संस्कृति

मेरी कैलाश मानसरोवर यात्रा भाग 3

मेरी कैलाश मानसरोवर यात्रा 2012
श्रीमती सुधा खाती, नैनीताल -

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मानसरोवर से अगले दिन हमारी यात्रा दारचेन के लिए आरम्भ हुई।
तारबोची में यमद्वार तक यात्रा लैण्ड-क्रूजर से ही हुईं। दारचेन से सुबह हमने कैलाश पर्वत की पैदल परिक्रमा करनी थी। कैलाश पर्वत परिक्रमा में प्रथम दिन लगभग 12 किमी की यात्रा थी। चलने और सांस लेने में कुछ कठिनाई हो रही थी लेकिन परिक्रमा की जिज्ञासा तथा प्राकृतिक सौन्दर्य का आनन्द लेते हुए यात्रा सुगम प्रतीत होने लगी। सहपर्यटकों तथा सहयात्रियों के उत्साह ने सभी को यात्रा में आगे भी पैदल जाने के लिए प्रेरित किया। इस यात्रा में हमारे साथ लगभग 70 आयु वर्ग के बुजुर्ग भी थे जो बिना किसी कठिनाई के पैदल यात्रा कर रहे थे। इस पैदल मार्ग में हमें एक अभूतपूर्व दृश्य दिखायी दिया। कुछ तिब्बती पुरूष तथा महिलाऐं जमीन में पेट के बल लेटकर कैलाश पर्वत की परिक्रमा कर रहे थे। इनमें से एक महिला ने एक छोटे बच्चे को पीठ में बाँधा था और वह लेटकर ही परिक्रमा कर रही थी जो इनकी परमेश्वर के प्रति परम आस्था का प्रतीक है। इन्हें देखकर हम लोगों के उत्साह मेें भी वृद्धि हुई। यह पैदल मार्ग छोटे-छोटे कंकड़-पत्थरों से भरा था।
डेरापुक में रात्रि विश्राम किया। कैलाश पर्वत का सुन्दर दृश्य देखकर रास्ते की सारी थकान दूर हो गयी। इस स्थान को डोलमापास के नाम से जाना जाता है। यहाँ से 6 किमी की यात्रा घोडे़ द्वारा की। यह स्थान समुद्र तल से 18600 मीटर की ऊँचाई पर था। घोड़े से यात्रा करते समय वहाँ के स्थानीय लोगांेे के साथ परिचय हुआ जो पैदल ही यात्रियों के सामान को ढोकर 44 किमी की यात्रा को पूरा करते हैं। इनमें महिलाऐं एवं छोटे बच्चे भी यात्रियों के सामान तथा याक के साथ चल रहे थे। पर्यटकों पर ही इन सब लोगों का जीवनयापन निर्भर है। घोड़े से 6 किमी चलने के बाद की यात्रा हमने पैदल की। यहाँ से हमने नीचे की ओर उतरना प्रारम्भ किया। तत्पश्चात हमें गौरी कुण्ड के दर्शन हुए जो पहाडि़यों के बीच में बसा हुआ था। गौरी कुण्ड को Lack of compassion भी कहा जाता है। शिव पुराण में इसका उल्लेख है जहाँ माँ पार्वती को श्रीगणपति की पुत्र रूप में प्राप्ति हुई थी।
हमारा अगला पड़ाव झुथुलपुक था। अगली सुबह लगभग चार-पाँच किमी की पैदल यात्रा के दौरान मार्ग में हमें चट्टान में अंकित गौरी माँ और गणपति के पद चिन्हों के दर्शन हुए। यहाँ से हमारी यात्रा लैण्ड-क्रूजर के द्वारा प्रारम्भ हुई। पुनः मानसरोवर झील में स्नान का आनन्द लिया। श्रद्धा स्वरूप सभी यात्री अपने साथ मानसरोवर का जल लाये तथा शिवजी के प्रतीक के रूप में छोटे पत्थरों को एकत्रित कर अपने साथ लाये। चारों ओर एक विचित्र शान्ति और सन्नाटा था। वापस लौटने का समय आ रहा था। ऐसे सौन्दर्य और अनुभूति को लिए हम सभी खामोश थे। मानसरोवर और कैलाश पर्वत तथा वहाँ के प्राकृतिक सौन्दर्य  की यादों को दोहराते हुए सभी सहयात्री अपनी अनुभूतियों को पुनर्जीवित कर रहे थे। अपनी यात्रा की यादों को कैमरे में कैद किये सभी उल्लास से भरे अपने अनुभवों का आनन्द ले रहे थे। सोचा न था कि यह यात्रा इतनी आरामदायक और रोमांचक होगी। तत्पश्चात न्यूप्रयांग में रात्रि विश्राम के पश्चात् हमारी यात्रा पुनः अगले दिन प्रारम्भ हुई। सहयात्रियों के अनुसार यह यात्रा अविस्मरणीय, अवर्णनीय और आनन्दमयी थी। पुनः न्यालम में रात्रि विश्राम के पश्चात् खासा चैक पोस्ट पर आकर अपने पासपोर्ट तथा अन्य औपचारिकताऐं पूरा करने के पश्चात नेपाल के लिए रवाना हुए। वर्षा हो रही थी। 14 दिनों के बाद वापस लौटने पर यह एहसास हो रहा था जैसे कि हमसे कोई बहुमूल्य चीज पीछे छूट रही हो। न जाने कभी दोबारा वहाँ जाने का अवसर मिले या न मिले लेकिन वहाँ की यादें दिल और दिमाग में सदा रहेंगी जहाँ एक शायर के शब्दों में-खामोशियों में नशा था, सदाओं में जादू।
