक व सन्तभक्ति के ज्वलन्त प्रमाण शिक्षाशास्त्री श्री कृष्णानन्द शास्त्री का नगर के विशिष्ट व्यक्तियों में प्रमुख स्थान रहा।
श्री रामसाह आढ़ती, श्री तुलारामसाह आढ़ती, श्री लक्ष्मीदत्त जोशी (फाॅरेस्ट लाॅज), श्री केशव दत्त जोशी हल्द्वानी फर्नीचर मार्ट, श्री प्रेम बल्लभ मासीवाल ने नगर की सामाजिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। नगर में आर्य समाज की स्थापना के समय श्री रमादत्त त्रिपाठी, श्री गंगादत्त छिमवाल का उल्लेखनीय स्थान रहा था। स्वामी दयानन्द यहाँ की धार्मिक पृष्ठभूमि से प्रभावित हुए थे।
नैनीताल की शैक्षणिक व्यवस्था में बिड़ला विद्या मन्दिर नैनीताल के ख्यातिप्राप्त शिक्षा शास्त्री श्री एफ0 जी0 पियर्स, श्री श्रवण कुमार संभ, डाॅ0 ओम कृष्ण चोपड़ा, श्री नारायण दत्त पाण्डे, श्री लक्ष्मी दत्त पाण्डे, श्री जगदीश चन्द्र पाण्डे, पद्मश्री श्री शुकदेव पाण्डे तथा शुकेदव पन्त का उल्लेखनीय स्थान था।
श्री गिरीश चन्द्र उप्रेती (जीव विज्ञान), श्री भगवती प्रसाद पाण्डेय (गणित) तथा श्री देवकीनन्दन जोशी (जीव विज्ञान) ने सफल अध्यापक के रूप में ख्याति प्राप्त की थी। श्री गोविन्द बल्लभ पन्त, श्रीमती गौरा पन्त (शिवानी), श्रीमती तारा पाण्डे ने उत्कृष्ट कोटि के साहित्य का सृजन किया। महापण्डित राहुल सांस्कृत्यायन श्री गोविन्द बल्लभ पन्त की सादगी तथा साहित्य सेवा से अपने नैनीताल प्रवास के समय बहुत प्रभावित हुए थे।
नगर के क्रामिक विकास चिकित्सा क्षेत्र में इन्दिरा फार्मेसी, बिष्ट फार्मेसी, डेविस कम्पनी तथा मोहन को0 का उल्लेखनीय स्थान था। नगर के प्रेम रेस्टोरेन्ट में भविष्य के खिलाडि़यों का चयन होता था। इस चयन में भारतीय हाॅकी के कप्तान श्री के0 डी0 सिंह बाबू स्वयं उपस्थित रहते थे। नगर में होने वाली हाॅकी प्रतियोगिताओं में मोदी कप, आॅल इण्डिया ट्रेड्स कप का विशेष स्थान था।