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‘मेरे गुरूदेव’ बाबा नीब करौरी ‘महाराज’ भाग 9

अनिल पंत, नैनीताल -
महाराज जी अपने भक्तों के प्रति बहुत ही उदार रहे। भक्त की इच्छा पूर्ति के लिये वो सदा तत्पर रहते। अलौकिक यथार्थ में राजीदा लिखते हैं-
एक बार मेरे छोटे चाचा जी अपने बड़े भाई साहब के साथ काठगोदाम से लखनऊ जाने वाली रात की गाड़ी से यात्रा कर रहे थे। उनके अगले डिब्बे में बाबा जी विराजमान थे। भोजीपुरा जंक्शन में वे बाबा (महाराज) के पास गये और उनसे बात करने लगे। गाड़ी छूटने का समय हो चुका था और गार्ड भी हरी रोशनी दिखता जा रहा था, पर गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही थी। उन्होंने ये सब बातें बाबा जी को बताईं और गाड़ी न चलने का कारण पूछा। बाबा जी बोले,‘हमने अपने एक भक्त से यहाँ पर मिलने को कहा है। वह भागा चला आ रहा है।’ लगभग पाँच मिनट बाद एक व्यक्ति उनको खोजता हुआ उनके सम्मुख प्रस्तुत हुआ। उसने बाबाजी के चरण स्पर्श किये और बाबा जी ने धीरे से उससे कुछ कहा और तत्काल आशीर्वाद दे उसे विदा किया। उसके तुरंत बाद गाड़ी चल पड़ी।
इसी तरह से लखनऊ के भानू प्रताप सिंह कहते हैं कि एक बार मैं अपने मामा लखपत सिंह रघुवंशी कमिशनर के घर बरेली गया हुआ था। आपके मामा जी ने आपको व अपने पुत्र को महाराज जी को स्टेशन से लिवा लाने के लिए भेजा। गाड़ी निश्चित समय पर आई। हम लोगों ने सारी गाड़ी व स्टेशन छान मारा पर बाबा जी कहीं दिखाई नहीं दिये। जब वे लोग लौट कर घर आये तो इन्होंने महाराज को अपने मामा से बात करते हुए देखा। आप कहते हैं यह मुझे महाराज के प्रथम दर्शन थे। मैंने यहीं समझा कि भूल हमारी थी जो हम उन्हें नहीं देख पाये। मैं उनकी लीलात्मक विलक्षणताओं से परिचित न था।
दूसरे दिन महाराज ने जाना था। समय पर गाड़ी के टिकट भी मंगवा लिये थे। उन्हें एक बजे दिन में गाड़ी में सवार होना था। महाराज को गाड़ी में बिठाने का काम मुझ पर छोड़ा गया था। पर महाराज यों ही विलम्ब किये जा रहे थे। गाड़ी आने में पाँच मिनट का समय रह गया था। महाराज मुझसे बोले,‘हम पड़ोस में डा॰ भंडारी के घर हो कर आते हैं।’ मैं घबराया हुआ तो था ही, मैंने कहा,‘फिर आप गाड़ी नहीं पकड़ सकते हैं। समय तो हो गया है।’ महाराज यह कह कर कि गाड़ी आधा घंटा लेट है, भंडारी जी के घर चले गये। मैंने फोन कर स्टेशन से गाड़ी के बारे में पूछताछ की। वास्तव में गाड़ी आधा घंटा लेट थी। मैं आश्यचर्य चकित हो उनकी महत्ता पर मुग्ध हो गया। ऐसे हैं अन्तर्यामी।
अलौकिक यथार्थ से।