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सांपों की अद्भुद दुनिया

सांप एक ऐसा शब्द है जो कि शरीर को सरसराहट के साथ अजीब सी उत्तेजना से भर देता है। लेकिन सांप के बारे में जानने से पता चलता है कि उसकी दुनिया रहस्यों व रोचक तथ्यों से भरी पड़ी है। सांप के बारे में जानने से पता चलता है कि सांप शीत रक्त यानि ठण्डे रक्त का प्राणी है। यह अपने शरीर का तापमान स्वयं नियंत्रित नहीं कर सकता है और ना ही अपने शरीर का तापमान स्वयं नियंत्रित करने के लिये भोजन पर निर्भर करता है।
सांप धर्म, आस्था, संस्ड्डति, कहानी, कविताओं सभी का हिस्सा रहा है। हिन्दू धर्म में तो इसको विशेष स्थान प्राप्त है। सांप सरीसृप वर्ग का प्राणी है और यह जल तथा थल दोनों में वास करता है। सांप के पैर नहीं होते हैं और ना ही इनकी पलकें होती हैं। इनकी विश्व में लगभग 3000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं और यह भोजन को निगल कर खाते हैं ना कि चबा कर। दुनियाँ में हर सांप जहरीला नहीं होता है। कुल प्रजातियों में से सिर्फ 150 जाति के सांप ही जहरीले होते हैं। ऐसे ही भारत में पाये जाने वाले 216 जातियों में से सिर्फ 53 प्रकार के सांप ही जहरीले होते हैं। सांप के काटने से मरने वालों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण अंधविश्वास, टोना, टोटका व भय है। अजगरों के शरीर में पाए जाने वाले पाचक रस इतने शक्तिशाली होते हैं कि खुर, नाखुन और हड्डियां तक पचा देते हैं। विश्व का सबसे लम्बा सांप रैटिकुलेटेड पेथोन यानि जालीदार अजगर है जो कि 10 मीटर तक लम्बा व 120 किलो के वजन का होता है। विश्व का सबसे छोटा थे्रड स्नेक है जो कि 10 से 12 सेमी. का होता है। भारत में पाई जाने वाली 4 प्रजातियां कोबरा, करैत, धोणस यानि रसल वाइपर और अफई यानि सौ स्केल वाइपर है। सांप के विष से कई दवाईयां बनाई जाती हैं। नाइलोक्सीन, काकोक्सीन जैसी महत्वपूर्ण दवाईयां हैं। सांप का विष तंत्रीका तंत्र, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग व होम्योपैथिक आदि की दवाईयां बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। कई सांपों का जहर पांच लाख प्रति ग्राम तक बिकता है। दुनिया का सबसे विषैला सांप आस्ट्रेलिया में पाये जाने वाला टाइगर स्नेक है जो कि एक ही दिन में लगभग 400 व्यक्तियों को काटकर मार सकता है। सांपों का मनुष्य के जीवन में कितना हस्तक्षेप है इसका पता खेलों में लोकप्रिय खेल सांप सीढ़ी से लगाया जा सकता है। आज भी यह एक लोकप्रिय खेल है।