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मल्लीताल स्थित मेट्रोपोल होटल का भी है समृद्धशाली अतीत

नैनीताल की धरोहर के क्रम में ----------

ब्रिटिश हुकूमत में भारतीयों को मिला था बराबरी का हक

रवीन्द्र पाण्डे ‘रवि’, नैनीताल -

 

वैश्विक परिदृश्य में अद्वितीय नैसर्गिक सौन्दर्य के साथ विश्व की प्रमुख पयर्टन नगरी में शामिल हमारी सरोवर नगरी नैनीताल, यहाँ मौजूद विभिन्न ऐतिहासिक ईमारतों, पौराणिक मंदिर, चर्च एवं खूबसूरत पर्यटक स्थलों के लिए जानी जाती है। इसी क्रम में इस बार के अंक में हम आपको मेट्रोपोल होटल व नैनीताल की ऐतिहासिक भवनों के अग्निकांड के बारे में बता रहे हैं।

 

मल्लीताल स्थित मेट्रोपोल होटल का समृद्धशाली अतीत रहा है। यह देश के निवासियों के लिए इसलिए भी अहम् है कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान इसी होटल में हिंदुस्तानियों को ब्रिटिशर्स की बराबरी का हक मिला था। ब्रिटिश हुकूमत में यह भारतीयों को बराबरी का हक दिलाने का अहम् साक्षी रहा है। 8-72 एकड़ में फैले होटल परिसर में चार दर्जन कमरे तथा हाल हुआ करते थे। हालांकि कभी शत्रु सम्पत्ति तथा कभी सम्पत्ति स्वामी राजा महमूदाबाद के पास रहने के कारण यह बदहाली का शिकार है।

नगर की इस शत्रु सम्पत्ति का हालांकि कोई ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं है। लेकिन एक दगडि़या टीम ने परिसर से जुड़े तथा ऐतिहासिक जानकारी रखने वाले लोगों से बातचीत की। पूर्व में परिसर में रहने वाले राजू बिष्ट कहते हैं कि उनके पास भवन के 1889 के नक्शे मौजूद हैं। हैरिटेज भवनों पर शोध कर रहे इतिहासकार प्रो- एच एस भाकुनी का कहना है कि यह भवन 1870 से पूर्व का है। भवन की देख रेख कर रहे अब्दुल सत्तार (तत्कालीन चैकीदार रहे दादाजी अब्दुल कादिर की जुबानी सुनी) कई रोचक जानकारी देते हैं। उनका कहना है कि 1975 में 90 वर्ष की उम्र में दिवंगत हुए उनके दादा अपनी जवानी में सम्पत्ति के तत्कालीन राजा अमीर अहमद मो- अमीर खान के चैकीदार रहे। वह बताते थे कि ब्रिटिश काल में होटल के ऊपरी हिस्से में अंग्रेज ठहरते थे, जबकि भूतल में भारतीयों को ठहराया जाता था। उन्हें फोर्थ क्लास कहा जाता था। इससे क्षुब्ध राजा जी ने भारतीयों को बराबरी का हक दिलाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत से यह सम्पत्ति खरीदी। तभी से इसके हर कमरे में भारतीय ठहरने लगे।

1965 में भारत सरकार गृह मंत्रालय के शत्रु सम्पत्ति अभिरक्षक विभाग के निर्देशों पर प्रशासन ने इसका अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद 10-09-1965 से 30-07-1967 तक शपूरजी को 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष के किराए पर यह सम्पत्ति दी गई। 31-07-67 से 07-01-97 तक श्रीकृष्ण लूथरा 15 हजार रुपये प्रतिवर्ष के किराए पर इसके स्वामी रहे। 08-01-97 से 10-2005 तक मैसर्स मैट्रोपोल हिल्स होटल प्राईवेट लिमिटेड 60 हजार रुपये प्रतिवर्ष के किराए पर इसके स्वामी रहे। वर्ष 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सम्पत्ति को दिल्ली निवासी राजा महमूदाबाद के सुपुर्द कर दिया गया। 2 अगस्त 2010 से शत्रु सम्पत्ति अभिरक्षक विभाग के निर्देश पर यह प्रशासन के संरक्षण में है।

 

ऐतिहासक भवनों को अग्निकांड का भी रहता है खतरा

 

ब्रिटिश कालीन शासकों का पसंदीदा स्थल होने के कारण नगर कई हैरिटेज ईमारतों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां के आधा दर्जन से अधिक चर्च, कई पब्लिक स्कूल, कलक्ट्रेट, राजभवन, पूर्व सचिवालय वर्तमान हाईकोर्ट समेत कई भवन हैरिटेज भवन के लिए प्रसिद्ध हैं। इनमें से कई भवन 13वीं सदी की प्रचलित गौथिक शैली में बने हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश बीते वर्षों में कई भवन आग की भेंट भी चढ़े।

हैरिटेज भवनों पर शोध कर रहे प्रो- एच एस भाकुनी इनकी संख्या 125 से अधिक बताते हैं। 1978 में नैनीताल क्लब में भीषण आग लगी थी। 1970 के दशक में पूर्व सचिवालय तथा वर्तमान हाईकोर्ट भवन का एक हिस्सा आग की भेंट चढ़ गया था। इसी दौरान अयारपाटा का प्रायरी लाॅज, इसी के निकट स्थित हटन काॅटेज हाल भी आग में नष्ट हुआ था, जिसे आज भी जली कोठी के नाम से जानते हैं।

इससे पूर्व 1960 के दशक में प्रसिद्ध पर्यावरण विद् जिम कार्बेट का भवन कैलाश व्यू, (हांडी भांडी), शेरवुड के निकट क्लिफ्टन जलकर खाक हुए थे। प्रसिद्ध वियानालाज वर्तमान धामपुर हाऊस भी आग की ही भेंट चढ़ा। 1992 में कुमाऊं विवि डीएसबी परिसर के भौतिक विज्ञान विभाग में आग लगी थी।

राज्य निर्माण के बाद सेंट जोसेफ की छत पर आग लगी थी] जिस पर काबू पा लिया गया था। 2003 में राजभवन के एक हिस्से में आग लगी थी। 5 अक्टूबर 2010 को कलक्ट्रेट भवन आग की भेंट चढ़ा था। नैनीताल के राजभवन की छत में निर्माण कार्य के दौरान 2 अप्रैल 2013 को अचानक आग लग गई। मां नंदा देवी महोत्सव के दौरान 14 सितम्बर 2013 की मध्य रात्रि में नयना देवी मंदिर परिसर से सटे गोवर्धन कीर्तन हाल में शाट सर्किट से आग लग गयी थी। इन घटनाओं से सबक लेते हुए हमें इनके संरक्षण का भी संकल्प लेना होगा। 26 नवम्बर 2013 को मेट्रोपोल के एक भवन का हिस्सा भी जलकर खाक हुआ था।