संस्कृति

पवित्र वस्तुओं में गौ का स्थान भाग 3

पवित्र वस्तुओं में गौ का स्थान
के॰सी॰ सुयाल, नैनीताल -
नयी जीवन प्रणालियाँ अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तरीके से विकसित होने लगेंगी। ऐसी स्थिति में जिन क्षेत्रों के लोग गोवंश की रक्षा कर चुके होंगे मानव जीवन की जिजीविषा की दौड़ में वे ही समृद्ध  हो पाएंगे । उदाहरणार्थ हमारे देश की ड्डषि की अभी भी 70 प्रतिशत ऊर्जा गोवंश से प्राप्त हो रही है। गाँवों में खेतों की जुताई, गन्ना पेराई, सिंचाई हेतु रहट चलवाई तथा ड्डषि सम्बन्धी सामग्री व उत्पादन को परिवहित करना सारा काम बैलों के द्वारा किया जाता है। गोबर से उत्पादित गोबरगैस से प्रकाश व रसोई के सारे कार्य किये जाते हैं। यदि उपरोक्त ऊर्जा पेट्रोलियम पदार्थाें से प्राप्त की जाय तो 150 गुनी अधिक विदेशी मुद्रा खर्च कर इसका आयात करना होगा और हम उनकी शर्ताें पर आश्रित हो जाएँगे । साथ ही पेट्रोलियम पदार्थाें के उपयोग से उत्पन्न प्रदूषण व ग्रीन हाउस गैसों से उत्पन्न गर्मी एक अलग से अध्ययन का विस्तृत विषय है। यह भी शोचनीय है कि यदि हम वर्तमान में कुल ऊर्जा के 30 प्रतिशत से वर्तमान पर्यावरणीय असंतुलन ग्लोबल वार्मिंग व मौसम परिवर्तन की चिन्ताओं से जूझ रहे हैं तो यदि 100 प्रतिशत इन पेट्रोलियम पदार्थाें से प्राप्त करने लगेंगे तो क्या इस पृथ्वी पर जीवन के अक्षुण रहने की कल्पना की जा सकती है?