विज्ञान जगत

शतावरी

शतावरी
शतावरी को संस्कृत  भाषा में नारायणी, शतपदी, रातवीर्या, शतमूला भी कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Asparagus racemosum है। यह Liliaceae कुल के अन्तर्गत आता है। इसका अंग्रेजी नाम Asparagus है।
इसकी कंटक युक्त झाड़ीनुमा आरोहिणी लता होती है। इसकी जड़ में सफेद और लम्बे कन्द होते हैं। यह लम्बे कन्द ही बाजार में शतावरी के नाम से बिकते हैं। फल मटर के आकार के कठोर गठली के रूप में होते हैं। जो पकने पर लाल हो जाते हैं।
कुछ औषधीय प्रयोग
1. शतावरी की खीर में घी मिलाकर खाने से अनिद्रा मिटती है।
2. दूध के साथ इसके 10 ग्राम चूर्ण की फंकी देने से स्त्री का दूध बढ़ता है।
3. शतावरी के 20 ग्राम पत्तों का कल्क बनाकर दुगने घी में तलकर अच्छी तरह पीसकर, व्रणों पर लगाते रहने से पुराने से पुराना व्रण भी भर जाता है।
4. इसकी जड़ का रस दूध में मिलाकर देने से विष की शान्ति होती है।
5. 5-10 ग्राम शतावरी घृत को नित्य प्रयोग करने से वीर्य बढ़ता है।
6. शतावरी और गोखरू का शर्बत मिलाकर पीने से मूत्र विकार मिट जाता है।
7. शतावरी के घृत की मालिश करने निर्बलता मिटती है।
8. शतावरी की ताजी जड़ को कूट, रस निकाल उसमें बराबर तिल का तेल डालकर उबाल लें। इस तेल की सिर पर मालिश करने से मस्तिष्क पीड़ा मिटती है।