दिशा तथा दशा

शून्य बढ़ाने के फेर में-शिक्षा और चिकित्सा ढेर

शून्य बढ़ाने के फेर में-शिक्षा और चिकित्सा ढेर
शून्य एक बड़ा ही महत्वपूर्ण अंक है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि किसी ग्रहण की तरह समाज के लिए दो महत्वपूर्ण भागों में लग गया है। इस कारण आज विद्यार्थी हो या मरीज दोनों ही संघर्ष कर रहे हैं। दोनों में ही सेवा और मानव कल्याण का भाव शून्य के चक्कर काटता दिख रहा है और गुरूत्वाकर्षण का केन्द्र भी शून्य के केन्द्र में स्थित है। दोनों ही कर्मों को जहाँ ईश्वर तुल्य सम्मान प्राप्त था, आज विवादों और राजनीति के कारण अपने स्तर का तुष्ठीकरण करने में लगे हुए हैं। अपवाद हर जगह होते हैं लेकिन संख्या इतनी कम है कि समाज के लिए पर्याप्त नहीं है। आज के समय में आमतौर पर जो देखने को मिलता है, भविष्य शिक्षा के लिए, और स्वास्थ्य, चिकित्सा के लिए संघर्ष कर रहा है। सम्पन्नता ही इन मूलभूत अधिकारों को पाने की एक मात्र पात्रता रह गयी है। इस क्षेत्र के चाणक्यों द्वारा इस खूबी के साथ इसका व्यवसायीकरण कर दिया है कि डब्बे की हवा भी अपने उत्पाद के मूल्य से कहीं अधिक में बिक जा रही है। शून्य के फेर में ये चमकती हुई आकाश गंगाएँ  ऐसे ब्लैक होल में समाती जा रही हैं जो धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो देगी।