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बाॅटनिकल गार्डनः यहां बसता है मिनी पतंजलि दुर्लभ औषधियों के पौंधों की जानकारी चाहिए तो गार्डन आएं

बाॅटनिकल गार्डनः यहां बसता है मिनी पतंजलि
दुर्लभ औषधियों के पौंधों की जानकारी चाहिए तो गार्डन आएं
रवीन्द्र पाण्डे ‘रवि’, नैनीताल-
नगर के समीपवर्ती नारायणनगर क्षेत्र में स्थित वन विभाग के बाॅटनिकल गार्डन में दुर्लभ जड़ी बूटियों व वनस्पतियों का भंडार है। यहां विभिन्न रोगों समेत आसाध्य रोगों के निदान में बहुपयोगी 150 वनस्पतियां मौजूद हैं। इसके अलावा 70 फर्न , 40 आॅर्किड, 80 कैक्टस आदि भी इसकी मुख्य विशेषता हैं। शोधार्थियों व औषधीय वनस्पति की जिज्ञासा रखने वालों के लिए यह खासा उपयोगी स्थल साबित हो रहा है।
समुद्र तल से 2560 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बाॅटनिकल गार्डन 200 हैक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहां घाव के लिए कारगर सालवियाय, दर्द निवारक जिटालु, छाले के निदानशे कैलीकापर, पाइल्स, स्किन डिजीज मे कारगर किल्मोड़ा, हड्डी जोड़ने में सहायक तुस्यारी, उदर रोग में सहायक स्मैक्स नैपलेक्सिस व गंधराजन, बच्चों के उदर रोग की संजीवनी मोरिना पर्सिका, नेत्र विकार में सहयोगी कुंज आदि है। रक्त शोधक कोर्डियोफोलिया वनस्पति को प्रयोग से टिटनेस व टांके की जरुरत नहीं होती। इसके अलावा ज्वर में सहायक लानाटा, सर्दी जुकाम जड़ समूल खात्मे को वनफ्सा, दमा में सहायक फुलिया, दांत दर्द का रामबांण कंठकारी, अनिद्र के लिए अदरक सरीखी जड़नुमा बच, सांस के रोग निदानकारी हल्दू आदि दुर्लभ जडी बूटियां मौजूद हैं।
संबंधित औषधियों के जानकार वन विभाग कर्मी आरसी पांडे ने बताया कि आज भी इन वनस्पतियों व जड़ी बूटियों का सदुपयोग किया जा सकता है, लेकिन जरुरत है तो इनके संरक्षण की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान रखने वाले बुजुर्गो द्वारा बताई इनके सेवन की पद्धति को लिपिबद्ध व संकलित कर भविष्य में इसके सदुपयोग को चिर स्थाई रखा जा सकता है।