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‘मेरे गुरूदेव’ बाबा नीब करौरी ‘महाराज’ भाग 12

अनिल पंत, नैनीताल -
त्रिकालदर्शी महाराज अक्सर अपने भक्तों को उनके भविष्य के बारे में पूर्व में ही बता दिया करते थे। डाक्टर प्रभात शर्मा मथुरा स्थित पशु विज्ञान (वैटनरी) कालेज से शिक्षा पूर्ण कर फौज में भर्ती हो गये थे। अपने शिक्षाकाल में वे जब तब बाबा जी (महाराज जी) के दर्शन करते रहते थे। शिक्षा की अन्तिम परीक्षा में उनका एक पर्चा बुरी तरह खराब हो गया। पास होने का प्रश्न ही नहीं था। दुखी होकर आप बाबा जी के पास पहुँचे। बाबा जी बोले दुःखी क्यों है? जब उन्होंने अपने पर्चे के बारे में बताया, तो वे बोले,‘‘खराब कहाँ हुआ है? वह तो सबसे अच्छा पर्चा हुआ है तेरा।’’ आपने सोचा मन रखने के लिए बाबा ऐसा कह रहे हैं। पर जब नतीजा निकला तो उसी में सबसे अधिक अंक प्राप्त हुए। फौज में तरक्की करते हुए ये मेजर बन चुके थे और शीघ्र ही लेफ्टिनेंट कर्नल बन जाना चाहते थे। बाबा जी से मिलने पर उन्होंने पूछा,‘‘बाबा जी मेरी तरक्की कब होगी?’’ बाबा जी ने तत्काल उत्तर दिया,‘‘अब कोई तरक्की वरक्की नहीं होगी। तुझे तो कलक्टर बनना है।’’ यह क्या कह दिया बाबा जी ने फौज में रहकर कलक्टर बनने का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता था। बाबा जी पुनः बोल उठे, ‘‘तू अब कलेक्टर बनेगा, तरक्की नहीं होगी।’’ सुनकर शर्मा जी उदास हो गये परन्तु बाबा जी वाणी चरितार्थ कैसे न होती। कुछ ही समय बाद आपका अपने अफसरों से ऐसा विवाद हुआ कि आपने फौज की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। कुछ ही समय बाद आपने आर्मी कोटे से पी.सी.एस. परीक्षा में सफलता प्राप्त कर ली और कलेक्टर होकर ही सेवा निवृत हुए।
ऐसी है महाराज लीला।
उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त है।