अपना शहर

....का चैराहा बना एस0 टी0 एच0

चिकित्सा का तमाशा और गरीबों की मजबूरी का
चैराहा बना एस0 टी0 एच0
आये दिन किसी ना किसी विवाद की जद में रहने के कारण आज डा0 सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज साधन और संसाधन रहित बीमार लोगों के लिए एक मजबूरी बन गया है। जिस तरह से आये दिन डाक्टरों व अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगते रहते हैं इससे अच्छे स्वास्थ्य के लिये इस मेडिकल कालेज की ओर आस से देखने के लिए इस सूबे के लोगों की भावना को गहरा धक्का लगा है। जिस तरह का स्वरूप इस मेडिकल कालेज का लोगांे के मानस पटल पर बनता जा रहा है वह बहुत ही सोचनीय है। इस संस्था के लिये ना जाने कौन से ऐसे तथ्य हैं जो इसकी छवि को धुमिल करने में लगे हुए हैं। इस प्रकार के प्रकरणों से जहाँ ईमानदारी व सेवा भाव से काम करने वाले लोगों को धक्का लगा है, वहीं मरीजों में भी अस्पताल के प्रति शंका बढ़ी है। अच्छे स्वास्थ्य और मानवता के लिये समर्पित किसी भी संस्था से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है। सबसे बड़ा दुर्भाग्य नौकरशाही प्रशासन व सरकार की चुप्पी है। जिस राज्य का अपनी संस्थाओं में ही नियंत्रण नहीं है, जन मानस के लिये चिकित्सा व अच्छे स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है, वहां का तो राम ही मालिक है। महंगी होती चिकित्सा में जब गरीब इन संस्थाओं की ओर देखता है तो इस तरह के प्रकरणों से उसे निराशा ही होती है। लेकिन मजबूरी के हाथों बंधा मरीज करे तो क्या करे। उसे तो बीमारी में भी और अस्पताल में भी हताशा और निराशा दिखती है। लेकिन जिस तरह से आये दिन विवाद हो रहे हैं उसने चिकित्सा जैसे संवेदनशील पेशे को संवेदनहीन बना दिया है। चिकित्सा को तमाशा और गरीब बीमार की मजबूरी जिसमें उसे जीवन नहीं मृत्यु नजर आती है। मेडिकल कालेज को अपनी बिगड़ती हुई साख को सुधारना होगा। जो इसकी छवि खराब करने में तुले हुए हैं, उनकी पहचान करनी होगी। जो इसकी संवेदहीन छवि बन गयी है, उसको संवेदनशील बनाना होगा। तभी इसका उद्देश्य पूरा होगा और लोगों को यहां यमदूत नहीं देवदूत दिखाई देंगे और अभी भी नहीं संभले तो चिकित्सा का तमाशा और गरीबों की मजबूरी का चैराहा बन जायेगा यह मेडिकल कालेज, जहां जिन्दगी चिकित्सा से ज्यादा किस्मत से जीती जायेगी।