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भारतीय गणतन्त्र की चुनौतियाँ

भारतीय गणतन्त्र की चुनौतियाँ संदीप बिष्ट, नैनीताल- 26 जनवरी 2016 को हमने 67वाँ गणतन्त्र दिवस बड़ी जोर-शोर से मनाया राजपथ पर तीनों सेनाओं का शक्ति प्रदर्शन, राज्यों की झाँकियां, विभिन्न संस्थाओं का विकास प्रदर्शन दर्शनीय था। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने मुख्य अतिथि बनकर तथा भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान राफेल खरीद में सकारात्मक पहल की है। देश आर्थिक, सामाजिक तौर पर विश्व के प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है। देश में गणतन्त्र की जड़े काफी मजबूत हो रही हैं। लोग अपने वोट के अधिकार का भरपूर इस्तेमाल कर इस तथ्य को सच साबित कर रहे हैं। सेक्युलरवाद या धर्म-निरपेक्षता भारतीय गणतन्त्र की आत्मा है। हम विश्व में अपनी धर्म-निरपेक्ष छवि के लिए जाने जाते हैं। जब 1947 में 15 अगस्त को हम आजाद हुए थे तो भारत ने सेक्युलरवाद को चुना तथा पाकिस्तान, जोकि भारतीय भू-भाग पर ही एक नया देश बना दिया गया, उसने धार्मिक राष्ट्र यानि इस्लामिक राष्ट्र बनना पसन्द किया। आज गणतन्त्र के 67 साल बाद भी हमारे देश में समान नागरिक संहिता कानून लागू क्यों नहीं है? आज हमारे देश में सरकार राष्ट्रीय ध्वज, प्रतीक चिन्हों, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत आदि के अपमान पर इतनी लचर क्यों है? देश के कानून को धर्म से ऊपर उठकर मानना चाहिए। क्यों आज भी वोट बैंक के चक्कर में देश मंे राजनैतिक पार्टियां राष्ट्रद्रोहियों के खिलाफ खड़ी नहीं होती हैं। कुछ समय पूर्व मेरठ में कुछ छात्रों ने जब पाकिस्तानी झण्डे फहराये थे तो क्यों हमारी कुछ राजनैतिक पार्टियां उनके पक्ष में खड़ी नजर आयी और उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं करने पर अड़ी रहीं। कश्मीर में एक विधायक खुले आम बीफ पार्टी का आयोजन करता है, फिर भी उसके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं होती है। सरकार अगर इस तरह के मामलों में सख्त कार्यवाही करे तथा राष्ट्र विरोधी तत्वों को यह संदेश दे कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है तथा संविधान ही भारतीय राष्ट्र का धर्म है जिन्हें धार्मिक आधार पर विभाजन चाहिए था वे सन् 1947 में ही देश छोड़कर सीमापार जा चुके हैं। कट्टर धर्मवाद का मानस रखने वाले लोगों को अपने को बदलना पड़ेगा, नहीं तो देश में और कितने पाकिस्तान बनाने की आवाजें उठेंगी पता नहीं। हम संविधान लागू होने के 7 दशक बाद भी अपने देश में राष्ट्रवाद को पूरी तरह फलता-फूलता नहीं देख रहे हैं। आज भी कभी टोंक में तो कभी मेरठ में हमें ऐसी क्षुद्र मानसिकता वाले लोग मिल जाते हैं। इन लोगों पर सख्ती से कार्यवाही करने की जरुरत है। वरना गणतन्त्र के इस त्यौहार यानि 26 जनवरी के दिन हर वर्ष ये लोग खून की होली खेलने के लिए तैयार रहेंगे। इस देश की सुरक्षा एजंेसियों को कोटि-कोटि धन्यवाद है जिन्होंने इसी बीच पूरे देश से लगभग 15 से करीब प्ैप्ै व प्ैप् के एजेंटों व आतंकियों को पकड़ा। इनका इरादा कुंभ में हरिद्वार तथा गणतन्त्र दिवस के दिन दिल्ली दहलाने का था, जो धर्म निरपेक्षता व गणतन्त्र के इस त्यौहार को काला कर जाता। उम्मीद की जानी चाहिए कि केन्द्र सरकार गणतन्त्र की रक्षा के लिए पूरे देश में जीरो टोलरेंस की नीति अपनायेगी।