विज्ञान जगत

सहिजन (सहजन)

सहिजन (सहजन)
सहिजन के वृक्ष हिमालय की तराई में जंगली अवस्था में बहुलता से पाये जाते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Moringa oleifera  है। यह Moringaceae  कुल के अन्तर्गत आता है। इसका अंग्रेजी नाम Horse radish tree or drum stick plant   है। इसको संस्कृत  में शोभांजन, शिग्रु, तीक्ष्णगंधा नाम से भी जाना जाता है।
सहिजन के छोटे या मध्यम आकार के वृक्ष होते हैं। छाल और काष्ठ मृदु होती है, जिससे जब वृक्ष फलियों से लद जाते हैं तो डालियां अक्सर टूट जाती हैं। फलियां 6-18 इंच लम्बी 6 शिराओं से युक्त और धूसर होती हैं। मूल में एक सक्रिय प्रतिजीव तत्व टेरिगोस्पर्मिन होता है जो अनेक जीवाणुओं एवं फंगस की वृद्धि  को रोकता है। पत्रस्वरस रस में भी जीवाणु नाशक क्षमता पाई जाती है। बीजों के दबाने से एक स्थिर तेल निकलता है जिसे बेन या बेहन तेल के नाम से जाना जाता है।
इसकी फली हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैगनीशियम, विटामिन-ए, बी, सी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
कुछ औषधीय प्रयोग
1. इसकी पत्तियों का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ मिलता है।
2. मोच इत्यादि आने पर सहिजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों के तेल में डालकर आंच पर पकाए और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है।
3. सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु रोग में आराम मिलता है।
4. इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक होता है।
5. इसके ताजे पत्तों की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।
6. सहजन के पत्रों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उल्टी दस्त भी रोकता है।
7. इसके पत्तियों का रस मोटापा कम करता है।
8. इसकी छाल के काठे से कुल्ला करने पर दांतों केे कीड़े नष्ट होते हैं।
9. इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी मे घुलकर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है बल्कि पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।
10. सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो तो सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप ले, इससे आराम मिलेगा।
11. इसमें कैल्शियम की प्रचुर मात्रा होने के कारण यह हडिडयों को मजबूत करता है