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शाह ने कर्नाटक में शुरू किया अ-हिंदू (A-Hindu) उच्‍चारण का प्रयोग

नई दिल्ली- कर्नाटक में विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही लिंगायत मुद्दे पर सियासत गर्मा गई है. राज्‍य की कांग्रेस सरकार ने लिंगायतों को हिंदुओं से अलग अल्‍पसंख्‍यक समुदाय का दर्जा देने की घोषणा की है. इस समुदाय को पिछले तीन दशकों से बीजेपी का वोटबैंक माना जाता है. राजनीतिक विश्‍लेषकों के मुताबिक बीजेपी के वोटबैंक को तोड़ने के लिए कांग्रेस ने इस दांव को चला है. हालांकि इन सबके बीच इस वक्‍त कर्नाटक की सियासत में लिंगायत से भी ज्‍यादा 'AHINDA' कार्ड की चर्चा हो रही है. बीजेपी और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की तरफ से इस कार्ड का चुनाव रैलियों में जमकर इस्‍तेमाल किया जा रहा है. बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस के अहिंदा कार्ड की काट के लिए अ-हिंदू (A-Hindu) उच्‍चारण का प्रयोग शुरू किया है.

'AHINDA' कार्ड

दरअसल कहा जा रहा है कि सीएम सिद्दारमैया ने हिंदू अल्‍पसंख्‍यक, अल्‍पसंख्‍यक, बैकवर्ड और दलितों को मिलाकर इस 'अहिंदा' कार्ड को बनाया है. अंग्रेजी वर्णमाला के मुताबिक इसका उच्‍चारण 'AHINDA' हो जाता है. इसके पीछे कारण यह है कि कर्नाटक की सियासत लिंगायत(17 प्रतिशत) और वोक्‍कालिगा(12 प्रतिशत) समुदायों के बीच घूमती रही है. लिंगायतों को बीजेपी और वोक्‍कालिगा समुदाय को एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस का समर्थक माना जाता है. जबकि खुद सिद्दारमैया पिछड़ी कुरुबा जाति से ताल्‍लुक रखते हैं. इसलिए उन्‍होंने अपना वोटबैंक बनाने के लिए इस जातिगत समीकरण को बनाया है.बीजेपी भी इस दांव को समझ रही है इसलिए बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस के अहिंदा कार्ड की काट के लिए अ-हिंदू (A-Hindu) उच्‍चारण का प्रयोग शुरू किया है. बीजेपी इसके जरिये सिद्दारमैया सरकार को हिंदुओं का विरोधी बताती है. अमित शाह ने पिछले दिनों मध्‍य कर्नाटक में कहा कि मुख्‍यमंत्री 'अहिंदा' नहीं 'गैर-हिंदू यानी अ-हिंदू' (Anti-Hindu) हैं. इस लिहाज से स्‍पष्‍ट है कि दोनों ही दलों के लिए यह कार्ड इस चुनाव में बेहद उपयोगी साबित होने जा रहा है.

लिंगायत समुदाय

इससे पहले राज्य मंत्रिमंडल ने 19 मार्च को हिंदू धर्म के लिंगायत पंथ को एक अलग धर्म के रूप में मान्यता देने पर सहमति जताई. राज्य के कानून मंत्री टीबी जयचंद्र ने यह जानकारी दी. जयचंद्र ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग की अनुशंसा पर, राज्य मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से लिंगायत और वीरशैव लिंगायत को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने का फैसला किया है."