अर्थ तंत्र

बचत के नये आयाम

बचत के नये आयाम
संदीप बिष्ट, नैनीताल -

रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री रघुराम राजन ने फरवरी के अन्तिम सप्ताह के दौरान रेपो रेट में अचानक कमी करके पूँजी तथा शेयर बाजारों को चैंका दिया था। सेंसेक्स तथा निफ्टी ने नई ऊँचाईयों को छुआ और विदेशी निवेशकों ने भारतीय पूँजी तथा शेयर बाजारों मे जमकर खरीदारी की थी और फिर मुनाफावसूली से बाजारों में गिरावट आ चुकी है। अब यह बिल्कुल सही समय है कि म्युचुअल फंडों तथा ई. एल. एल. एस. के माध्यम से एक आम निवेशक को भी बाजार में प्रवेश करना चाहिए। नई सरकार का मुख्य उद्देश्य बजट के माध्यम से यह रहा है कि करंट एकाउंट के घाटे को कम करना। एक अन्तर्राष्ट्रीय मदद हमारी अर्थव्यवस्था के लिए यह है कि कच्चे तेल की कीमतें सबसे निचले स्तर पर पहुँची और लगभग 45 से 60 डालर प्रति बैरल के बीच में घूम रही है। रेपो रेट की कमी से अगर बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्था ब्याज दरों में कमी करते हैं तो इससे बहुत सारी वित्तीय गतिविधियों में तेजी आने की सम्भावना है और अर्थव्यवस्था की रफतार और तेज होगी तथा निवश चक्र और तेज होगा। जिससे अगर आप लम्बी अवधि के लिए बाजार में उपलब्ध फंडों में निवेश करेंगे तो भविष्य में अच्छे परिणाम मिलने की पूरी सम्भावना है।
शेयर बाजार, फंड बाजार तथा कर्ज बाजार में भारत जैसी इमरजिंग अर्थव्यवस्था के लिए एक दुर्भाग्य की बात है कि आम निवेशक अभी भी इससे काफी दूर है। यहाँ पर निवेशक आज भी सोने-चाँदी जमीनों तथा परम्परागत बचत के विकल्पों में ही अपनी पूँजी को लगा रहे हैं या फिर सामान्यतया एफ डी या बचत बैंक में पूँजी को रखते हैं। लेकिन अब समय बदल चुका है । बैंक आफ अमेरिका, मेरिल लैंच (Merryl Lynch) ने एक रिसर्च के माध्यम से संभावना जताई है कि भारतीय फंड तथा इक्विटी बाजार अगले 5 से 10 वर्षों में सबसे अच्छे रिर्टन देने के लिए तैयार हैं।
क्रमशः