विचार विमर्श

सूर्य-परिक्रमा की गति कब तेज - रात में या दिन में?

सूर्य-परिक्रमा की गति कब तेज - रात में या दिन में?
पेरिस के अखबारों में एक विज्ञापन छपा, जिसमें 25 सेंटिम में बिना किसी थकावट के यात्रा की सस्ती विधि बताने का वादा किया गया था। कई लोगों ने विश्वास कर के उक्त रकम भेज दी। जवाब में उन्हें पत्र मिला, जिसका आशय इस प्रकार था:
‘‘भाइयो, आराम से बिस्तर में बैठे रहिये। याद रखें कि हमारी पृथ्वी घूमती है। पेरिस में (49-वें अक्षांश पर) आप हर दिन 25000 Km  से अधिक दूरी तय करते हैं। और यदि आप सुरम्य दृश्यों को पसंद करते हैं, तो खिड़की के पर्दे हटा दें और तारक - मंडित आकाश की वाह -वाही किया करें। ’’

बाद में इस धंधे के अपराधी पर जब ठगी का मुकदमा चलाया गया, उसने फैसला सुन कर जुर्माना अदा कर दिया, और जैसा कहते हैं, नाटकीय मुद्रा में खड़ा हो कर गौरव से गैलीली के प्रसिð शब्द दुहराने लगा:
- जो भी कहें, वह घूमती है!
अभियुक्त एक तरह से सही भी था, क्योंकि हर पृथ्वीवासी पृथ्वी की धुरी के चारों ओर घूम कर ही ‘‘यात्रा’’ नहीं करता। वह कहीं और अधिक वेग से पृथ्वी के साथ सूर्य की परिक्रमा भी करता है। अपने सभी वासियों के साथ हमारा ग्रह अपने अक्ष के गिर्द घूर्णन ही नहीं करता, वह हर सेकण्ड 30 Km की दूरी व्योम में भी तय करता है।
इस संदर्भ में एक रोचक प्रश्न उठाया जा सकता हैः कब हम अधिक तेजी से सूरज की परिक्रमा करते हैं - दिन मेें या रात में?
प्रश्न चकराने वाला है। पृथ्वी पर तो हमेशा ही एक तरफ दिन रहता है और एक तरफ रात। फिर इस प्रश्न का अर्थ क्या है? शायद कुछ भी नहीं।
पर ऐसी बात नहीं है। यह तो नहीं पूछा जा रहा है कि कब सारी पृथ्वी तेज या धीमी चलती है। प्रश्न है कि कब हम, पृथ्वी पर जीने वाले लोग, तेजी से तारों के बीच भ्रमण करते हैं और यह प्रश्न निरर्थक बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। सौर - मंडल में हमारी गति द्विविध है: हम सूर्य की परिक्रमा करते हैं और साथ ही पृथ्वी की धुरी का भी चक्कर लगाते हैं। दोनों गतियों के योग का परिणाम हमेशा एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम पृथ्वी के किस अर्ध में हैं-रात वाले में या दिन वाले में।
आधी रात को पृथ्वी की घूर्णन गति उसकी अग्रगामी गति के साथ जुड़ जाती है और दोपहर दिन में इसके विपरीत उससे घट जाती है। अर्थात् आधी रात को हम सौर-मंडल में दोपहर की अपेक्षा अधिक तेजी से गतिमान रहते हैं।
चूंकि विष्वक (विषुवत रेखा) के बिंदु एक सेकेंड में लगभग आधा किलोमीटर भागते हैं, विष्वक कटि पर अर्धरात्रि और दोपहर की गतियों में पूरे एक किलोमीटर प्रति सेकेंड का अन्तर है। ज्यामिति से परिचित लोग सरलतापूर्वक आंकलन कर सकते हैं कि लेनिनग्राद के लिये (जो 60-वें अक्षांश पर है) यह अंतर दुगुना कम हैः आधी रात को लेनिनग्राद के निवासी सौर-मंडल में प्रति सेकेंड आधा किलोमीटर अधिक तय करते हैं, बनिस्बत कि दिन में।