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प्राकृतिक पत्थर उगल रहे राज्य सरकार के लिए सोना , पर्यटकों के दिल में बसा है नैनीताल का केव गार्डेन

नीरज जोशी, नैनीताल - उत्तराखंड हमेसा से पर्यटको के दिल में बसा है यहाँ की खूबसूरती देखते ही हर कोई इसकी और खीचा चला आता है बल्कि अब यहां के पत्थर भी सोना उगल रहे हैं । यहां पत्थर की गुफाओं को इस्तेमाल करके कुमाऊ मंडल विकास निगम(के.एम.वी.एन.)ने पर्यटकों से करोड़ों रुपये का राजस्व कमाया है ।
सरोवर नगरी नैनीताल के ये प्राकृतिक पत्थर इनदिनों राज्य सरकार के लिए सोना उगलने का काम कर रहे है । इस बंजर पड़े स्थान को जब एक बड़ी सोच वाले अधिकारी उमेश सिन्हा जो उस वक्त मंडल के महाप्रबंधक थे ने मात्र दो स्थानीय युवकों की मदद से इस मुकाम तक पहुचने लायक बना दिया ! हालाँकि उमेशसिन्हा तो अब यहाँ नहीं हैं लेकिन वे दो युवा चन्दन बिष्ट व भगत सिंह गोसाईं यहाँ अब भी कार्य कर रहे हैं ! इस गुफा का उदघाटन दो जून 1999 को हुआ था जब इसमें किराया मात्र दस व पांच रुपया रखा गया था ! चन्दन के अनुसार इसमें बहुत सारे पेड़ों के चलते पहले टेंट कालोनी बनाने का भी प्रस्ताव आया था लेकिन सिन्हा साहब ने इसे गुफा बनाने की ठान कर इन दो युवाओं व मंडल के निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी !
नैनीताल के सूखाताल क्षेत्र में स्थित यह गुफा पहले वीरान पड़ी थी लेकिन कु.मं.वि.नि में आए एक होनहार अफसर ने इसको बनवाकर इसका भाग्य ही जैसे बादल दिया ! अब ये गुफा पर्यटकों की आवाजाही के बाद सीजन में निगम को हर रोज लगभग 25 हजार की कमाई कराती है ! इस गुफा में बच्चों के लिए 10 रुपया व बड़ों के लिए 30 रुपया लिया जाता है इसकी अतिरिक्त कमाई में कैमरे का 25 रुपया व सुन्दर म्यूजिकल फुव्वारे का 10 रुपया है जो सीजन के दौरान शाम के वक़्त निहायत ही सुंदर दिखता है ! मंडल ने इसमें 6 गुफाओ को तैयार किया है जिसको शेर, पेंथर, पोर्कुपाइन, फ़्लाइंग फोक्स, एप्स इति . के नाम से पुकारा गया है ! विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार सीजन में यहाँ हर रोज लगभग एक हजार पर्यटक इसे देखने के लिए आते हैं.
जी हाँ, हम बात कर रहे है नैनीताल के केव गार्डन की, जिसे के.एम.वी.एन.के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वर्षों पहले मॉर्निंग वॉक के दौरान खोजा था । उन्होंने इसे सीमित संसाधनों के बावजूद एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया औए आज ये एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल बन चुका है । यहां पर्यटक इन प्राकृतिक गुफाओं का दीदार करने पहुंचते हैं । यहां पहुुँचे कुछ पर्यटकों से जब हमने बात की तो उन्होंनेे यहां घूमने के बाद खुशी जाहिर की साथ ही यहां साफ सफाई रखने की नसीहत भी दे डाली ।
साल भर लाखों की संख्या में आने वाले पर्यटक इन प्राकृतिक गुफाओं के अंदर जाकर प्राचीन पत्थरों से रूबरू हो रहे है ओर अलग अलग गुफाओं के अंदर प्रवेश कर रहे है , इको केव की खूबशूरती को पर्यटक अपने अपने कैमरों मे सैल्फी अंदाज हो या फिर फ़ोटो ग्राफर की मदद से यादगार बना रहे है
कुमाऊं मंडल विकास निगम की देखरेख में चलाए जाने वाले इस केव गार्डन में, पैंथर केव, टाइगर केव,फ्लाइंग फॉक केव , बट्स केव, एप केव जैसी अलग अलग गुफाओं को देखने यहाँ पर्यटकों का जमावड़ा हमेशा लगा रहता है।
कुमाऊं मंडल के महाप्रबंधक जीएस मर्तोलिया ने बताया कि विगत वर्ष में इस केव को देखने के लिए 2 लाख 50 हज़ार पर्यटक आए थे जिससे निगम को 1 करोड़ 15 लाख की आय हुई थी। बताया की इस साल अबतक 1 लाख 55 हज़ार पर्यटक ईको केव पार्क में घूमने आए है जिससे लगभग 81 लाख की कमाई कुमाऊं मंडल कर चुका है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं मंडल द्वारा ऐसे और स्थानों की खोज की जा रही है जो पर्यटकों को अपनी तरफ लुभा सके।