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सीमांत क्षेत्रों में उत्सव

प्रो॰ अजय सिंह रावत, नैनीताल -
प्रत्येक वर्ष मुनस्यारी के सीमावर्ती क्षेत्र में नवंबर माह के समय हलचल सी शुरू हो जाती है जहाँ कृषि, बागवानी एवं औषधीय पौधों पर नवीनतम ज्ञान को लोगों के मध्य प्रसार करने हेतु प्रदर्शनियों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि विद्या-विषयक डाॅ देवराज सिंह पांगती द्वारा 9 नवंबर को किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ”उत्तराखंड जैव विविधता में बहुत समृद्ध है, यहाँ 701 औषधीय पौंधे, 175 जंगली फल, 359 जंगली खाद्य की प्रजातियाँ तथा साथ ही धान की 301 प्रजातियाँ, गेहूं की 15 एवं मक्का की 8 प्रजातियाँ देखने को मिलती हैं, जिन्हें हमें संरक्षित करके रखना है।“ उन्होंने जोड़ते हुए कहा, ”पिछले दो दशकों से अनियोजित औद्योगिकीकरण, जनसंख्या वृद्धि के कारण एवं कुमाऊं में ग्लोबल वार्मिंग से वातावरण में प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि इसने जलवायु को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वनों की कटाई एवं विभिन्न प्रयोजनों हेतु जीवाश्म ईंधन के उपयोग में वृद्धि से इस समस्या की बड़े स्तर पर बढ़ोत्तरी हुई है। कुमाऊँ में ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को प्रत्यक्ष महसूस किया जा सकता है तथा पिछले एक दशक में ग्लेशियरों का सिकुड़ना, जलवायु में बुरे परिवर्तन का सूचक है।“
इस के साथ-साथ, विभिन्न क्षेत्रों के संस्थानों एवं विशेषज्ञों द्वारा कार्यशालाओं, सेमिनार तथा वार्ता सत्रों का आयोजन किया गया। सायंकाल के समय देवभूमि जागरण समिति काकारी, झूलाघाट, महिला मंगल दल एवं मारथमा ग्राम ज्योति पब्लिक स्कूल, केमचैरा से स्थानीय ग्रामीणों और सदस्यों द्वारा सांस्ड्डतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सांस्ड्डतिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि - सरकारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बेरीनाग के प्राचार्य पंकज उप्रेती ने स्थानीय कलाकारों और छात्रों के प्रयासों की प्रशंसा की और कहा, ”मैं अचम्भित हूँ कि बिना किसी सुविधाओं या शिक्षकों के यहाँ की स्थानीय महिलाओं और छात्रों ने कितना बढि़या प्रदर्शन किया है। मुझे लगता है आप लोग प्रड्डति के इतने समीप रहते हैं कि आपमें संगीत, कला और नृत्य अपने आप देखने को मिलता है।“
संयुक्त राज्य अमेरिका के जाॅर्जिया से पर्यटन के प्रख्यात विशेषज्ञ एवं आगंतुक पेगी वालेस ने कहा, ” मुनस्यारी एवं पश्चिमी तिब्बत की सीमा पर स्थित इसके अन्य क्षेत्र, विश्व के सबसे सुंदर क्षेत्रों में से एक हैं। बर्फ से ढकी पंचाचूली जैसी विशाल चोटियाँ, तिब्बत को जाने वाले रुखड़ रास्ते, प्रफुल्लित धारायें और नदियां, हरे-भरे घास के मैदान, दलदली झीलें, जानवर, जंगली फूल एवं जड़ी बूटियां इस क्षेत्र की अद्वितीय विशेषता हैं।“ वर्तमान में यह पर्यटकों के लिए स्वर्ग से कम कुछ नहीं है क्योंकि अब ज्यादातर पर्यटक पुराने हिल स्टेशन जैसे नैनीताल और मसूरी नहीं जाते, जो गर्मियों में गाडि़यों की भीड़ से एकदम भर सा जाता है। भारतीय हिमालय का मणि- मुनस्यारी, प्राकृति प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य स्थान बन गया है जिसे पूरब के स्विट्जरलैंड के रूप में भी प्रसिद्ध मिल गयी है। मुनस्यारी पर्यटकों को अद्वितीय वातावरण का आनंद लेने हेतु अवसर प्रदान करता है। यहाँ से कई ग्लेशियरों के लिए ट्रैक की शुरुआत होती है जैसे मिलम ग्लेशियर, खालिया टाॅप जैसे बुग्याल, उच्च हिमालय क्षेत्र, हाॅट स्प्रिंग्स और पवित्र धार्मिक स्थल आदि।
यह कार्यक्रम तीन दिन तक चला। जिसमें मुनस्यारी में बसने वाले उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव डाॅ॰ आर एस टोलिया ने कहा, ”स्थायी कृषि एवं पर्यटन पर केंद्रित 62वाँ वार्षिक हरी प्रदर्शनी में अधिक से अधिक लोगों और पर्यटकों ने भाग लिया। यह वार्षिक प्रदर्शनी क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित होती है जिसका नाम क्षेत्र के एक महान स्वतंत्रता सेनानी हरी जनपांगी के नाम पर पड़ा।“
हाल ही में डाॅ आर एस टोलिया जी की मदद से, एक प्रसिद्ध दवा कंपनी-मेसर्स डाबर ने सिरमोली गाॅव में महेश ताल के समीप एक हर्बल पार्क की स्थापना की है। इस अवसर पर डाॅ एन एस पांगती ने कहा कि ”हरी प्रदर्शनी एवं सिरमोली गाँव में स्थापित हर्बल पार्क स्थानीय किसानों को हर्बल और उच्च हिमालयी कृषि एवं बागवानी को अपनाने हेतु प्रोत्साहित करता रहेगा।“