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‘मेरे गुरूदेव’ बाबा नीब करौरी ‘महाराज’ भाग 1

                 ‘मेरे गुरूदेव’
                 बाबा नीब करौरी ‘महाराज’
गतांक से आगे

अनिल पंत, नैनीताल-
महाराज जी के भक्तों की संस्मरण कथायें पिछले अंकों में आप पढ़ चुके हैं। इस अंक में महाराज जी के परम भक्त कथावाचाक व्यास जी जो प्रतिवर्ष श्रावण मास में नैनीताल परमाशिवलाल साह धर्मशाला में कथा वाचन के संस्करण प्रकाशित किये जा रहे हैं।
महाराज अपने भक्तों को कभी-कभी अपना असली रूप दिखा दिया करते थे। श्री शंकर प्रसाद व्यास जी बताते हैं कि एक दिन उन्होंने महाराज जी से कहा कि मैं हनुमान जी की कथा बहुत सुना चुका हूँ पर मुझे अभी तक हनुमान जी के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो पाये हैं। वे बोले, ‘‘वे बोले उनके दर्शन बर्दास्त कर पायेगा?’’ इतना कहकर महाराज मौन हो गये और उसी रात को एकाएक मेरी नींद खुली। अर्धरात्रि का समय होगा मैं लघु शंका हेतु कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर आ ही रहा था कि देखता हूँ सामने कसक भूधराकार शरीर वाली आकृति खड़ी थी। मैं उस दृश्य को देखकर भयभीत हो गया। मैंने तुरन्त दरवाजा बन्द कर किया और अपने बिस्तर में जा गिरा। इसके बाद महाराज जी ने आकर मेरे सिर पर हाथ फेरा और पूछा, ‘‘तबियत ठीक है।’’ मैं स्वस्थ्य हो गया और महाराज को नमन करने लगा। इस तरह मुझे महाराज जी ने हनुमान जी के साक्षात दर्शन करा दिये। इसी तरह स्वर्गीय देवी दत्त जोशी जी प्रधानाचार्य रा0 इ0 कालेज, नैनीताल के कुमाऊँ लाज बिड़ला विद्या मन्दिर के पास निवास करते थे और महाराज के परम भक्तों मेें से थे। वे प्रतिदिन ब्रम्ह मुहुर्त में हनुमानगड़ मन्दिर दर्शन हेतु जाया करते थे। एक दिन ब्रम्हमुहुर्त में जब वे सीड़ी से ऊपर राम मन्दिर को जा रहे थे उन्होंने महाराज जी को साक्षात धर्नुधारी रामचन्द्र जी के रूप में देखा क्षण भर पश्चात् उन्हें महाराज मुस्कुराते हुए दिखे। अनायास उनके मुख से निकल गया महाराज मैं आपको पहचान गया हूँ। आप वास्तव में राम के अवतार हैं। अब मैं यह रहस्य सबको बताऊँगा। महाराज ने अपने होंठो पर उँगली रखकर ऐसा करने से मना किया पर जोशी जी नहीं माने इस घटना के बाद से आप कुछ विक्षिप्त से रहने लगे। आप अच्छे संगीतज्ञ थे तथा मन्दिर में महाराज को सुन्दर-सुन्दर भजन सुनाया करते थे। महाराज की कृपा से उनके पुत्र श्री ललित जोशी जी काफी समय तक बिड़ला मन्दिर में सेवारत रहे और संगीत के अच्छे ज्ञाता रहे । स्व0 श्री ललित जी के पुत्र तथा पुत्रिया आज भी नैनीताल में निवास करते हैं और महाराज के परम भक्तों में हैं।
क्रमशः