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नैनीताल के निर्माता ला. मोतीराम शाह भाग 6

नित्यानन्द मिश्र, अल्मोड़ा -
श्री चन्द्रालाल शाह के भी तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध थे।
समय-सयम पर श्री मोतीराम शाह की कत्र्तव्यपरायणता और उनकी नैतिकता के लिये ब्रिटिश अधिकारियों के द्वारा प्रमाण पत्र दिये गये थे। 26 फरवरी, 1858 को दिये गए प्रमाण पत्र में कहा गया था-
‘‘अल्मोड़ा और नैनीताल के श्री मोतीराम शाह 1857-58 में अंग्रेज सज्जन और महिलाओं के लिये बहुत लाभदायक सिð हुए जब ये कुमाऊँ की पहाडि़यों में शरणागत थे। हम उनके प्रशंसनीय आचरण की प्रशंसा करते हैं और आशा करते हैं जो भी अंग्रेज नैनीताल का भ्रमण करेंगे वह उन्हें वैसा ही सम्मान देते रहेंगे।’’

(Sd.) J.Carmichael, Lt.-Col., 32nd Regt.

(Sd.) C.P. Carmichael, Civil Service.

(Sd.) E.E. Gunliffe, Lt, Late 41st Regt.

(Sd.) F. Horne.

(Sd.) P.A. Rolinton, Capt., Late 68th N.I.

(Sd.) C.S.I. Terrot, Capt., Late 28th Regt. N.I.

(Sd.) Mrs. Sibbald.
दूसरे प्रमाण पत्र के अनुसार ‘‘1845 में मेरे द्वारा श्री मोतीराम शाह को नियुक्त किया गया था और उन्हंे मैंने हमेशा सजग और लाभकारी पाया।’’

(Sd.) W. Richards Genl, K.C.B.

(Sd.) J.W. Story, Maj-Genl.

(Sd.) Colin Troup, Col. 68th Regt. N.I.

(Sd.) J. Graham, Lt. Col.

(Sd.) M. E. Sherwile, Lt.-Col, 2nd English Regt.

(Sd.) I.P. Clarkson, Capt., Late 44th N.I.

(Sd.) R.M. Pride, Chaplain, Nainital.

(Sd.) P. Howell, Lt-Col.

(Sd.) H. W. Chapman, Lt. 28th Regt. N.I.

(Sd.) A. Paterson, Capt, Late 68th, N.I.

(Sd.) Hugh A. Christian, Lt. Late 60th N.I.
तीसरे प्रमाण पत्र के अनुसार ‘‘विगत दो बर्षों से मेरा श्री मोतीराम शाह के साथ घनिष्ट सम्बन्ध व्यवहार था। मैंने उन्हें सदैव सहयोगी और लाभकारी पाया।’’

(Sd.) J. John Troup, Maj, 63th Regt. N.I.
हम सब श्री मोतीराम शाह को दिये गए उक्त प्रमाण पत्रों में उनकी प्रसंशा को प्रमाणित करते हैं।

(Sd.) J. T. Lane Maj, Genl.

(Sd.) J.C. Dickinson, Capt, 33th Regt.

(Sd.) H.M. Davidson, Capt, 29th Regt.

(Sd.) L. Maddey, Capt, Late 29th N.I.

(Sd.) M.B. Whish, Capt. Late 29th N.I.

(Sd.) F.G. Thelluson, Bt.-Capt, 29th N.I.
3 मार्च, 1858 के प्रमाणपत्र के आधार पर-
‘‘मैंने श्री मोतीराम को हमेशा आज्ञाकारी और लाभदायक पाया।’’

(Sd.) Hon. Mrs. Wrattesley.

(Sd.) Mrs. Fanshawe.
श्री मोतीराम शाह 1857-58 की क्रान्ति की अव्यवस्था के समय जनसामान्य के समय लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हुए।

(Sd.) A.St.A. Wilson, M.D.

Asst. Surgn in Medl Charge, Nainital.

जी0 एच0 एम0 बैटन ने श्री मोतीराम शाह की प्रशंसा में कहा था, ‘‘बिना मोतीराम शाह की सहायता के नैनीताल नगर निवासियों को रसद की तथा अन्य वस्तुओं की आपूर्ति सम्भव नहीं थी। उन्होंने नैनीताल नगर निवासियों को उनके मासिक व्यय के लिए धन सुलभ करवाया था।’’ बैटन के इस प्रमाण पत्र का फ्रेड रीड ने अनुमोदन किया था। सर हेनरी रैमजे ने उनकी प्रशंसा में कहा था कि ‘‘श्री मोतीराम शाह एक सज्जन पुरूष थे। उन्होंने 40000 रू0 तक की हमारी सहायता की थी। इस धन में उन्होंने किसी प्रकार का ब्याज लेने से इंकार कर दिया था। उन्होंने अपना सम्पूर्ण व्यक्तिगत कोष मेरे अधीन कर दिया था। उन्होंने हमारी ऐसे समय सहायता की थी जब कहीं से धन प्राप्ति सुलभ नहीं थी।’’
उपरोक्त सभी प्रमाण पत्र को जे0 आर0 पियरसन, डिप्टी कमिश्नर, नैनीताल ने 18 जून, 1902 में अभिप्रमाणित किया था।
23 जनवरी 1859 में जे0 एच0 बैटन, कानपुर के जज और कमिश्नर कुमाऊँ ने श्री मोतीराम शाह की प्रशंसा में कहा था, ‘‘श्री मोतीराम शाह से मेरा परिचय मि0 टर्नर, सहारनपुर के कलेक्टर द्वारा अल्मोड़ा के एक सम्माननीय व्यापारी के माध्यम से हुआ था। वह नैनीताल के प्रमुुख बैंकर थे। वास्तव में वह कुमाऊँ के प्रमुख व्यक्ति थे। 1857 की क्रान्ति के बाद उन्होंने अंग्रेज तथा अन्य शरणार्थियांे की उल्लेखनीय सहायता की थी। वह हमारे शुभचिन्तक थे। मुझे आशा है कि निश्चित समय में उन्हें उपयुक्त पुरस्कार प्रदान किया जायेगा।’’
1 अगस्त, 1866 में सी0 डब्लू0 थौर्नहिल ने कहा था-मैं मोतीराम शाह को 1844 से जानता हूँ जब वह बैरन के साथ नियुक्त थे। उन्होंने नैनीताल में पहली कोठी बनाई थी। श्री मोतीराम शाह लेनदेन के मामले में बहुत अनुशासनप्रिय और सख्त थे। 1857 की क्रान्ति के बाद शरणर्थियों की उत्कृष्ठ सेवार्थ उन्हें सरकार ने सम्मानित भी...............
क्रमशः