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रिसर्च एनालिसिस देश में एक साथ चुनाव कराने के पक्ष मैं, पीएम को सौपी रिपोर्ट

नई दिल्ली- देश में लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी हर राजनैतिक दल कर रहा है. इसी तैयारी के बीच पीएम मोदी एक देश एक चुनाव के पक्ष में कई बार बयान दे चुके हैं. पीएम मोदी का कहना है कि बार-बार चुनाव होने की वजह से देश को काफी नुकसान होता है और विकास की रफ्तार भी कम होती है. इस संबंध में भाजपा ने 36 पेज की रिपोर्ट पीएम मोदी के इस सुझाव का समर्थन करते हुए पेश की है. 23 मार्च को पेश की गई रिपोर्ट में नीति आयोग के पेपर का हवाला देते हुए कहा गया है कि दो चरण में चुनाव होने चाहिए. बताया जाता है कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में आरएसएस से जुड़े रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी ग्रुप ने इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च के साथ मिलकर एक सेमिनार कराया था. इस सेमिनार में देशभर के 16 विश्वविद्यालय और 29 एकेडमी के मेंबर्स शामिल हुए थे. इन्होंने एक देश-एक चुनाव पर रिसर्च पेपर प्रेजेंट किए थे. इसी रिसर्च पेपर का एनालिसिस कर एक रिपोर्ट तैयार की गई है. यही रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में लोकसभा के साथ तकरीबन आधी विधान सभाओं का चुनाव एक साथ हो सकता है जबकि बाकी विधान सभाओं का चुनाव 2022 में हो सकता है. यह रिपोर्ट दो दिन के मंथन के बाद सामने आई है, जोकि इस वर्ष जनवरी माह में हुई थी. रिपोर्ट में मध्यावधि चुनाव और उपचुनाव को खारिज कर दिया है. इसमें कहा गया है कि अगर देश में एक साथ चुनाव होते हैं, तो अविश्वास प्रस्ताव और सदन भंग करने जैसे मामलों को रोकने में भी मदद मिलेगी. साथ ही कहा गया है कि 'एक देश-एक चुनाव' सिस्टम के तहत सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाते हुए विपक्षी पार्टियों को अगली सरकार के समर्थन में विश्वास प्रस्ताव भी लाना जरूरी होगा. ऐसे में समय से पहले सदन को भंग होने से रोका जा सकता है. रिपोर्ट की सबसे खास सिफारिश उपचुनाव को भी बंद कराने की सिफारिश की गई है. इसमें कहा गया है कि अगर किसी कारण से कोई सीट खाली होती है, तो उपचुनाव की जगह दूसरे नंबर पर रहने वाले कैंडिडेट को चुना जा सकता है. एक साथ चुनाव होने में 4,500 करोड़ खर्च होंगे.