राज्य

बने सामाजिक तथा व्यावहारिक, अगर रहना है स्वस्थ - डा. अहमद इक़बाल

चम्पावत - मानसिक तौर पर स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को सामाजिक तथा व्यावहारिक होना आवश्यक है। यह बात आज जिलाधिकारी डाॅ.अहमद इकबाल ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिला चिकित्सालय में आयोजित गोष्ठी में डाॅक्टरों को व्याख्यान देते हुए कही।
जिलाधिकारी ने मानव जीवन की अवस्थाओं बचपन, किशोरावस्था, जवानी एवं बुढ़ापा आदि में मानसिक तनाव उत्पन्न होने के कारणों पर जानकारी देते हुए कहा कि विभिन्न अवस्थाओं के अनुसार मानव का मनोवैज्ञानिक व दार्शनिक विकास होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति इनके विकास से ही पूर्ण रूप से सामाजिक बनता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान समय में चिन्ता, अकेलापन, अनावश्यक दबाव, आत्म सम्मान में कमी, हीनता की भावना, मादक पदार्थो का सेवन, दुख, दुर्घटना, अनुचित खान-पान आदि मानसिक बीमारियों का मुख्य कारण हैं। मानसिक बीमारी के बहुत ही कम केस अनुवांशिक असमानता व संक्रमण के कारण मस्तिष्क क्षति के होते हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति के प्रति नकारात्मक सोच व गलतफहमी है कि मानसिक रोगी समाज के लिए हिंसक व खतरनाक होता है, हमे इस प्रवृत्ति को दूर करते हुए पीड़ित व्यक्ति का मनौवेज्ञानिक व सामाजिक दोनो पद्धतियाॅ अपनाते हुए उनका ईलाज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के स्वभाव को समझे व उनकी भावनाओं को सम्मान तथा सामाजिक सहयोग देते हुए ईलाज करना चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा कि हमे व्यक्ति द्वारा किए गए बरताव पर ध्यान न देेते हुए उसकी मानसिक स्थिति पर ध्यान केन्द्रित करते हुए उसका ईलाज करना चाहिए। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने विभिन्न आयु वर्ग मे विकसित होने वाली मानसिक बीमारियों, उनके प्रभाव व ईलाज आदि के विषय में विस्तार से व्याख्यान दिया।
जिलाधिकारी ने इस वर्ष के शीर्षक कार्यालय स्थल पर मानसिक स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुए कहा कि कार्यालय स्थल पर वही व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है जो अपने कार्यों का निष्पाद पूरी ईमानदारी एवं दक्षता के साथ समय पर करता है। जिलाधिकारी ने कहा प्रत्येक कर्मचारी छवि ईमानदार व्यक्ति की होनी चाहिए तथा अपना कार्य नियमानुसार करना चाहिए जिससे कि कोई भी व्यक्ति गलत कार्यों के लिए अनावश्यक दबाव न डाल सके। उन्होंने कहा कि कार्यालय स्थल पर गुटबन्दी व फालतू की बातों से बचना चाहिए।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. रश्मि पन्त, सीमएस डाॅ.आरके जोशी, डाॅ.आरपी खण्डूरी, डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मेनेजर गौरव पाण्डेय आदि ने भी अपने-अपने विचार रखे। कार्यशाला का संचालन हेम बहुगुणा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डाॅ.इन्दजीत पाण्डेय, डाॅ.श्वेता खर्कवाल, डाॅ.एचसी त्रिपाठी, डाॅ.एचएस ऐरी, डाॅ.उदय शंकर, डाॅ’.जीबी बिष्ट सहित चिकित्सालय स्टाॅफ आदि उपस्थित था।