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सरकारी स्कूल भी गुणवत्तापरक शिक्षा की ओर अग्रसर

नीरज जोशी, नैनीताल- सरकारी स्कूलों में जहाँ हमेशा से बच्चो को हीन भाव की दृष्टि से देखा जाता है, की यह सरकारी स्कूल का विद्यार्थी है। और दूसरी ओर लूट करने वाले उन प्राइवेट स्कूलों के बच्चो को समाज मे अलग ही नजरो से देखा जाता है कि यह कान्वेंट का बच्चा है। आपको बता दे अब वक्त फिर बदल रहा है. सरकारी स्कूलों में पड़ने वाले बच्चो को शिक्षा के साथ खेल मनोरंजन और संस्कृति के लिए भी आगे देखा गया है. इसके चलते अब सभी सरकारी स्कूलों में नवाचार के माध्यम से ट्रेंड अध्यापक बच्चो को पड़ा रहे है। गौरतलब है कि आजकल अभिवावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के लिए आतुर रहते है, लेकिन भवाली के प्राइमरी स्कूल तिरछाखेत में पिछले 22 वर्ष से कार्यरत शिक्षक कैलाश शर्मा का मानना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का ट्रेंड वापस आने वाला है. सरकारी स्कूलो में पढ़ाने ने वाले शिक्षकों मे योग्यता की कोई कमी नही है. उनका कहना है, नवाचार के माध्यम से जहा वर्तमान शिक्षकों को ट्रेंड किया जा रहा है, साथ ही सभी बच्चो को स्कूल ड्रेस ,भोजन एवं किताबे भी दी जा रही है। कि कोई भी बच्चा गरीबी के चलते स्कूल आने में असमर्थ न रहे। बताया आज प्राइवेट स्कूलों की लूट से भी अभिभावक परेशान है। लेकिन समाज को देखकर हर कोई अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूलों में भेज रहा है लोग भूल रहे है। पूर्व समय में सभी सरकारी स्कूलों में पड़ा करते थे जो आज उच्य पदों पर बैठे हुवे है। कुछ समय पहले खुले प्राइवेट स्कूलों ने अभिभावकों को अपनी ओर आकर्षित सा कर लिया है। वो वक्त दूर नही जब माता पिता अपने बच्चो को सरकारी स्कूलों में दाखिला कराएंगे।