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‘मेरे गुरूदेव’ बाबा नीब करौरी ‘महाराज’ भाग 24

‘मेरे गुरूदेव’
बाबा नीब करौरी ‘महाराज’
अनिल पंत, नैनीताल -
महाराज जी की लीला अपरम्पार रही है। यदा-कदा वे अपने भक्तों की परीक्षा भी ले लिया करते थे।
कानपुर के एक भक्त श्री गोयल जी अपने किसी कार्य से हल्द्वानी आये हुए थे। यद्यपि शाम होने लगी थी परंतु आपने सोचा कि लगे हाथ कैंची में महाराज जी के भी दर्शन कर लें। उसके पश्चात बरेली लौट जाएंगे। उन्होंने पेट्रोल मीटर देखा तो उसमें कैंची होकर लौटने तक पर्याप्त पेट्रोल था। उन्होंने महाराज जी के शीघ्र दर्शन की लालसा में पेट्रोल लौट कर भरवाना उचित समझा कि कहीं महाराज जी विश्राम करने न चले जायें। वे कैंची पहुँचे, दर्शन किए और जाने की आज्ञा माँगी तो महाराज जी ने रोक लिया। उन्होंने सोचा कि अब रात को क्या जरूरत है सुबह पेट्रोल भरवाते हुए बरेली निकल जाएंगे। उन्होंने प्रेम पूर्वक प्रसाद पाया और विश्राम करने कक्ष में चले गये। रात को दस ग्यारह बजे के करीब आज्ञा हुई कि चलो अभी चलना है। महाराज जी ने यह भी नहीं बताया कि कहाँ चलना है। वे महाराज जी को बैठा कर चल दिये। रास्ते में जहाँ-जहाँ भी पहुँचे सारे पेट्रोल पम्प बंद मिले। परंतु वे महाराज जी के निर्देशानुसार चलते गए। चलते-चलते बुलंदशहर के पास एक निर्जन स्थान पर गाड़ी रूकवा कर बोले,‘‘हम एक भक्त के यहाँ जा रहे हैं तुम बरेली लौट जाओ।’’ यह सुनकर गोयल साहब सकते में आ गए। यह सोचते हुए कि अब तक तो महाराज जी की शक्ति से गाड़ी चलती रही परंतु अब तो अकेले वो भी निर्जन स्थान पर बिना पेट्रोल कैसे बरेली पहुँचूगा।
अंधेरी रात में ऐसे निर्जन स्थान पर भय का व्याप्त होना स्वाभाविक था। लाचार हो कर उन्होंने महाराज जी का स्मरण कर गाड़ी आगे बढ़ाई और बरेली की ओर चल दिए। गाड़ी चलती रही। सहसा एक स्थान पर आ कर गाड़ी रूक गयी। तभी उन्होंने सामने से एक रोशनी देखी। आप जरीकेन लेकर थोड़ा आगे गए। आप यह देख कर प्रसन्न हो गये कि वह पेट्रोल पम्प ही था। आपने जरीकेन से थोड़ा पेट्रोल डाला फिर पूरा पेट्रोल लेकर आप सकुशल बरेली पहुँच गए।
अनंत अमृतकथा से।