अपने देश में समय-समय पर आन्दोलनों तथा हड़तालों का दौर चलता रहता है जिससे देश का आर्थिक विकास रूक जाता है,वहीं दूसरी ओर तिब्बत में आर्थिक विकास तेजी से होते दिखायी दिया। इस विकास में चीनी सरकार का सहयोग है। तिब्बत के छोटे-छोटे कस्बे एक आधुनिक नगरों का स्वरूप लेते जा रहे हैं। बढ़ते हुए पर्यटन को देखते हुए यहाँ अच्छे शौचालयों के निर्माण की आवश्यकता है।
तिब्बती पुरूष, महिलाऐं और बच्चे बहुत परिश्रमी होते हैं। पुरूषों के साथ-साथ महिलाऐं भी सभी कार्यों को जैसे- दुकानदारी, श्रमिकों का कार्य, घरेलू कार्य एवं भेड़ों एवं याकों को चराना या यात्रियों के सामान को ढोने के कार्य को बड़े उत्साह से करती हैं। महिलाओं का परिधान एक लम्बा चोगानुमा वस्त्र है जो उन्हें ठण्ड से बचाता है।  भारतीय महिलाओं के द्वारा प्रयोग में आने वाली चूडि़याँ तथा बिन्दियाँ महिलाओं तथा बच्चों की विशेष पसन्द है। इशारों से बिन्दियाँ और चूडि़याँ मांगती हैं। हम इन बातों से अनभिज्ञ थे अगली यात्रा में जाने वाले लोग उपहार स्वरूप इन चीजों को अपने साथ अवश्य ले जायें। अपर्याप्त संसाधनों में स्वयं को ढालना तिब्बतियों की आदत में शामिल है। मिट्टी के घरों में रंग-बिरंगीं नक्काशी वहाँ की भवन निर्माण कला का विशेष आकर्षण है। गहरे लाल, नीले, पीले रंग उनकी आशावादी दृष्टिकोण के परिचायक हैं।
अगले दिन हम लोग काठमाण्डू पहुँचे। वहाँ पहुँचनेे पर पता चला कि दूसरे दिन सावन का तीसरा सोमवार तथा नागपंचमी का पर्व है। अतः हम लोग भी दूसरे दिन प्रातःकाल पशुपतिनाथ दर्शन के लिए कैलाश मानसरोवर से लाये हुए जल को चढ़ाने के लिए गये। मंदिर में बहुत भीड़ होने के बावजूद हम सभी कैलाश मानसरोवर यात्रियों को पुनः श्री पशुपतिनाथ के दर्शन हुए।
नेपाल के मार्ग से की जाने वाली यात्रा से पर्यटकों का तिब्बती संस्कृति विकास, भौगोलिक परिस्थिति तथा वहाँ के जन जीवन के विषय में पूर्ण जानकारी मिलती है जो कुमाऊँ क्षेत्र से यात्रा करने पर शायद न मिलती हो। अपर्याप्त  संसाधनों में स्वयं को ढालना ये तिब्बतियों की आदत में शामिल है।
तिब्बत में चीनी सरकार द्वारा बिजली की व्यवस्था सौर ऊर्जा द्वारा की गयी है। स्थान-स्थान पर सोलर प्लांट लगाये गये हैं। जिनसे समस्त शहर को सायंकाल से अर्धरात्रि तक बिजली उपलब्ध करायी जाती है। यह एक बड़ा प्रयास है। लगभग सभी होटलों में सौर ऊर्जा का प्रयोग होता है। इन प्रयासों को देखकर लगता है कि निकट भविष्य में इस क्षेत्र का आर्थिक विकास द्रुतगति से होगा। चीन द्वारा निर्मित सामान का प्रयोग स्थानीय लोग करते हैं। पर्यटकों के लिए भी यह एक आकर्षण का केन्द्र है। इतनी ऊँचाई पर भी दूरसंचार व्यवस्था व्यवस्थित है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी तिब्बत प्रयासरत है। छोटे बच्चे विद्यालय जाते हुए दिखायी दिये। अध्ययन के अतिरिक्त उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है। भारतीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था है। वहाँ भोजन तो नहीं लेकिन बच्चे विद्यालय से काफी मात्रा में अण्डे ले जाते हुए दिखायी दिये।
कैलाश मानसरोवर की यात्रा वास्तव में अद्भुत है। प्रत्येक यात्री के हृदय में वहाँ तक पहुँचने की लालसा आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। हर कोई वहाँ की यात्रा कर सकता है, केवल प्रबल इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। दुनिया के हर वस्तु में सौंदर्य है। यह सारा ब्रह्माण्ड सौन्दर्य से परिपूर्ण है, बस थोड़ा रूककर देखने की आवश्यकता है- क्योंकि सौन्दर्य ही सत्य है, सत्य ही सुन्दर है और सुन्दर ही शिव है।
Beauty is truth, truth beauty, that is all:
Ye know on earth and all ye need to know::
दुनियाँ की हर सुन्दर वस्तु आनन्द देती है, यही आनन्द हमें नयी ऊर्जा प्रदान करता है। प्रसिद्ध अंगे्रजी कवि कीट्स ने सत्य कहा था-
A thing of beauty is a joy forever:
Its loveliness increases; it will never Pass into nothingness::