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नैनीताल तो नैनीताल ही हुआ (3)

नैनीताल तो नैनीताल ही हुआ (3)
हेमन्त बिष्ट, खुर्पाताल
नैनीताल-
जब भी बच्चों के स्वास्थ्य, भविष्य के विषय में कोई भी राय दे, माँ, बुआ, तत्काल उसे पूरा करने में जुट जाते हैं। बच्चों की मौसी दीपा की राय थी कि बच्चों को फलां-फलां नगों वाली अंगूठी पहनाएं तो पत्नी गीता व दीदी हन्सा का आदेश हो गया। बच्चे भी माँ और बुआ की भावनाओं को सम्मान देते हुए सहयोग करते हैं। तन्नू-चुन्नू के लिये अंगूठियाँ बनवाई गई। छुट्टियों में घर आये तो अंगूठी पहनी और फिर दिल्ली को रवाना हो गए।
अचानक एक दिन छोटे बेटे चेतन (चुन्नू) का फोन आता है कि अंगूठी खो गई है अब एक लौकेट बनवा दें, उसी में नग लगवा दें। मैंने कहा ठीक है आज सुनार के वहाँ जाकर बनवा दूंगा, चिंता न करें। लखनऊ वाले ददा के बेटे राजेन्द्र जो रिटायर्ड बैंक अधिकारी हैं, उनकी रूचि भी ज्योतिष में है, मिलने यहाँ आए थे। बोले,‘‘सनुहला नग’’ तो अंगुली में ही पहना जाएगा क्योंकि अंगुली की जड़ पर हथेली में,‘जुपीटर माउण्टेन’ होता है उससे नग टच होना जरूरी है।
मैं सुनार के यहाँ पहुँचा, बोला नग लाकेट में लगाने की बात कर रहा है। सुनार भी वही बोला,‘ददा सुनहली कैं गल में पैर बेर फैद नि हौल, भाऊ थैं फोन मिलाओ, मैं बात करनू’ सुनार फोन पर बोले,‘बेटा पैल फ्यार लै तो मैंल तुमरि अंगुठिक नम्बर, फोनै में पूछौ, क्वे लै सुनाराक वा जै बेर रिंगक साइज पूछ ल्यो उई साइजेकि अंगुठि बणि जालि। जो हमरि मान्यताएं छन, उनकैं मानणै पड़ूं। गल में पैर बेर क्ये फैद न्हा। य भलि बात छ कि दिल्ली में रै बेर लै इज-बाबूंकि बात माननौंछा। जब माननौंछा तो पूरै मानो ठीक छू? पै नम्बर बतै दिया हाँ।’
मैंने पूछा आपकी राशि क्या है? सुनार बोले,‘तिथिक हिसाबैल म्यर नाम ‘ट’ बै पड़ौल।’ तभी ऊपरी मंजिल से एक बच्ची की आवाज आई,‘नानू! चाय पी लो’ मैंने पूछा, आप यहाँ रहते हैं? सुनार बोले,‘नहीं तो, ये तो राजेन्द्र बाक्सर जी की नातिन है। चाय पीने लगे तो मेरी याद आ जाती है इसे, मुझसे नाना कहती है। मैं तो नीचे रहता हूँ वो कामेश्वर प्रसाद काला जी के वहाँ पर ........ माँ जी (काला जी की धर्म पत्नी) भी बिल्कुल बेटे-बहू का जैसा ख्याल रखती है हमारा। एक बार मुझे और मेरी पत्नी को बाहर जाना पड़ा। बेटा-बेटी 5-6 साल के हुए। माँ जी के साथ ही रहे हमारे लौटने तक। हम लौटे तो बेटी की इतनी अच्छी चोटी बनाई हुई माँ जी ने कि बेटी तब से कहने वाली हुई चोटी दादी ही बनाएंगी, राखी, रेखा, राजीव सब भाई-बहनों की तरह इज्जत और प्रेम करने वाले हुए मुझसे।’
तभी एक महिला विष्णु प्रतिमा बनाने आई,‘‘बोली दाज्यू, चेलिक ब्या हू। चिन्ह ठीक से नि मिल, पौलिक विष्णु प्रतिमा विवाह हौल.......’’ मैं सोचने लगा, विश्वास भी क्या चीज है, बड़ी ताक है विश्वास में। मैंने सोचते हुए कहा,‘जैसे यहाँ चिन्ह मिलाते हैं, मुस्लिमों में भी होता होगा ऐसा कुछ?’ सुनार बोले, ‘आपने कहा तो विश्वास! वहाँ भी इफ्तकारा पर विश्वास करते हैं कुछ लोग। वाँ लै सितारे मिलाई जानी, खाणाक बाद इफ्तकारा पढी जाँ। कुनी कि वीक बाद रात कै भाल् स्वैण (सपना) आया तो रिश्त करण चैं, भाल् स्वैण नी आया तो नि करण चैं।’ मैंने पूछा,‘वहाँ विष्णु प्रतिमा वाल कन्सैप्ट जस ले छ क्ये?’ ‘हो-होय, अल्लाह हाफिज, निगेहबानी में मली वालाक् भरौस पर लै रिश्त है जाँ।’?
कितनी-कितनी बातें होती रहीं। मुझे वह बताते रहे सुनहला, पुखराज का substitute  है, किस राशि का स्वामी कौन है ........... नीलम-कुम्भ का क्या रिश्ता है .......। तभी उनके बेटे का फोन आया। बेटा कह रहा था कि वह इस समय स्वर्ण मंदिर अमृतसर में घूम रहे हैं। बड़ी शांति है। वह करह रहे थे, ‘‘बेटे किसी भी तीर्थ में जाओ। मन को शांति मिलती ही है ..........’’ पिता-पुत्र की वात्र्ता चल रही थी, मैं विदा होकर घर की ओर बढ़ गया।
अगले हफ्ते बेटा दिल्ली से घर आया जो दुकान का पता मैंने दिया वहाँ पर से फोन किया। दुकान तो खुली है लेकिन दुकान में कोई नहीं है। मैंने कहा मैं भी नैनीताल में ही हूँ। अभी आ रहा हूँ। काफी देर बाद सुनार दुकान में पहुँचे। मेरे बेटे ने कहा,‘अंकल सोने की दुकान और आप छोड़ के चले जाते हैं?’ सुनार बोले,‘एतुकाक् लिजि तो य नैनीताल भै।’ मैंने कहा चुन्नू! आप इनके बच्चों को नहीं जानते क्या? ये आदिल और हुन्जा के पापा है , आदिल जो इन्जीनियरिंग कर रहा है ग्रैफिक ऐरा से? और अंकल का नाम? ‘अरे! साबिर हुसैन है, तुमको पता नहीं है क्या?’ चुन्नू चकित होकर बोला,‘.......... वो राशियों का ज्ञान ........ वो पहाड़ी में बोलना ........’ मेरे मुँह से फिर निकला ‘‘नैनीताल तो नैनीताल ही हुआ।’’