दिशा तथा दशा

हौसलों की ऊँची उड़ान

हौसलों की ऊँची उड़ान
प्राकृतिक आपदाओं का दंश झेलना लगता है इस प्रदेश की नियति बनता जा रहा है। कभी भारी वर्षा, कभी आपदा, भूस्खलन, इन सब ने विकास की गति के पहिये को इतना धीमा कर दिया है कि प्रदेश विकास की दौड़ में पिछड़ने लग गया है। पिछले वर्षाें की आपदा का दंश यहां के क्षेत्रवासी अभी तक झेल रहे हैं और सरकारी मदद का हाल ये है कि जिसको मदद की दरकार है वह नियम के आगे लाचार है। लेकिन सोच व कार्य करने की अगर शक्ति हो तो बड़ी से बड़ी बाधाऐं भी छोटी लगने लगती हैं और सरकारी मदद को तरसने के बजाय बड़े परिवर्तन आ सकते हैं। ऐसा ही कुछ पिछले वर्ष प्रदेश में आई भीषण आपदा के बाद प्रभावित गांवों के हाल देखने के बाद एक इच्छा शक्ति ने परिवर्तन की लहर को खड़ा कर दिया। मुंबई में फिल्म निर्देशक का कार्य करने वाली उत्तराखण्ड की निवासी बेला नेगी ने प्राकृतिक आपदा का हाल देखने के बाद क्षेत्र के विकास को पुर्नजीवित करने का जो बीड़ा उठाया वह आज एक साल बाद अपना स्वरूप दिखाने लगा है। मुंबई में पंजीकृत उनकी संस्था लीफ बर्ड फाउन्डेशन द्वारा आपदा ग्रस्त गांवों के लोगों की जिंदगी को ढर्रे पर लाने हेतु दीर्घाकालिक योजना बनायी है। बेला नेगी एवं उनकी टीम द्वारा इस क्षेत्र में प्रोजेक्ट रिगांल शुरू किया है। जिसके तहत बांस उत्पादन कर बांस एवं रिंगाल के उत्पाद तैयार कर उन्हें रोजगार के माध्यम से जोड़ना मुख्य उद्देश्य है। बागेश्वर जिले के सुडिंग व चमोली के सुनौली गाँव में इसी कड़ी में करीब 30 हजार पौधे बांस व रिंगाल के रोपे गये हैं। रि-बिल्ड उत्तराखण्ड नाम से फेसबुक पेज बनाकर आपदा के बाद से ही बेला नेगी व उनकी टीम सक्रिय रूप से उत्तराखण्ड व यहां के मुद्दों से सरोकार रखने वाले लोगों से संपर्क बनाकर अपना योगदान दे रही हैं। आपदा के तुरन्त बाद फौरी राहत के रूप में स्वतः संसाधनों व मदद से एकत्रित धन के माध्यम से टैंट आदि खरीद कर धारचूला व मुन्स्यारी के आपदा पीडि़तों को वितरित किये। आज बेला नेगी व उनकी टीम के द्वारा स्थापित फाउन्डेशन बागेश्वर जिले के वाछम गांव, तरसाली गांव, सूडिंग गांव व चमोली जिले के हिन्दोली, नौली व सोनोली गांवों में आजीविका व शिक्षा परक व रोजगार परक कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र के पुनर्निर्माण में अपना योगदान दे कर एक मिसाल कायम कर रही है कि अगर हौसले व इरादे बुलन्द हों तो कितनी भी बड़ी आपदाऐं क्यों न आऐं, राह निकल ही जाती है। किसी शयर ने कहा है -
‘‘मंजिल उनको मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है
अरे पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों में उड़ान होती है।’’