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‘मेरे गुरूदेव’ बाबा नीब करौरी ‘महाराज’ भाग 7

अनिल पंत, नैनीताल -
अनेक प्रतिष्ठित व्यक्ति एवं उच्चाधिकारी भी उनके साथ चल रहे थे। घरों से पुष्प वर्षा हो रही थी। लोग विमान को रोक कर उनकी आरती कर रहे थे। रात्रि के करीब 9-10 बजे महाराज के परिवार के सदस्यों और भक्त समुदाय के द्वारा महाराज के पार्थिव शरीर को चन्दन की चिता में अर्पण कर दिया गया। अगले दिन चिता के शान्त हो जाने पर अस्थि पुष्प एवं भस्म को अनेक कलसों मंे एकत्र किया गया और उन्हें हरिद्वार, इलाहाबाद ;प्रयागद्ध आदि तीर्थों में विधिवत प्रवाहित कर दिया गया तथा कलस महाराज के आश्रमों को भी भेजे गये। जहाँ उनके ऊपर महाराज के विग्रह की स्थापना की गई। केहर सिंह जी को भी अस्थि-पुष्प बीनते देखकर कानपुर के श्री देवकामता दीक्षित जी को महाराज की कही हुई बाद याद आ गई कि ‘‘केशर सिंह मेरी अस्थि बीनेगा।’’ जो सत्य घटित हुई।
कैंची आश्रम में महाराज की ‘बारहवीं’ स्थानीय प्रथा के अनुसार मनाई गई तथा वृन्दावन में ‘तेरहवीं’ एक वृहद भण्डारे के रूप में मनाई गई और भक्तजन महाराज के महाप्रसाद को पाकर धन्य हुए।
कहा जाता है कि महान संत एवं योगी देवरहां बाबा ने अपने भक्तों से कहा ‘‘ऐसा खेल वे अनेकों बार कर चुके हैं। वे जा कहाँ सकते हैं? वे जीवित हैं और सदा जीवित रहेंगे। आज भी उनकी ड्डपा अनेक भक्तों पर होती रहती है। आज भी वे लोगों की समस्याओं का निराकरण करते रहते हैं।
महाराज जी सर्व शक्तिमान हैं। वह सब कुछ करने में समर्थ हैं। उनका नर रूप अवतरित होना और उनके अनुकूल आचरण कर दिखाना उनकी अनंत शक्ति का समर्थन ही है। मुनष्य के कल्याण के लिये या उसे कुछ बताने या सिखाने के लिये भगवान को नररूप में अवतरित होना ही होता है। महाराज भी जन कल्याण के लिये अवतरित हुए।
फेसबुक के सी.ई.ओ. मार्क जुवेर ने 27 सितम्बर 2015 को फेसबुक मुख्यालय में प्रधानमंत्री मोदी जी सेे कहा था कि भारत उनकी कम्पनी के इतिहास के लिये व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण है। यह एक ऐसी कहानी है जिसे मैंने सार्वजनिक रूप से कभी नहीं कहा। कुछ ही लोग जानते हैं कि एपल के सह संस्थापक रहे स्टीव जाब कभी अपने दोस्त के साथ कैंची मंदिर गये थे। उसके बाद ही एपल ऐजाद हुआ। उन्हीं के कहने से मैं भी कैंची मंदिर उस समय गया जब मेरा कारोबार डूब रहा था और बाबा की प्रेरणा और आर्शीवाद से मैं यहाँ तक पहुँच पाया हूँ। यह बात जब कही गयी ;27 सितम्बर 2015द्ध उस दिन अनंत चतुर्दशी ;महाराज का महाप्रयाण दिवसद्ध थी।
आज दुनिया मान गई है कि बाबा तकदीर बदल देते हैं। भक्तों को आसमान में चमकता सितारा बना देते हैं। आज हर जगह महाराज की चर्चा है क्योंकि महाराज की शायद आज यही इच्छा है। महाराज के कहे हुए वचनों के अनुसार,‘‘हमें कोई नहीं जान सकता, जब तक हम न चाहें।’’ सच में महाराज ने आज फिर से दुनिया को जगा दिया। हम बहुत भाग्यवान हैं जो हमें नीब करौरी बाबा जैसे गुरू मिले। जिन्होंने हम पर विशेष ड्डपा की। गुरू जो स्वयं में भगवान हैं। हमें भगवान ढूंढने की आवश्यकता नहीं क्योंकि बाबा ;महाराजद्ध ही भगवान हैं।
गुरू ब्रहमा गुरू विष्णु गुरू देवः महेश्वरः।
गुरू साक्षात पर ब्रहमः तस्मेः श्री गुरूवे नमः।।
गुरूदेव हमें अपनी ड्डपा की छाँव में बिठाये रखना।